- फौजी से मांगे थे एक लाख रुपये नाम हटाने को
- पीड़ित परिवार वीडियो लेकर एसएसपी से मिला था
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भ्रष्टाचार के लिये बदनाम महिला थाने में एक शर्मनाक रिकॉर्ड बन गया है। दुष्कर्म के एक मुकदमे में फंसे सेना के एक जवान का नाम निकालने के लिये धमका कर एक लाख रुपये मांगने की आरोपी एसओ महिला थाना मोनिका जिंदल, दारोगा रीतू काजला को एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। एसएसपी ने दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच बैठाते हुए मुकदमा दर्ज हो गया है। एसपी देहात की जांच रिपोर्ट के बाद एसएसपी ने सख्त कार्रवाई की है।
कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला की शादी छूर गांव में रहने वाले युवक से हुई थी। विवाद के कारण महिला ने कंकरखेड़ा थाने में दहेज उत्पीड़न और देवर पर दुष्कर्म की तहरीर दी थी। महिला का देवर सेना में तैनात है। पुलिस की जांच में दुष्कर्म का मामला झूठा निकला। इसलिए मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। महिला ने महिला थाने में पति और देवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। जांच के लिए महिला दारोगा रितू काजला पहुंची।
आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए। फिर सेना के जवान से नाम निकालने के लिये महिला थाना प्रभारी मोनिका जिंदल और दारोगा ने एक लाख रुपये की मांग की। आरोपी पक्ष ने जब पैसे देने में असमर्थता जताई तो उनको जेल जाने की धमकी दी गई। बताया जाता है जब पैसों की मांग की जा रही थी तब आरोपी पक्ष की तरफ से वीडियो और आडियो रिकार्ड कर लिया गया।
सौदेबाजी की आडियो से यह भी पता चला है कि पीड़ित पक्ष से ली गई रकम में से 15 हजार थाना प्रभारी, नौ हजार रुपये दारोगा में बांटने की बात कही जा रही है। होमगार्ड 50 हजार देने की बात कह रहा है। होमगार्ड बता रहा है कि तीन किश्तों में दारोगा को 34 हजार की रकम दे चुका है। इस पर महिला दारोगा होमगार्ड को 34 हजार की रकम का हिसाब देती है। एसपी देहात केशव कुमार ने जब इस पूरे मामले की जांच की तो एसओ मोनिका जिंदल की संलिपत्ता पाई गई। आडियो रिकार्डिंग ही साफ बता रही है कि महिला थाने में किस हद तक भ्रष्टाचार भरा हुआ है।

