जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: केस 1 सरसावा विकास खंड के दुमझेरी गांव में मुख्तियार के घर जब नन्हीं परी आई तो खुशियों का ठिकाना न रहा। लेकिनए कुछ ही महीने में मुख्तियारऔर उनकी बेगम मायूस हो गईं। वजह थी कि उन्हें पता चला कि पैदा हुई बेटी के दिल में छेद है। ऐसे में उनका दिल बैठ गया। लेकिनए हौसला नहीं हारा मुख्तियार ने। वह स्थानीय चिकित्सकों के अलावा हरियाणा के पलवल और बराड़ा तक गए। चिकित्सकों ने कहा कुछ समय इंतजार करो। दौड़ भाग करते मुख्तियार को दो साल से ज्यादा हो गए। प्राइवेट चिकित्सक मोटी रकम मांग रहे थे। इस बीच आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ;आरबीएसकेद्ध की टीम ने मुख्तियार की बेटी जवेरिया को चिन्हित कर लिया। जवेरिया को जिला अस्पताल लाया गया। फिर उसका पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आॅफ चाइल्ड हेल्थ ;नोएडा में सफल आपरेश हुआ। बिल्कुल मुफ्त। जवेरिया अब और बच्चों की तरह खुश रहती है। खिलखिलाती है। मां.बाप की खुशियां भी सातवें आसमान पर हैं। वह सरकार की योजना और आरबीएसके की टीम के शुक्रगुजार हैं। मुख्तियार कहते हैं बेटी को जीवनदान मिल गया।
केस.2
सरसावा ब्लाक के ही गांव असदपुर की एक और नन्हीं बेटी जिसका नाम मां.बाप ने परी रखा लेकिनए वह भी जन्मजात दिल की बीमारी से ग्रसित थी। उसके भी दिल में छेद था। पिता अशोक (परिवर्तित नाम) ने शुरू में भागदौड़ की और डाक्टरों से संपर्क किया। लेकिनए जब पता चला कि ऐसे बच्चों का सरकार की योजना आरबीएसके के तहत मुफ्त इलाज होता है। उन्होंने आरबीएसके की टीम से संपर्क साधा। पूरा सहयोग मिला। आखिरकार नन्हीं बच्ची का भी नोएडा के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आॅफ चाइल्ड हेल्थ में आपरेशन हुआ। अब वह पूरी तरह स्वस्थ और प्रसन्न है। मां.बाप की खुशियों का भी ठिकाना न रहा। बेटी की खिलखिलाहट से पूरा परिवार मगन है।
केस-3
दूधगढ़ गांव के जैद को भी दिल की बीमारी थी। उम्र यही कोई 13 साल। आखिरकार आरबीएसके की टीम यहां पहुंची। जैद का 10 नवम्बर 2022 को नोएडा के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ चाइल्ड हेल्थ;चाइल्ड पीजीआई में सफल आपरेशन हुआ। जैद भी अब ठीक है। मां.बाप को एक पाई भी खर्च नहीं करनी पड़ी वरना निजी चिकित्सालयों में तो लाखों रुपये खर्च करने पड़ते।
जनपद में ऐसे कई और नौनिहाल हैं जिनकी जिंदगी में आरबीएसके की टीम ने बहार ला दी है। दरअसल यह सब संभव हुआ है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत। इसका उद्देश्य शिशु मृत्युदर को कम करना है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम सन 2013 में शुरू किया गया था।
यह है आरबीएसके की टीम-.डा.प्रदीप, डाक्टर अब्दुल माजिद, डाक्टर मोनिका पंवार और डाक्टर नेहा तथा अन्य सदस्य।
इन्होंने कहा…
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवा उन बच्चों को प्रदान की जाती हैए जिन्हें 4 डी के रूप में वगीर्कृत शर्तों के साथ पहचाना जाता है। सहारनपुर में योजना का पूरी तरह क्रियान्वयन हो रहा है। अब तक कई नौनिहालों को जीवनदान मिल चुका है। इसमें पूरी टीम और आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं का सहयोग रहता है।
.डाक्टर मोनिका पंवार, प्रोग्राम मैनेजर आरबीएसके

