Saturday, March 28, 2026
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Punjab News: सुखबीर सिंह बादल को फिर से ‘तनखैया’ घोषित किया, तख्त श्री पटना साहिब ने सुनाया फैसला

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को एक बार फिर सिख मर्यादाओं के उल्लंघन के आरोप में तनखैया घोषित किया गया है। यह फैसला तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में शनिवार को बुलाई गई एक विशेष सभा के दौरान लिया गया, जिसमें पंज प्यारे सिंह साहिबान ने बादल के विरुद्ध कार्रवाई की घोषणा की।

यह कदम 21 मई 2025 को जारी उन विवादित आदेशों के चलते उठाया गया है, जिनमें भाई कुलदीप सिंह गढ़गज और भाई टेक सिंह द्वारा तख्त की मर्यादाओं और संविधान को दरकिनार करते हुए राजनीतिक रूप से प्रेरित निर्णय लिए गए थे। पंज प्यारों की जांच में यह सामने आया कि इस पूरे घटनाक्रम में सुखबीर सिंह बादल की भी अहम भूमिका थी।

तीन बार दिया गया मौका, फिर भी नहीं हुए पेश

तख्त श्री पटना साहिब के पंज प्यारों ने सुखबीर बादल को 21 मई और 1 जून 2025 को अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया था, लेकिन वे दोनों अवसरों पर पेश नहीं हुए। इसके बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी के अनुरोध पर उन्हें अतिरिक्त 20 दिन का समय दिया गया, बावजूद इसके वे तीसरे अवसर पर भी उपस्थित नहीं हुए।

पंज प्यारों ने स्पष्ट किया कि सुखबीर सिंह बादल का यह रवैया अकाल तख्त की मर्यादा, सिद्धांतों और सिख परंपराओं का उल्लंघन है। इसी आधार पर उन्हें तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब से तनखैया घोषित किया गया है और आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।

पहले भी जत्थेदारों पर गिरी थी गाज

इससे पहले तख्त श्री पटना साहिब के पंज प्यारे, तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज और तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार टेक सिंह धनौला को भी तनखैया घोषित कर चुके हैं। सिख धार्मिक जगत में इसे एक गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जाता है, जो संबंधित व्यक्ति के धार्मिक और सार्वजनिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है।

चलिए जानते हैं कि,तनखैया शब्द क्या है?

बता दें कि, “तनखैया” एक पंजाबी/सिख धार्मिक शब्द है, जिसका अर्थ होता है, ऐसा व्यक्ति जिसने सिख धर्म की मर्यादाओं, सिद्धांतों, या धार्मिक आदेशों का उल्लंघन किया हो, और जिसे सिख पंथ (खासकर अकाल तख्त या अन्य तख्तों) द्वारा दोषी घोषित किया गया हो।

आइए अब विस्तार से समझें..

धार्मिक संदर्भ
सिख धर्म में पांच प्रमुख तख्त (धार्मिक सिंहासन) हैं, जैसे:

अकाल तख्त साहिब (अमृतसर)

तख्त श्री पटना साहिब (बिहार)

तख्त श्री दमदमा साहिब (बठिंडा) आदि।

जब कोई सिख प्रतिष्ठित व्यक्ति, नेता या आम व्यक्ति, इन तख्तों द्वारा निर्धारित सिख रीति-रिवाज, मर्यादा या आदेशों का उल्लंघन करता है — तो उसे तनखैया घोषित किया जाता है।

क्या होता है तनखैया घोषित होने पर?

उस व्यक्ति को पंथक रूप में दोषी माना जाता है। उसे तख्त पर हाज़िर होकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। अगर वो तख्त के समक्ष पेश नहीं होता या क्षमा नहीं मांगता, तो उसे सिख संगत (समाज) में धार्मिक रूप से अयोग्य माना जा सकता है। कई बार यह आदेश सामाजिक बहिष्कार या धार्मिक गतिविधियों से वंचित करने जैसा होता है, जब तक वह माफी मांगकर “तंकहा” (प्रायश्चित) न कर ले।

“तंकहा” क्या होता है?

“तंकहा” एक तरह की धार्मिक सज़ा या प्रायश्चित होती है जो तनखैया व्यक्ति को दी जाती है — जैसे सेवा (जैसे गुरुद्वारे में झाड़ू लगाना), समाज के सामने माफ़ी मांगना,एक निश्चित समय तक बाणी पाठ या अरदास करना।

जैसे: अगर कोई सिख नेता धार्मिक निर्णयों को राजनीतिक रूप से प्रभावित करता है, और बार-बार तख्त के बुलावे के बावजूद उपस्थित नहीं होता — तो वह तनखैया घोषित हो सकता है।

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