- सर्वे पर सवाल, थोड़े से समय में ढेरों मदरसों की कैसे हो पाएगी पारदर्शी जांच
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में घनी आबादी के बीच चल रहे मदरसों का सर्वे अधिकारी कैसे करेंगे, इसका जवाब खुद उनके पास भी नहीं है। इन इलाकों में सर्वे के लिए प्रशासन के पास न तो कोई रूट मैप है और न ही कोई रणनीति। यानि सब कुछ हवा में? आदेश चूंकि सरकार के मुखिया का है इसलिए सर आंखों पर, लेकिन सर्वे के लिए जो समय सीमा निर्धारित की गई है वो जांचकर्ताओं को जरुर अखर रही होगी।
जांच में पहला बैरियर तो जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के कार्यालय से ही शुरू हो जाता है क्योंकि इस विभाग के पास कोई ऐसी सूची नहीं है जिसके आधार पर वो आसानी से मदरसों तक पहुंच सके। दूसरा जांच के लिए सरकार ने जो टाइम लाइन तय की है वो भी मदरसों की संख्या को देखते हुए नाकाफी है। नायाब शहर काजी जैनुल राशेदीन के अनुसार इस समय जिले में कम से कम 600 ऐसे मदरसे हैं जो कहीं पर भी सूचीबद्ध नहीं हैं।
इसके अलावा यदि विभिन्न मस्जिदों में चल रहे मदरसों की बात करें तो जिले में ऐसे मदरसे अथवा मकतब एक हजार से ऊपर बैठते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेरठ में तीन लोगों की टीम आखिर इतने कम समय में पारदर्शी सर्वे को कैसे अंजाम देगी। इस सर्वे के लिए जो 12 बिन्दू दिए गए हैं यदि उन पर पारदर्शी तरीके से तहकीकात की जाए तो जिले भर के सभी मदरसों की जांच के लिए एक साल भी कम है।
…बस एक जादू की झप्पी और मदरसों की जांच पूरी
इस संबध में जब जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का अतिरक्ति कार्यभार देख रहे जिला पिछड़ा वर्ग अधिकारी शैलेश रॉय से ‘इतने कम समय में सभी मदरसों का सर्वे कैसे होगा?’ संबधी सवाल किया गया तो उन्होंने तुरन्त ये जवाब दिया कि यह हमें तय करने दीजिए कि जांच कैसे होगी।

अब या तो प्रशासनिक अधिकारियों के पास जादू की कोई छड़ी है। जिसे घुमाते ही जांच पूरी हो जाएगी या फिर उनके पास जांच पूरी करने का कोई गुप्त फॉर्मूला है?
मदरसों का सर्वे शुरू, डीएमओ से मिले मदरसा संचालक
मेरठ: मेरठ में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे का काम गुरुवार से शुरू कर दिया गया। जिला प्रशासन की तीन सदस्यीय कमेटी इन मदरसों का सर्वे करेगी। कमेटी में एसडीएम के अलावा अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और बीएसए शामिल हैं। बताया जाता है कि पहले दिन लिसाड़ी गेट के समर गार्डन इलाके में मदरसे के सर्वे के लिए टीम पहुंची। दूसरी ओर सर्वे के बिंदुओं पर असमंजस की स्थिति को लेकर मदरसा जामिया मदानिया हापुड़ रोड के प्रधानाचार्य कारी अफ्फान के नेतृत्व में मदरसा संचालकों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शैलेश राय से मिला।
अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने मदरसा संचालकों से अपील की है कि वे मदरसे के सर्वे को जांच न समझें। उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। डीएमओ शैलेश रॉय ने मदरसा संचालकों से यह भी कहा है कि वह एक निर्धारित परफॉर्मा भर कर उनके कार्यालय में जमा करा सकते हैं। इस परफॉर्मा में उन सभी बिंदु पर सवाल किए गए हैं जो शासन से भेजे गए हैं। उधर कारी अफ्फान ने सभी मदरसा संचालकों से अपील की है कि वे बिना हिचके और बिना डरे अपने सारे डाक्यूमेंट्स प्रशासन के सामने प्रस्तुत करें। इस दौरान उन्होंने प्रशासन को आश्वासन दिया कि वे अपने स्तर से सरकार की इस मुहिम में पूरी तरह से सहयोग देंगे।

