Saturday, May 2, 2026
- Advertisement -

सुनीता वर्मा ने दाखिल किया नामांकन

  • शहर विधायक रफीक अंसारी और कांग्रेस जिलाध्यक्ष अवनीश काजला भी रहे मौजूद

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के टिकट को लेकर पिछले कई दिनों से समाजवादी पार्टी में चल रही रही रस्साकशी आखिरकार पूर्व मेयर सुनीता वर्मा पर आकर खत्म हो गई है। आखिरी दौर में बाजी मारते हुए आखिरी चरण में अंतिम दिन सुनीता वर्मा ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के समय जिलाधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा खुद मौजूद रहे। पूर्व महापौर सुनीता वर्मा ने अपने पति पूर्व विधायक योगेश वर्मा, शहर विधायक हाजी रफीक अंसारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य नवाजिश शाहिद तथा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अवनीश काजला के साथ नामांकन पत्र दो सैट के रूप में दाखिल किया।

समाजवादी पार्टी में मेरठ-हापुड़ सीट को लेकर काफी रस्साकशी रही। ईवीएम को लेकर संघर्ष करने वाले सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट भानु प्रताप सिंह को सबसे पहले टिकट दिया गया। उसके बाद भानु प्रताप का टिकट काटकर सरधना विधायक अतुल प्रधान को टिकट दिया गया। अतुल प्रधान ने बीते बुधवार को नामांकन भी दाखिल कर दिया था, लेकिन फिर नाटकीय घटनाक्रम में पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी सुनीता वर्मा को टिकट देकर मेरठ भेजा गया है। अखिलेश यादव ने अपने चार्टर प्लेन से योगेश वर्मा व सुनीता वर्मा को टिकट व सिंबल लेकर गुरुवार सुबह लखनऊ से मेरठ भेजा।

हिंडन एयर बेस पर प्लेन से उतरने के बाद सड़क मार्ग से मेरठ पहुंचे तथा सबसे पहले सीधे कलक्ट्रेट ही पहुंचे क्योंकि गुरुवार को नामांकन का अंतिम दिन था तथा तीन बजे से पहले पहले जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पहुंचना अनिवार्य था। दलित प्लस मुस्लिम वोटर साधने के लिए समाजवादी पार्टी की यह कोशिश कितनी सफल होगी यह तो आने वाले समय में पता चलेगा,

01 2

लेकिन चुनाव अब रोमांचक दौर में पहुंच गया है। नामांकन जमा करने के बाद पूर्व महापौर सुनीता वर्मा व अन्यों ने बाबा आंबेडकर तथा अन्य महानुभावों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। इस दौरान जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी, पवन वर्मा, मौ. चांद, महमूद इकबाल कस्सार, अफजाल सैफी, शमशुद्दीन कुरैशी, शरीफ मेवाती, अहतशाम इलाही आदि मौजूद रहे।

गठबंधन के नेता भी रहे साथ

राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी माने जाने वाले हस्तिनापुर के पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने सभी असंतुष्टों को एकजुट कर लिया थ। तभी तो नामांकन के समय शहर विधायक हाजी रफीक अंसारी जहां मौजूद रहे। वहीं, किठौर विधायक शाहिद मंजूर के पुत्र नवाजिश शाहिद भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे।

जिलाधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी के न्यायालय कक्ष में प्रत्याशी समेत सिर्फ पांच लोगों को भीतर जाने की अनुमति दी। इस पर योगेश वर्मा ने अपने भाई पवन वर्मा की जगह कांग्रेस जिलाध्यक्ष अवनीश काजला को लिया तथा सुनीता वर्मा के साथ यही पांच लोग भीतर गये। अंदर अन्य प्रत्याशी के नामांकन भरे जाने की वजह से सुनीता वर्मा को पौन घंटे प्रतीक्षा करनी पड़ी।

…जब धनबल और भ्रष्टाचार का नहीं था बोलबाला

वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर जोशी का कहना है कि आज राजनीति में शुचिता की कमी आ गई है। पहले के दौर में भ्रष्टाचार और धनबल का इतना बोलबाला नहीं था। प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक का सफर तय करने वाले वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर जोशी के मुताबिक राजनीतिक सुचिता का दौर अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल तक देखने को मिला है। देश ने 1977 की इमरजेंसी के रूप में तानाशाही देखी है।

मंडल-कमंडल के नाम पर धर्म और जातियों में बंटते हुए समाज को देखा है। आज भाइचारे की राजनीति हाशिये पर चली गई है। वोट देते समय मतदाता और टिकट लेकर आने वाले प्रत्याशियों की ओर से वोट मांगते समय धर्म और जाति को प्रमुखता दी जाने लगी है। हरिशंकर जोशी के अनुसार उन्होंने गांव से लेकर शहर तक राम-राम के अभिवादन की संस्कृति को जय श्रीराम तक के अभिवादन की संस्कृति में बदलते हुए नजदीक से देखा है।

पहले समय में प्रिंट मीडिया के माध्यम से खबरें पहुंच करती थी, जिनकी एक विश्वसनीयता लोगों के बीच होती थी। आहिस्ता-आहिस्ता प्रिंट मीडिया के साथ डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बदलते दौर में कई प्रकार के उतार-चढ़ाव और स्तर देखने को मिलते चले गए। मार्केटिंग की तर्ज पर खबरों का भी वर्गीकरण होता चला गया। जिसका लाभ कारपोरेट जगत के साथ-साथ राजनीति ने भी खूब उठाया है।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

बच्चों में जिम्मेदारी और उनकी दिनचर्या

डॉ विजय गर्ग विकर्षणों और अवसरों से भरी तेजी से...

झूठ का दोहराव सच का आगाज

जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सारा बारबर द्वारा किए...

लोकतंत्र का आईना या मीडिया का मुखौटा

जब आंकड़ों की चकाचौंध सच का मुखौटा पहनने लगे,...

वेतन के लिए ही नहीं लड़ता मजदूर

मजदूर दिवस पर श्रमिक आंदोलनों की चर्चा अक्सर फैक्टरी...
spot_imgspot_img