- चौधरी चरण सिंह से लेकर 2019 के चुनाव तक उनके परिवार ने लड़ा यहां से प्रत्येक चुनाव
- पहली बार रालोद ने किसी जमीनी कार्यकर्ता राजकुमार सांगवान को सौंपी कमान
मुख्य संवाददाता |
बागपत: लोकसभा चुनावी पिच पर रालोद ने एक ओर गुगली फेंककर सभी को चौंका दिया है। रालोद मुखिया चौधरी जयंत सिंह के परिवार की पैतृक सीट मानी जाने वाली बागपत लोकसभा सीट पर इस बार बड़ा उलटफेर टिकट में कर दिया है। बागपत सीट से चौधरी परिवार ने चुनाव नहीं लड़ने की बजाय अपनी पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता डॉ. राज कुमार सांगवान को प्रत्याशी बनाया है। वर्ष 1977 के बाद से पहली बार चौधरी परिवार का कोई सदस्य बागपत सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगा। एनडीए से गठबंधन कर रालोद मुखिया पहले ही चौंका चुके हैं और अब अपने परिवार की पैतृक सीट पर खुद या उनकी पत्नी का चुनाव नहीं लड़ने के निर्णय ने भी चौंका दिया है। देखा जाए तो कहीं न कहीं कार्यकर्ताओं में भी यहां जोश भरेगा और उन्हें भी उम्मीद लगेगी कि वह भी प्रत्याशी हो सकते हैं।
बागपत लोकसभा सीट को अगर 2014 से पहले रालोद का गढ़ कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। क्योंकि यहां वर्ष 1977 से चौधरी परिवार का कब्जा रहा है। हालांकि वर्ष 1998 में भाजपा के सोमपाल शास्त्री ने जरूर चौधरी अजित सिंह को हराकर चौधरी परिवार को झटका दिया था। वर्ष 1977 में चौधरी चरण सिंह ने यहां से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में जीत के बाद उन्होंने तीन बार यहां से विजयी हासिल की। वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में पिता की सीट पर पुत्र चौधरी अजित सिंह को चुनावी मैदान में आना पड़ा।
चौधरी चरण सिंह के सीट जब उनके पुत्र चौधरी अजित सिंह को विरासत में मिली तो जनता का अपार स्नेह भी उन्हें मिला और वह विजयी होते चले गए। वर्ष 1998 में भाजपा के सोमपाल शास्त्री ने उन्हें हराकर विजयी रथ रोका था। हालांकि उसके बाद अगले ही साल यानी वर्ष 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में जनता ने फिर से चौधरी अजित सिंह को यहां से विजयी बनाया। चौधरी चरण सिंह यहां से तीन बार सांसद बने और चौधरी अजित सिंह यहां से छह बार सांसद बने।
वर्ष 2009 के चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन में चौधरी अजित सिंह ने अपने पुत्र चौधरी जयंत सिंह को भी राजनीति में उतारा था और मथुरा सीट से चुनाव लड़ाया था। उस चुनाव में जयंत चौधरी विजयी हो गए थे। उसके बाद वर्ष 2014 में बागपत सीट पर भाजपा ने रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह के सामने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर डॉ. सत्यपाल सिंह को उतारा था। जिसमें डॉ. सत्यपाल सिंह विजयी हुए। उसके बाद 2019 के चुनाव में चौधरी अजित सिंह मुजफ्फरनगर चले गए और यहां चौधरी जयंत सिंह चुनावी मैदान में आ गए, परंतु भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह ने जयंत को भी शिकस्त दी और जीत हासिल की। चौधरी परिवार की लगातार दो हार के बाद रालोद का गढ़ यहां से समाप्ति की ओर चल दिया था। क्योंकि विधानसभा में भी तीन में से महज एक ही सीट छपरौली रालोद के पास रह गई थी।
इस चुनाव को लेकर रालोद मुखिया के कदम का सभी को बेसब्री से इंतजार था। क्योंकि चर्चा यह थी कि चौधरी जयंत सिंह राज्यसभा हैं और वह खुद चुनाव नहीं लडेंÞगे। उनकी पत्नी चारू चौधरी बागपत से प्रत्याशी को सकती है। हालांकि कई दिनों से पार्टी के पुराने कार्यकर्ता डॉ. राज कुमार सांगवान के नाम की चर्चा चल रही थी। जिस पर रालोद हाईकमान ने मुहर लगा दी है और उन्हें बागपत लोकसभा सीट पर प्रत्याशी घोषित किया है। रालोद मुखिया चौधरी जयंत सिंह ने एक साधारण और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता पर यहां से भरोसा जताया है।
अपने परिवार की पैतृक सीट पर चौधरी परिवार ने पहली बार किसी अन्य को उतारा है। वर्ष 1977 से 2019 के चुनाव तक चौधरी चरण सिंह, चौधरी अजित सिंह, चौधरी जयंत सिंह ही चुनाव लड़ते आए हैं। किसी अन्य पदाधिकारी या फिर कार्यकर्ता को यहां से चुनावी मैदान में नहीं उतारा गया। पहली बार रालोद ने अपनी पैतृक सीट पर किसी अन्य को चुनावी मैदान में उतारने का काम किया है। जैसे ही डॉ. राज कुमार सांगवान के नाम की घोषणा हुई तो सभी चौंक गए। क्योंकि कयास यह भी लगाए जा रहे थे कि चौधरी परिवार बामुश्किल यह सीट छोड़ेगा और एनडीए के साथ गठबंधन में चारू के चुनाव लड़ने की पूर्ण संभावनाएं थी। राज कुमार सांगवान के प्रत्याशी घोषित कर रालोद ने जयंत और चारू के चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर बे्रक लगा दिया है।
अब देखना यह है कि रालोद यहां से इस बार क्या करिश्मा दिखाती है? एनडीए के साथ गठबंधन का फायदा होगा या नहीं? यह तो परिणाम ही बताएगा, लेकिन एक कार्यकर्ता को टिकट देने पर कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। रालोद नेता ओमबीर ढाका का कहना है कि पार्टी मुखिया का यह सराहनीय निर्णय है। प्रत्येक कार्यकर्ता में इससे जोश और जुनून पैदा होगा। रालोद मुखिया ने एक कार्यकर्ता को सम्मान देकर जता दिया है कि यहां प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान है। कहा कि रालोद यहां से प्रचंड जीत हासिल करेगी।

