Monday, March 16, 2026
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सपा-बसपा की मुस्लिम वोटों पर निगाहें

  • बसपा व इंडी गठबंधन की निगाहें मुस्लिमों पर टिकी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर एक बार फिर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। मुस्लिम मतदाता इंडी गठबंधन व बसपा प्रत्याशी का भविष्य तय करेंगे। दोनों प्रत्याशियों की निगाहें मुस्लिम मतदाताओं पर टिकी हैं। हालांकि मुस्लिम मतदाता अभी तक खुलकर किसी एक पक्ष का समर्थन में नहीं उतरा। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर एनडीए गठबंधन की ओर से भाजपा ने अरुण गोविल को चुनाव मैदान में उतारा है,

वहीं इंडिया गठबंधन की ओर से इस बार हस्तिनापुर के पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी पूर्व मेयर सुनीता वर्मा को चुनावी ‘रण’ में उतारा है। उधर, बसपा ने इस सीट पर देवव्रत त्यागी को चुनावी अखाड़े में उतारा है। अरुण गोविल ने राजनीति में पहला कदम रखा है, भाजपा ने उनके सिर पर लोकसभा सीट निकालने की जिम्मेदारी सौंपी है। उधर, देवव्रत त्यागी पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हैं। जबकि सुनीता वर्मा मेयर के चुनाव में भाजपा को शिकस्त दे नगर की प्रथम नागरिक की कुर्सी कब्जा चुकी हैं।

उनके पति भी हस्तिनापुर सीट से विधानसभा में पहुंच चुके हैं। अब दोनों ही राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र में मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण, किठौर और हापुड़ विधानसभा का क्षेत्र है। इस सीट पर दलित मुस्लिम गठजोड़ जीत का ब्रह्मास्त्र माना जाता है। हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में प्रदेशभर में बसपा का सूपड़ा साफ हो गया था, लेकिन मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर हाजी याकूब कुरैशी की जीत की कश्ती किनारे पर आकर करीब चार हजार वोट कम रहने से डूब गई थी।

उन्हें भाजपा के टिकट पर राजेन्द्र अग्रवाल ने हराकर हैट्रिक बनाई थी। राजेन्द्र को वोटों की गिनती पूरी होने के कई घंटे बाद विजयी घोषित किया गया था, जबकि घोषणा से पूर्व क्षेत्र में यह बात बहुत तेजी से फैल गई थी कि हाजी याकूब जीत चुके हैं, लेकिन कई घंटे बाद राजेन्द्र अग्रवाल के सिर जीत का सेहरा बंध गया था। राजनीतिक पंडितों के अनुसार मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर करीब 18 लाख वोटरों मेंं लगभग पांच लाख मुस्लिम वोटर और पौने चार लाख दलित वोटर, डेढ़ लाख पंजाबी वोटर, दो लाख वैश्य व जैन समाज के वोटर, एक लाख ब्राह्मण, लगभग सवा लाख त्यागी वोटर, डेढ़ लाख ओबीसी वोटर तथा कुछ-कुछ हजार अन्य समाज के वोटर हैं।

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भाजपा जहां सभी हिंदू मतदाताओं को एक प्लेटफार्म पर लाने के लिए ऐड़ी चोटी के जोर लगा रही है, लेकिन उसके कार्डर वोट बैंक में इस बार पंजाबी समाज, त्यागी समाज, राजपूत समाज के विरोध के बाद सीट हाथ से निकलने का डर सता रहा है। भाजपा का बैंक भी उससे छिटकने का खतरा खड़ा हो गया है। इसके अलावा अरुण गोविल के चुनाव बाद यहां न रह पाने को लेकर बड़ी संख्या में मतदाता कशमकश में हैं। इसके अलावा जो नेता इस सीट पर टिकट की दावेदारी में थे, उनके समर्थक भी चुनाव में अभी तक रुचि नहीं ले रहे हैं,

ऐसे में भाजपा का अपना कार्डर का वोट बैंक के खिसकने का खतरा खड़ा हो गया है। उधर, इंडी गठबंधन द्वारा सपा के सिंबल पर सुनीता वर्मा को उतारने से चुनाव दिलचस्प हो गया है। सुनीता वर्मा दलित समाज से हैं और मेयर का चुनाव बसपा के निशान से लड़ चुकी हैं। तब उनकी बसपा का वोट बैंक यानी दलित समाज ने उन्हें भरपूर वोट दिया था, वहीं मुस्लिमों ने मतपेटियों को भर दिया था। मुस्लिम दलित गठजोड़ से ही उन्होंने मेयर की कुर्सी हासिल की थी।

उनके पति भी बसपा के टिकट से ही हस्तिनापुर की सीट जीत चुके हैं। इसलिए उनकी दलित वोटों पर खासी पकड़ है। हस्तिनापुर भी उनकी कर्म भूमि रही है और महानगर पूरा ही सुनीता की कर्म भूमि है। सुनीता इस सीट पर दमदार प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरी हैं। बसपा ने मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर दलित, मुस्लिम और त्यागी वोटरों का गठजोड़ बनाया है। इसी लीग पर बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी अपने प्रचार को केन्द्रित किए हैं।

उनका फोकस भी मुस्लिम समाज पर सर्वाधिक है। वह और उनके समर्थकों की टोलियां पिछले 10 दिनों से रोजाना मुस्लिम क्षेत्रों में निरंतर जनसंपर्क करके वोटों की अपील करते आ रहे हैं और मुस्लिमों को समझा भी रहे हैं कि दलित मुस्लिम गठजोड़ के साथ इस बार त्यागी समाज भी उनके साथ है, जो जीत की राह आसान कर रहा है। ऐसे में देखना यह है कि मुस्लिम वोटर किस प्रत्याशी के हक में बटन दबाता है?

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