Friday, January 23, 2026
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…ताकि नए साल में आप रहें सेहतमंद

नीतू गुप्ता

भविष्य का कुछ भी पहले से अनुमान नहीं लगा सकते कि नए वर्ष में हमारा स्वास्थ्य कैसा रहेगा पर हम अपना लाइफ स्टाइल सुधार कर स्वयं को स्वस्थ रखने का प्रयास तो कर सकते हैं। कुछ टिप्स को अपनाकर हम साधारण बीमारियों से दूरी बना सकते हैं।

डायरिया

तेजी से भागते युग में पौष्टिक आहार का सेवन करना कुछ मुश्किल है, क्योंकि पौष्टिक आहार से ज्यादा जंक फूड का सहारा लेना पड़ता है। कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से भी सब्जियां व फल, एलर्जी करते हैं। इन सबसे फूड प्वायजनिंग का होना, पेट दर्द, पेट में गड़बड़ी का होना स्वाभाविक है। कुछ लोग तो जंक और डिब्बाबंद फूड का अत्यधिक सेवन करते हैं। इसके परिणाम स्वरूप डायरिया का होना स्वाभाविक है। जिन दिनों डायरिया या पेट में कोई भी गड़बड़ी हो, उन दोनों हाई फाइबर और तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। फल में केला, सेब व नाशपाती लें। खाने में दही, चावल, खिचड़ी, आलू और गाजर की सब्जी का सेवन करें। पीने में नारियल पानी, सब्जियों का सूप, कम वसा वाली छाछ, नींबू पानी और पानी का काफी मात्रा में सेवन करें।

डीहाइड्रेशन (निर्जलीकरण)

अक्सर गर्मियों में इस साधारण बीमारी से जूझने के अवसर अधिक होते हैं क्योंकि अधिक गर्मी में थोड़ा सा भी पानी कम लेने पर इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। डायरिया और उल्टियां होने पर भी इसका खतरा बढ़ जाता है।

इसके लिए उबले हुए पानी में थोड़ा सा नमक, चीनी और नींबू का रस मिलाकर थोड़ा-थोड़ा करके पिएं। एक साथ अधिक पानी न लें। ताजे फलों का रस, नारियल पानी, सब्जियों का सूप, लस्सी लेते रहें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। अगर आप व्यायाम नियमित करते हैं या कोई खेल खेलते हैं तो पानी की प्यास लगने पर ब्रेक में अवश्य फ्रूट जूस या पानी का सेवन करें क्योंकि व्यायाम और खेल के दौरान शरीर से पसीना निकलता है जो शरीर में पानी की कमी ला सकता है। ब्रेक में आप खीरा, तरबूज, केला, सलाद आदि भी ले सकते हैं। ध्यान रखें डिब्बा बंद जूस और साफ्ट ड्रिंक का सेवन न करें।

चेस्ट कंजेशन

बढ़ते प्रदूषण और मौसम में बदलाव के कारण एलर्जी और इंफेक्शन के केस बढ़ रहे हैं। इन्हें अनदेखा करने से चेस्ट कंजेशन होने का खतरा बढ़ जाता है। जब कभी ऐसी समस्या आ जाए तो शरीर को पूरा आराम दें और पूरी मात्रा में नींद लें। सब्जियों और फलों का सेवन बढ़ा दें। अनन्नास, संतरे खूब खाएं और गोभी का सेवन करें। काली मिर्च चाय में और फलों पर डालकर ले सकते हैं। डाक्टर से परामर्श कर दवाई का सेवन करें।

मधुमेह

मधुमेह का मुख्य कारण निष्क्रिय जीवन शैली है। निष्क्रिय जीवन शैली से मोटापा भी बढ़ता है और मधुमेह भी, मधुमेह रोगियों को अपने खानपान पर और सक्रिय जीवन शैली पर पूरा ध्यान देना चाहिए। अपना डाइट चार्ट किसी विशेषज्ञ से बनवाएं और उस पर सख्ती से अमल करें। दालों, सब्जियों, फलों, मोटे अनाजों, कम वसा वाले दुग्ध उत्पादों, सूखे मेवों का सेवन नियमित करें और लम्बी सैर, हल्के व्यायाम डाक्टर के परामर्श के अनुसार नियमित करें। अपना चैक अप नियमित करवाते रहें मगर आप दवा ले रहे हैं तो उसे भी नियमित लें।

आस्टियोपोरोसिस

शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से चुपके से आॅस्टियोपोरोसिस आपके शरीर में प्रवेश कर लेता है। मोटापा और अधिक गरिष्ठ भोजन खाने से भी यह रोग जल्दी लग जाता है। इससे बचाव हेतु प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन डी का नियमित सेवन खाद्य पदार्थों में करते रहें। कैल्शियम रिच खाद्य पदार्थों में कम वसा वाला दूध, चीज, पनीर, दही, वीन्स, मोटे अनाज, बादाम और मछली का सेवन करें ताकि इस रोग से बचा जा सके। सक्रिय जीवी शैली अपनाएं। जोड़ों की सूक्ष्म क्रियाएं, हल्के व्यायाम, योग नियमित करते रहें।

कुछ और टिप्स

’ अप्राकृतिक पेय पदार्थों का सेवन न करें। ताजा फलों का रस अधिक लाभप्रद है।

’ अपने आहार में सब्जियों और फलों की मात्रा बढ़ाएं।

नियमित सैर और व्यायाम करें।

’ खूब सारा पानी पियें ताकि विषैले तत्व आपके शरीर पर कब्जा न जमा सकें।

’ जंक फूड खाने से अच्छा है कि सलाद, भुने चने व अंकुरित दालों का सेवन करें।

’ घर में ताजी हवा आने का विशेष प्रबंध करें। धूप का सेवन अवश्य करें।

’ कोल्ड ड्रिंक्स से दूरी बनाकर रखें। देसी तरीके से बने शरबत का इस्तेमाल करें।

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