- जीआईआरएस सर्वे पर आपत्ति के बाद की जाएंगी कार्रवाई
- दो बार हुए सर्वे के बाद समस्या का नहीं हुआ समाधान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम क्षेत्र में जीआईआरएस सर्वे के बाद सुभारती पर जो टैक्स निर्धारित किया गया उसको लेकर बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया। जीआईआरएस सर्वे के बाद दोबारा से जांच टीम ने सर्वे कर टैक्स निर्धारित किया तो भी समस्या का समाधान नहीं हो सका। अब तीसरी बार ड्रोन की निगरानी में नगर निगम एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम सर्वे करेगी।
जिसके बाद सुभारती पर नए टैक्स का निर्धारण किया जायेगा, तब तक निगम अधिकारियों के द्वारा पूर्व में निर्धारित टैक्स के आधार पर टैक्स जमा करने की फिलाहल छूट दी है। सुभारती कॉलेज एवं हॉस्पिटल जिस भूमि पर बना है, उसमें आधे से अधिक भूमि नगर निगम की सीमा क्षेत्र से बाहर बताई जा रही है।
नगर निगम क्षेत्र में जीआईआरएस सर्वे के बाद वर्ष नया टैक्स निर्धारित किया गया। नगर निगम के चुनाव से पूर्व करीब एक वर्ष पहले वार्ड परिसीमन का कार्य भी कराया गया, लेकिन एनएच-58 से सटे क्षेत्र का परिसीमन नहीं किया गया। जिस क्षेत्र में सुभारती कॉलेज/हॉस्पिटल एवं इंटर कॉलेज के साथ जैन शिकंजी समेत कई बडेÞ संस्थान बने हैं। जिनका कार्यक्षेत्र नगर निगम की सीमा क्षेत्र से बाहर हैं,
लेकिन भवन आदि बहुमंजिला बने होने के कारण वह नगर निगम की सीमा क्षेत्र के अंदर दिखाई देते हैं। जिसमें जीआईआरएस सर्वे का कार्य जो कराया गया, उसमें नगरीय सीमा क्षेत्र से बाहर बने भवनों को भी टैक्स निर्धारण में शामिल कर लिया गया। जिसमें सुभारती कॉलेज एवं हॉस्पिटल पर जो सर्वे के बाद टैक्स लगाया गया, उस पर सुभारती की तरफ से आपत्ति दर्ज करा दी गई। आपत्ति के बाद टीम द्वारा दोबारा से सर्वे कराया गया।

जिसके बाद भी आपत्तिकर्ता संतुष्ट नहीं हुए। जिसमें अब तीसरी बार टैक्स निर्धारण के लिए सर्वे का कार्य कराया जायेगा। जोकि यह सर्वे का कार्य इस बार तहसील की राजस्व विभाग की टीम एवं नगर निगम की टीम ड्रोन की निगरानी में कार्य करेगी। साथ ही कितना क्षेत्र पांचली एवं घाट की सीमा क्षेत्र में है और कितना नगर निगम की सीमा क्षेत्र में है। पूर्व में करीब 30 लाख रुपये का जो टैक्स लगाया गया था,
वह जीआईआरएस सर्वे के बाद 70 लाख से अधिक का कर दिया गया था। उसके बाद आपत्ति दर्ज कराई गई तो उसे कम करके 50 से 55 लाख रुपये कर दिया गया, लेकिन उसके बाद भी आपत्तिकर्ता संतुष्ट नहीं हुए और मामला कोर्ट तक पहुंचाने की बात कही तो आलाधिकारियों द्वारा तीसरी बार टीम गठित कर ड्रोन की निगरानी में सर्वे काकार्य कराने का आश्वासन दिया गया। तब तक पूर्व के निर्धारित टैक्स के आधार पर ही टैक्स जमा करने की बात कही गई।
फिलहाल सुभारती पर जीआईआरएस सर्वे के आधार पर जो टैक्स निर्धारण का मामले से हड़कंप मचा है। तीसरी जांच के बाद स्पष्ट होगा कि वास्तविक टैक्स सुभारती पर कितना लगना चाहिए, लेकिन फिलहाल सुभारती पर निगम द्वारा लगाए गए टैक्स के बाद निगम में भूचाल मचा है। जोकि पूर्व में दो बार सर्वे हुआ उस पर दोनों टीमों के द्वारा एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए जा रहे हैं।
मामला संज्ञान में है, जीआईआरएस सर्वे के बाद जो टैक्स लगाया गया उस पर आपत्ति दर्ज की गई है। जिसकी जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। टीम में तहसील से राजस्व विभाग एवं नगर निगम के साथ जीआईआरएस सर्वे की टीम भी शामिल होगी। जांच टीम के बाद ही नए टैक्स का निर्धारण कराया जायेगा, तब तक पुराने टैक्स के आधार पर ही टैक्स जमा करने को कहा गया है। -अवधेश कुमार, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी, नगर निगम

