- एमएलसी चुनाव में भी किनारे किए गए,भारती भी मलते रहे हाथ
- आजम के करीबी सरफराज के बेटे शाहनवाज का विरोध शुरू
मुख्य संवाददाता |
सहारनपुर: पश्चिमी यूपी के कद्दावर मुस्लिम नेताओं में शुमार पूर्व विधायक इमरान मसूद को सपा ने एक बार फिर झटका दिया है। सूबे में उच्च सदन यानि कि विधान परिषद चुनावों को लेकर माना जा रहा था कि सपा मुखिया अखिलेश यादव इमरान मसूद को तरजीह जरूर देंगे। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री और आजम खां के बगलगीर कहे जाने वाले सरफराज खान के बेटे शाहनवाज खान को जरूर सपा ने अपना एमएलसी प्रत्याशी बना दिया है। वहीं, दलित नेता राहुल भारती भी हाथ मलते रह गए हैं। उन्हें दूध में मक्खी की तरह निकाल फेंका गया है। सपा के अन्य कई और वरिष्ठ नेता मायूस हैं। जानकारों का कहना है कि निकट भविष्य में सपा में बगावत भी हो सकती है।
यह बताने की जरूरत नहीं कि एमएलसी चुनाव की सरगर्मियां बढ़ गई हंै। सत्तानशीं भाजपा और उसकी धुर विरोधी समाजवादी पार्टी में तलवारें म्यान से बाहर आ गई हैं। माना जा रहा था कि वेस्ट यूपी को तरजीह मिलेगी और पूर्व विधायक इमरान मसूद को सपा उच्च सदन भेज देगी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। वहीं, दलित नेता राहुल भारती के सपनों पर भी पानी फिर गया है। इन दोनों का नाम सपा की सूची से गायब है। वैसे तो विधानसभा चुनावों के वक्त जब इमरान मसूद अचानक कांग्रेस छोड़ सपा में शामिल हुए थे तो उन्हें अखिलेश यादव ने खास तवज्जो नहीं दी थी।
इमरान मसूद को किसी सीट से टिकट नहीं दिया था और न ही उनके किसी चहेते को। जिलाध्यक्ष पद से जरूर डाक्टर रागिब अंजुम को नवाजा गया था। बहरहाल, सूबे में सपा की सरकार नहीं बन सकी और अब जबकि एमएलसी चुनाव हो रहे हैं तो इमरान मसूद को लेकर एक उम्मीद जरूर उनके समर्थकों में थी कि उन्हें उच्च सदन भेजा जाएगा।लेकिन, अखिलेश यादव ने इमरान का पत्ता साफ कर दिया। दलित नेता और सपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राहुल भारती ने सपने संजोए थे, लेकिन, ऐन वक्त पर राहुल भी किनारे लगा दिए गए। हां, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री सरफराज खान के बेटे शाहनवाज खान का नाम सपा प्रत्याशियों की सूची में जरूर है।
हालांकि, शाहनवाज कोई जनाधार वाले नेता नहीं हैं। न ही उनके पिता सरफराज खान। लेकिन, आजम खां के करीबी होने के नाते इनको तरजीह मिली बताई जाती है। हालांकि, शाहनवाज को प्रत्याशी बनाए जाने का विरोध शुरू हो गया है। चिलकाना समेत कुछ और जगहों पर सपाइयों ने शाहनवाज का विरोध किया है। वहीं सपा के कई पुराने धुरंधर मन ही मन उदास हैं। बता दें कि शाहनवाज खान के पिता सरफराज खान आजम खां के करीबी हैं। सपा शासन में सरफराज खान की खूब चली। आरोप लगा था कि उन्होंने अपनी हनक से अकूत संपत्ति इकट्ठा की।
सपा शासन में जो गुच्छा मार्केट वक्फ की जमीन पर बनी थी, उस पर बुलडोजर आज तक नहीं चल सका। हां, अगर शासन की भृकुटि तिरछी हुई तो सरफराज खान की कुंडली भी खोली जा सकती है। बहरहाल, अब विधान परिषद की 13 सीटों पर चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 9 जून तय पायी गई है। जानकारी के मुताबिक 10 जून को नामांकन पत्रों की जांच और 13 जून तक नाम वापसी हो सकती है। 20 जून को वोटिंग सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगी। इसके बाद 20 जून को ही शाम पांच बजे से मतगणना की जाएगी।

