Home Uttar Pradesh News बड़ौत श्री मुनिसुव्रत नाथ विधान में उत्तम आकिंचन धर्म अपनाया

श्री मुनिसुव्रत नाथ विधान में उत्तम आकिंचन धर्म अपनाया

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श्री मुनिसुव्रत नाथ विधान में उत्तम आकिंचन धर्म अपनाया

जनवाणी संवाददाता |

बड़ौत: नगर के श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में दसलक्षण पर्व के नवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म की पूजन की गई। श्री मुनिसुव्रत नाथ विधान का आयोजन किया गया। पंडित चंद्रप्रकाश जैन के नेतृत्व में जैन श्रद्धालुओं ने जिनेन्द्र भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया।

शांतिधारा का सौभाग्य सोधर्म इंद्र वीरेंद्र जैन पिंटी को प्राप्त हुआ। नित्य क्रियाएं की गईं। संगीतकार अनुपमा जैन भजन प्रस्तुत किए। श्री मुनिसुव्रत विधान की पूजन में सोधर्म इंद्र वीरेंद्र जैन द्वारा अष्ट द्रव्यों से पूजन की और मंडल पर श्रीफल समर्पित किए गए। पंडित चंद्रप्रकाश ने उत्तम आकिंचन धर्म के विषय में जानकारी दी। पंडित जी ने कहा उत्तम अकिंचन गुण जानो ,परिगृह चिंता दुख ही मानो।

विधान में मुकेश जैन, प्रदीप जैन,वरदान जैन, अमित जैन,अशोक जैन, राकेश जैन, पंकज जैन, अनिल जैन, इंद्राणी जैन, त्रिशला जैन, रश्मि जैन, डिंपल जैन, सरला जैन आदि उपस्थित थे। शाम को मंदिर में आरती हुई और बच्चो की कौन बनेगा धर्मपति प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

19 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर वासुपुज्य •ागवान का मोक्ष कल्याणक धूमधाम से मनाया जायेगा। मंदिर में थालिया चढ़ाई जाएगी। 20 सितंबर को अजीतनाथ भगवान का अभिषेक यात्रा महोत्सव मनाया जायेगा।

पर्यूषण माहपर्व के नवम दिवस उत्तम आकिंचन की पूजा की

नगर के श्री 1008 पार्श्वनाथ मन्दिर में श्रद्धालुओं ने अकिंचन धर्म की पूजा की गई। तेरह द्वीप महामंडल विधान का आयोजन किया गया। पंडित नेमचंद जैन के दिशा निर्देशन में नित्य क्रियाएं आयोजित की गई। छब्बीस अर्घ्य समर्पित किये गये। पण्डित नेमचंद ने कहा कि उत्तम आकिंचन यानी परिग्रह का त्याग करना , परिग्रह मतलब जरूरत से ज्यादा जोड़ना। जिस वस्तु की जरुरत नही उसको भी इकट्ठा करना ही परिग्रह है ।

इंसान न कुछ साथ लाया है ना ले जयेगा इस धरा का इस धरा पर ही धरा रह जायेगा। परिग्रह के मोह में फसकर मानव अन्याय अनीति के मार्ग के मार्ग की ओर अग्रसर होता हैं परिग्रह का संचय करने के लिये झूठ हिंसा अन्याय करता है तथा क्रोध माया लोभ कषाय की ओर बढ़कर कर्मो का बन्ध करता है। सांयकाल मन्दिर में श्री भक्ताम्बर का विधान हुआ तथा श्री जी की आरती की गई।

इसके बाद संयम जैन व मानवी जैन ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन पण्डित नेमचंद जैन ने किया। कार्यक्रम में अध्यक्ष सतेंद्र जैन,अनिल, नरेश, संजय, निरंजन, विजय, मुकेश, संजीव, आदीश, रश्मि, पूनम, स्नेह, गीता, सुनीता, अनिता, मनीषा आदि शामिल थे।

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