Wednesday, March 25, 2026
- Advertisement -

अजीबो-गरीब हालात: पैसों पर सिस्टम का पहरा

  • प्रशासन की नासमझी से हर मोर्चे पर आ रही मुश्किल
  • बैंकों के बार-बार बंद होने से व्यवस्था बिगड़ी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: इसे अधिकारियों की अदूरदर्शिता ही कहेंगे पहले लोगोंं को आॅक्सीजन व जीवनरक्षक इंजेक्शन न मिलने से जान गवानी पड़ी और अब रही सही कसर अधिकारियों ने बैंकों के सप्ताह में चार दिन के आदेश करके अपने ही पैसे निकलने पर पहरा लगा दिया। इस गैर जरूरी आदेश का सबसे ज्यादा फर्क उन लोगों पर पड़ रहा है।

जिनके घर के लोग अस्पतालों में भर्ती है और उनसे महंगे इंजेक्शन और दवाओं को लाने को कहा जा रहा है। बैंक बंद और एटीएम सूखे होने के कारण तीमारदारों के पास सिर्फ हाथ मलने के कुछ नहीं बच रहा। इसे प्रशासन की नासमझी ही कही जाएगी कि कोरोना ने जितने लोगों की जान ली है। उससे परिवार को व्यक्तिगत नुकसान हुआ, लेकिन जिस तरह से बैंकों को बंद किया जा रहा है उसने न केवल आम लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला है। वहीं, व्यापार जगत को बर्बाद कर दिया है।

कोरोना ने सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अब तक 592 लोगों की मौत हो गई। हर कोई दहशत में है। अब प्रशासन ने बैंकों को सप्ताह में शनिवार और सोमवार को बंद करके सारे सिस्टम को पंगु बनाकर रख दिया है। एक तो बैंकों के बंद होंने शहर के एटीएम सूखे पड़े हुए हैं।

जिन जगहों पर एटीएम चल भी रहे हैं। उनसे एक लिमिट से ज्यादा पैसे नहीं निकाल सकते हैं। आम जनजीवन पूरी तरह से बबार्दी की कगार पर पहुंच गया है। दूसरे शहरों के लोग यह मानने को तैयार नहीं है कि मेरठ में बैंक बंद होने के कारण व्यापारी लेन-देन नहीं कर पा रहा है।

कोरोना के कारण बर्बाद हो रही अर्थव्यस्था को बैंकों की बंदी के आदेश ने और हवा दे दी है। बैंकों के बंद होने से सबसे ज्यादा फर्क पेट्रोल पम्पों पर पड़ा है। बिना आरटीजीएस के तेल कम्पनियां तेल देने को तैयार नहीं होती है। इससे तमाम पेट्रोल पंप परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

बैंकों की बंदी का बुरा असर मेडिकल स्टोरों पर पड़ रहा है। कोरोना काल में जहां लोग दवाओं के लिए भटक रहे हैं। ऐसे में बैंकिंग सुविधा बंद होने से दवा व्यापारी जीवन रक्षक दवाइयों के लिए स्टॉकिस्टों को आर्डर तक नहीं कर पा रहे है। यही कारण है कि बाजार से दवाएं गायब हो रही है।

सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है, लेकिन हकीकत सबको पता है कि कितने फीसदी लोग डिजिटल बैंकिंग का प्रयोग करते हैं। आॅनलाइन बैंकिंग हमेशा सर्वर डाउन होने से बाधित रहती है और लोगों को बैंकों के भरोसे ही रहना पड़ता है। इस वक़्त बैंकों की जरूरत इसलिए भी ज्यादा है कि निजी अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों के बेहिसाब बिलों को भुगतान करने के लिए वक़्त बेवक्त पैसों की जरूरत पड़ती है जो बैंकों के बंद होने के कारण लोगों को परेशानी में डाल रही है।

कोरोना के कुछ इंजेक्शन इतने महंगे है कि आम इंसान को बैंकों की तरफ भागना पड़ रहा है। बैंकों की छुट्टी इस कदर बढ़ गई है कि लोग बस सिस्टम को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। शुक्रवार को शहर के 80 फीसदी एटीएम में पैसा नहीं था। ईद के कारण बैंक बंद थे और अब सोमवार तक बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में कहां व्यापार हो पायेगा और कहां आम आदमी अपनी जरूरतें पूरी कर पाएगा।

सूखने लगे पेट्रोल पम्प के गले

हालात चौतरफा खराब ये किसी से छुपी नहीं। जो खैरनगर दवाओं के लिहाज से सबसे बड़ी उम्मीद का केंंद्र बन गया है, वहां दुकानदारों की पीड़ा देखिए। जब समय से पैसा ट्रांसफर नहीं होगा, अगला स्टाक कैसे मुहैया होगा। पेट्रोल पम्प के गले सूखने लगे हैं। कैश की किल्लत, बैंकों के रास्ते बंद। एटीएम रामभरोसे।

