- गन्ना फसल पर एफआरपी 15 रुपये बढ़ाए जाने का मामला
जनवाणी संवाददाता |
शामली: भारत सरकार ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्यों में 15 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि करते हुए 10़ 25 प्रतिशत रिकवरी पर 305 रुपये कुंतल निर्धारित किया है। दूसरी ओर, कृषि विशेष प्रोफेसर सुधीर पंवार का दावा है कि गन्ना फसल पर आने वाली लागत के मूल्यों के आंकड़ों में हेराफेरी कर एफआरपी बढ़ाई जाती है।
समाजवादी पार्टी के नेता एवं कृषि विशेषज्ञ प्रोफेसर सुधीर पंवार कहते हैं कि उप्र सरकार को भी मोदी सरकार द्वारा की गई 15 रुपये कुंतल की वृद्धि का लाभ किसानों को देना चाहिए। उप्र में राज्य परामर्शित मूल्य (एसएसपी) व्यवस्था लागू है, जिसमें मूल्य निर्धारण का प्रमुख आधार लागत मूल्य है, पिछले वर्ष किसानों द्वारा मूल्य निर्धारण समिति के समक्ष 348 रुपये कुंतल लागत के आंकड़े रखे थे, लेकिन उप्र सरकार ने मूल्य निर्धारण में किसानों के लागत खर्च की अनदेखी की थी। केन्द्र सरकार की रिपोर्ट में गन्ना उत्पादन लागत 162 रुपये प्रति कुन्तल पर टिप्पणी करते सपा नेता एवं कृषि विशेषज्ञ प्रोफेसर सुधीर पंवार कहते हैं कि किसानों को गन्ने की फसल पर 88 प्रतिशत लाभ का दावा करने के लिए लागत मूल्यों के आंकड़ों को कम दिखाया जाता है।
उप्र में अब गन्ने का मूल्य लागत मूल्यों,गन्ने से बनने वाली वस्तुओं से होने वाले लाभ, केन्द्र सरकार द्वारा घोषित एफआरपी या किसानों की मांग से तय नहीं होते बल्कि चुनावी लाभ से तय होते हैं।

