जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर Supreme Court of India ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि समय कम है और कार्य व्यापक है, इसलिए न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है। अदालत ने Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश को अतिरिक्त सिविल जज तैनात करने की अनुमति दे दी है।
अतिरिक्त जज तैनात करने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तीन वर्ष से अधिक अनुभव वाले सिविल जज (सीनियर या जूनियर डिवीजन) को SIR प्रक्रिया में लगाया जा सकता है। यदि इसके बाद भी मानव संसाधन की कमी रहे तो Jharkhand High Court और Orissa High Court से सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद ली जा सकती है। दोनों हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से ऐसे अनुरोधों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा गया है।
294 जज पहले से तैनात, फिर भी कमी
सुनवाई के दौरान बताया गया कि अब तक 294 जिला एवं अतिरिक्त जिला जज SIR के अंतिम चरण में लगाए जा चुके हैं। हालांकि, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि यदि एक जज प्रतिदिन 250 मामलों की सुनवाई भी करे तो पूरी प्रक्रिया में लगभग 80 दिन लग सकते हैं, जबकि अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होनी है। इसलिए समय की कमी को देखते हुए अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की आवश्यकता बताई गई।
50 लाख से अधिक मामलों में विसंगतियां
अदालत ने कहा कि यह आपात सुनवाई इसलिए की गई क्योंकि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पत्र लिखकर प्रक्रिया की विशालता और जटिलता की जानकारी दी थी। बताया गया कि 50 लाख से अधिक मामलों में तार्किक विसंगतियां और अनमैप्ड प्रविष्टियां पाई गई हैं। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में दावों और आपत्तियों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
28 फरवरी 2026 को अंतिम सूची
सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission of India को 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी है। साथ ही कहा है कि नामांकन की अंतिम तिथि तक पूरक सूची जारी की जा सकती है।
संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत ने स्पष्ट किया कि पूरक सूची में शामिल मतदाताओं को भी अंतिम सूची का हिस्सा माना जाएगा। सत्यापन के दौरान आधार कार्ड, कक्षा 10 की प्रवेश पत्र और पास प्रमाण पत्र को वैध दस्तावेज माना जाएगा। ईआरओ और एईआरओ को न्यायिक अधिकारियों के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया गया है।
भरोसे के संकट पर टिप्पणी
अदालत ने पिछली सुनवाई में राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच भरोसे की कमी पर भी टिप्पणी की थी। इसी कारण न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों की चिंताओं को संतुलित करते हुए चुनाव की शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

