जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी व्यापार नीतियों में बड़े बदलावों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपने मजबूत घरेलू आधार के दम पर स्थिर बनी हुई है। (SBI) की ताजा पोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026 (FY26) की तीसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 8.1 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है।
वहीं, Moody’s Analytics की रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 15 प्रतिशत टैरिफ से वैश्विक व्यापार और विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में व्यापारिक समीकरणों में बड़े बदलाव आ सकते हैं।
घरेलू खपत का योगदान
SBI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य इंजन उसकी घरेलू मांग है:
ग्रामीण खपत में मजबूती: कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में सकारात्मक संकेतों के कारण ग्रामीण क्षेत्र की खपत मजबूत बनी हुई है।
शहरी खपत में सुधार: पिछले त्योहारी सीजन और राजकोषीय प्रोत्साहनों से शहरी खपत में निरंतर सुधार दिख रहा है।
जीडीपी अनुमान: FY26 के लिए कुल जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
बेस ईयर बदलाव: भारत अपने जीडीपी बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर रहा है। नए आंकड़े 27 फरवरी 2026 को जारी होंगे।
महंगाई और RBI का नजरिया
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का बेस ईयर 2024 कर दिया गया है। Sanjay Malhotra के अनुसार, अप्रैल की मौद्रिक नीति में महंगाई दर लक्ष्यों के संशोधित ढांचे की समीक्षा की जाएगी।
अमेरिकी टैरिफ नीति और वैश्विक व्यापार
मूडीज के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने 150 दिनों के लिए सभी आयातों पर 10 प्रतिशत अस्थायी टैरिफ लगाया और इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की योजना बनाई है। 15% टैरिफ से चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को लाभ हो सकता है, जबकि जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान पर इसका सीमित असर होगा। भारत और इंडोनेशिया के साथ अमेरिका की व्यापारिक वार्ता पर अनिश्चितता बढ़ गई है, और भारत ने अपने प्रतिनिधिमंडल का दौरा फिलहाल टाल दिया है।
आगे क्या हो सकता है?
वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अमेरिकी आयातक टैरिफ की दीवारों से बचने के लिए जल्दबाजी में शिपमेंट मंगाने का प्रयास कर सकते हैं। पहले चुकाए गए टैरिफ की वसूली की कोशिशें कानूनी विवाद उत्पन्न कर सकती हैं। हालांकि, भारत की 8.1 प्रतिशत अनुमानित तिमाही ग्रोथ यह दिखाती है कि मजबूत घरेलू खपत के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को सहने में सक्षम है।

