Monday, March 16, 2026
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मसालों से भी होता है उपचारं

अनूप मिश्रा

प्रकृति ने हमें अनेक अमूल्य जड़ी-बूटियां एवं मसाले उत्तम स्वास्थ्य बनाये रखने हेतु वरदान स्वरूप उपहार में दिए हैं जिनका प्रयोग हम अक्सर भोजन बनाने के लिए किया करते है। यदि इन मसालों के औषधीय गुणों की ओर ध्यान केन्द्रित करें तो पायेंगे कि ये सभी व्यक्तियों की घातक बीमारियों को समाप्त करने में एक फर्स्ट एड बॉक्स की भूमिका निभाते हैं। आइये अब देखते हैं कि अपने घरों में स्वाद का तड़का लगाने वाले इन सभी मसालों में मौजूद औषधीय गुण किस तरह से हमारे बहुमूल्य शरीर में उत्पन्न रोगों का नाश करके स्वस्थ बनाते हैं।

हल्दी: सबसे पहले बात हल्दी की करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, हल्दी एंटीबायटिक का काम बखूबी करती है। यदि चोट लगने की स्थिति से दो-चार होना पड़े तो इसका इस्तेमाल करना कतई नहीं भूलें। इसे फेस पैक के रूप में उपयोग करते समय बेसन के साथ त्वचा पर लगाने से निखार आता है। सर्दी-खांसी में गरम पानी के साथ हल्दी को निगलने पर आराम मिलता है। हल्दी उष्ण, सौंदर्य बढ़ाने वाली, रक्तशोधक, कफ वात नाशक आदि होती है।

पुदीना: मसालों में इसका गुण अत्यंत शीतल होता है। ‘मिन्ट’ के नाम से प्रसिद्ध इस पौधे के पत्तों का प्रयोग सलाद, रायता, चटनी, सूप इत्यादि डिशेज तैयार करने में जायका बढ़ाने हेतु किया जाता है। इसे लू लगने पर, सिरदर्द होने पर पीसकर ठंडाई की भांति पिया जाता है। परिणाम स्वरूप उपरोक्त सभी बीमारियों से निजात मिल जाती है। यह मुंह की दुर्गंध को भी दूर करने में सहायक होता है।

धनिया:सब्जियों में धनिया पत्ती जहां खाने को लजीज बनाती है, वहीं दूसरी ओर इसका एक गुण ठंडक पहुंचाना भी होता है। अंग्रेजी में इसे ‘कोरिएंडर’ कहा जाता है। यह नेत्र की ज्योति बढ़ाने में अव्वल पाया गया है इसीलिए इसकी चटनी बनाकर गर्मी में रोजाना सेवन करना फायदेमंद साबित होगा।

मेथी: अन्य सभी मसालों में मेथी की साख बहुत अधिक होती है क्योंकि मल को बांधने में यह अपनी अहम भूमिका दर्ज कराता है जबकि मधुमेह रोगियों के लिए मेथी दाना रामबाण औषधि है। भारतीय भोजन में यह सब्जी, परांठे और पकौड़ी जैसे लजीज व्यंजनों को बनाने में बहुतायत से लाया जाता है। रोजाना खाली पेट एक चम्मच छोटा मेथी दाने का चूर्ण पानी के संग लेने से कब्ज की शिकायत और घुटने का दर्द जल्द ही छूमंतर हो जाता है। यही नहीं, यह शरीर की चर्बी को भी घटाता है। सर्दियों के दिनों में मेथी के हरे पत्तों की सब्जी लोगों द्वारा बेहद पसंद की जाती है जिससे व्यक्ति के शरीर को काफी फायदा पहुंचता है।

अदरक: इसका प्रयोग प्राय: पेट में कब्ज, गैस बनना, खांसी, कफ और जुकाम होने पर किया जाता है। अदरक का रस और शहद मिलाकर चाटने से दमे में भी आराम मिलता है। यह भोजन को सही तरह से पचाता है, बलगम खत्म करके भूख की मात्रा में बढ़ोत्तरी करता है। इसे कच्चा या सुखा कर सोंठ भी दोनों तरह से सेवन में लाया जा सकता है।

जीरा: अधिकांशत: इसका उपयोग दवाइयों के निर्माण हेतु सदैव किया जाता है। रक्तशोधक, वायुनाशक, पाचक रूप में विख्यात जीरा हमेशा उल्टी होने की शिकायत को दूर करने में अत्यंत सहायक होता है। पशुओं की बीमारियों में भी इसे औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है जिससे समस्या का निदान हो जाता है।

अजवायन: यह एक बहुपयोगी औषधि मसाला है। दवाइयां बनाने में तथा तेल बनाने में अक्सर अजवायन का ही उपयोग अनिवार्य समझा जाता है। निमोनिया एवं श्वास रोग में इसका चूर्ण मुंह में रखने से राहत मिलती है जबकि, उदर विकारों में बीज के साथ साधारण नमक मिलाकर लेने से लाभ होता है।

लहसुन: अंत में, मसालों के बीच लहसुन का नंबर आता है। आयुर्वेद के अनुसार हृदय रोग में लहसुन बहुत कारगर होता है। इसके अलावा खून को पतला बनाकर हृदय की धमनियों में रक्त संचार सुचारू रूप से कराने में भी बहुत मदद करता है। फलस्वरूप, हृदय रोग जैसी घातक बीमारियों से स्वयं को बचाया जा सकता है। उषाकाल में तीन से चार कलियों का नियमित सेवन करने मात्र से ही स्वस्थ रहा जा सकता है।

घरों में ही आसानी से उपलब्ध होने वाले इन औषधीय मसालों की पहचान करते हुए सही समय पर इसका उपयोग करके महंगी दवाइयों से बचाव करें।

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