किसी को एंम्बुलेंस के जरिए मरीज ले जाना है, दवा लेनी है। बाकी जरूरतें हैं लेकिन हर तरफ बैरियर ही बैरियर। ठीक है लॉक डाउन वक्त की मांग, सतर्कता लाजिमी, लेकिन जब कोरोना मौत का तांडव कर रहा हो तो फिर बैंकों को लेकर प्रशासन क्यूं नहीं पहल कर रहा। क्यंू एटीएम की मॉनिटरिंग की जा रही। पब्लिक की सांसें कोरोना लील रहा तो बदतर व्यवस्था भी दम घोंट रही पब्लिक का।

बैंकों में अवकाश की झड़ी तीमारदार परेशान

प्राइवेट अस्पतालों में बिना पैसे जमा किए मरीजों को भर्ती करने से भी मना किया जा रहा है। जब मरीज भर्ती हो जाता है, उसके पश्चात दवाओं के प्रबंध करने में भी तीमारदार को पैसे की जरूरत पड़ती है। जैसे- तैसे इधर उधर से पैसे का इंतजाम भी हो जाएं, मगर पैसे को निकालने में तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर में बैंकों भी काफी बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी संक्रमित पाएं जा रहे हैं।

इसी वजह से बैंकों में अब अवकाशों की झड़ी देखने को मिल रही है। जिससे तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, संक्रमण की स्थिति को देखते हुए पहले से ही बैंकों में दो बजे तक कार्य किया जा रहा है। जिससे बैंकों के बाहर हर रोज बड़ी मात्रा में खाताधारकों की भीड़ देखने को मिल रही है। ऐसे में बैंकों में अवकाश से परेशानी और डबल होती जा रही है। क्योंकि जिन खाताधारकों को पहले समय अवधि ज्यादा होने के कारण कैश नहीं मिल पाया था। वह अगले दिन निकासी की सोचते है, लेकिन जब बैंक बंद मिलते है तो उनमें निराशा देखने को मिलती है।

आरटीजीएस के बिना नहीं हो रहे आर्डर पूरे

05 14

मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल का कहना है कि आये दिन बैंक बंद होने से दवा व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है। आरटीजीएस के बिना आर्डर नहीं पूरे हो रहे हैं। दवाओं का संकट भी इसी कारण से दिख रहा है। एक निजी अस्पताल में भर्ती कोरोना के मरीज को डॉक्टर ने आॅकट्रोमा इंजेक्शन लिख दिया। इस इंजेक्शन की कीमत 35 हजार रुपये है। परेशान तीमारदार बैंक बंद होने के कारण एटीएम पहुंचा, लेकिन वो सिर्फ 25 हजार रुपये की व्यवस्था कर पाया। अगर बैंक खुला होता तो शायद वो समय पर अपने मरीज को इंजेक्शन दिलवाकर जान बचवा लेता। यह सिर्फ एक उदाहरण है ऐसे हजारों मामले तुगलकी आदेश के शिकार हो गए है। सही मायनों में कोरोना मरीजों के तीमारदारों को इस आदेश ने हिलाकर रख दिया है।

ट्रांसजेक्शन में आ रही दिक्कत

06 14

व्यापारी नितिन कुमार का कहना है कि बैंकों के लगातार बंद होने से ट्रांसजेक्शन में दिक्कत आ रही है। ना पैसा जमा कर पा रहे हैं और न ही निकाल पा रहे। उधर, निजी अस्पताल तीमारदारों से ऐनवक्त पर पैसा जमा करने को कहते हैं। ऐसे में तीमारदार बैंक और एटीएम की तरफ भागता है। जहां उसे ऐड़ी चोटी का जोर लगाकर जुगाड़ लगाना पड़ रहा है।

सारी इकोनॉमी बैंकों पर ही निर्भर

07 13

ट्रांसपोर्टर अमित यादव का कहना है सारी इकोनॉमी ही बैंकों पर निर्भर है। टैंकरो को हर जगह भेजना पड़ता है और पार्टियां भुगतान बैंकों के जरिये ही करती है। ऐसे में बैंकों के बंद रहने से कारोबार पर फर्क पड़ रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत लोन की किश्त जमा करने मे आती है।

बैंक बंद होने से मंडी का व्यापार चौपट

08 12

सब्जी मंडी व्यापार संघ के महामंत्री विश्वजीत सोनकर का कहना है एक तो कोरोना के कारण मंडी का व्यापार चौपट हो गया था ऊपर से बैंकों के नाटक ने रही सही कसर पूरी कर दी है। आढ़तियों से लेकर किसानों तक को पेमेंट करना और लेना पड़ता है। प्रशासन को चाहिए सख्त नियम लागू करके बैंकों को खुलवाया जाये।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

क्यों बढ़ रहा है किडनी रोग?

डॉ रूप कुमार बनर्जी, होमियोपैथिक चिकित्सक आधुनिकता और शहरी जीवनशैली...

स्वस्थ तन मन के लिए क्या करें

नीतू गुप्ता मनुष्य जब तक जवान रहता है, वह सोचता...

वो गैस आ नहीं रही, ये गैस जा नहीं रही

गैस से वे पहले ही परेशान थे। चौबीसों घंटे...

लिखा जा रहा नारी शक्ति का नया अध्याय

भारत का लोकतंत्र एक नए मोड़ पर खड़ा है...

पर्यावरण अनुकूल बने ईवी

जलवायु परिवर्तन आज मानव सभ्यता के सामने सबसे बड़ी...
spot_imgspot_img