जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को वर्ष 2017 में हुई पत्रकार गौरी लंकेश हत्या मामले में एक आरोपी के खिलाफ कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (ककोका) के तहत आरोपों को रद्द करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया है।
जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने लंकेश की बहन कविता लंकेश द्वारा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर मोहन नायक पर लगे आरोपों को बहाल कर दिया है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल, 2021 को 2018 में पारित बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त के आदेश और उसके बाद दायर पूरक आरोपपत्र को रद्द कर दिया था।
इसके तहत नायक के खिलाफ ककोका की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध हटा दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार से कार्यकर्ता बनी गौरी लंकेश की 2017 की हत्या के मामले में एक आरोपी के खिलाफ KCOCA (कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के आरोपों को हटाने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के दायर अपील में आरोप लगाया गया कि नायक अपराध करने से पहले और बाद में लंकेश के हत्यारों को आश्रय प्रदान करने में सक्रिय रूप से शामिल था।
याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने ककोका की धारा-24 की जांच न करके गलती की है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी विशेष अदालत, अधिनियम के तहत किसी भी अपराध पर संज्ञान पुलिस अधिकारी( अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक या उससे ऊपर के रैंक वाले अधिकारी) की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं लेगी।

