Saturday, June 19, 2021
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परिवार साथ तो हर मुश्किल आसान

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  • एकजुटता से एक-दूसरे को मिलती है ताकत, कोरोना से जंग जीतकर आए लोगों ने बयां किया दर्द

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: परिवार एक मजबूत ढाल होता है। मगर एक ही परिवार में जब दो से अधिक भाई हो तो रिश्तों में कही न कही कड़वाहट आ जाती है, लेकिन कोरोना काल ने इस परिभाषा को ही बदल दिया है। कोरोना काल में संक्रमण के दौरान जहां परिवारजनों में प्रेम बढ़ा है वहीं एक दूसरे के लिए समर्पण की भावना भी देखने को मिली है। शहर में कई ऐसे परिवार है जहां चार से अधिक लोग एक साथ कोरोना संक्रमित हुए हैं, लेकिन एहतियात के साथ परिवार के लोगों ने एक-दूसरे का ख्याल रखा है और अपनो को संक्रमण की चपेट में आने के बाद भी देखभाल कर बाहर ले आए। ऐसे ही कुछ परिवारों से जनवाणी टीम ने जब वार्ता की तो उन्होंने अपने दर्द को कुछ इस प्रकार बयां किया।

परिवार की एकजुटता दु:ख-सुख लेती है बांट

बुढ़ाना गेट निवासी रेशू अग्रवाल के यहां कोरोना की दूसरी लहर परेशानी का सबब बनकर आई। इस दौरान जहां रेशू कोरोना संक्रमित हो हालत बिगड़ने पर अस्पताल में पहुंच गई थी वहीं दूसरी ओर उनकी सास भी संक्रमित हो गई। ऐसे में उनके ससुर जितेंद्र कुमार अग्रवाल ने एकजुटता और साहस दिखा जहां रेशू के बच्चों का ख्याल रखा वहीं उन्होंने सभी का सुख और दुख भी साझा किया।

रेशू ने बताया कि घर में सभी के संक्रमित होने की वजह से खाने की भी परेशानी हो गई थी, लेकिन शक्ति जी ने हमारी मदद की और उन्होंने हमारे खाने-पीने का पूरा ख्याल रखा। रेशु बताती है कि अस्पताल में रहने के बाद भी मेरी हालत में सुधार नहीं आ रहा था, लेकिन मैने हिम्मत नहीं हारी और आज में कोरोना से जंग जीत घर आ गई।

हिम्मत से लिया काम तो भाग खड़ा हुआ कोरोना

कोरोना वायरस की दूसरी लहर का नाम सुनते ही लोगों की रुह कांप जाती है और कुछ लोगों ने इससे डर के अपने प्राण भी गवा दिए। मगर शास्त्रीनगर निवासी पवन के परिवार ने हिम्मत से काम लिया और 20 दिन तक कोरोना से जंग जीतकर लोगों को नकरात्मकता से दूर रहने का सुझाव दिया।

बता दें कि पवन डीआईओएस कार्यालय में कार्यरत है वह बताते हैं कि जिस समय उन्हें पता चला कि उनके साथ-साथ उनकी पत्नी और दोनों बेटों कोरोना संक्रमित है तो मानों जैसे दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा हो। वहीं टीवी और इंटरनेट आदि पर रोज लोगों के मरने आदि की खबरे आ रही थी जो भयभीत करने का काम कर रही थी, लेकिन मैंने और मेरे परिवार ने एकजुटता परिचय देते हुए हौसला दिखाया और कोरोना से जंग जीत ली। पवन खुद बीपी के मरीज है पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर उनका पूरा ध्यान रखा और होम आइसोलेशन में रहकर पूरा इलाज कराया। डॉक्टरों की सलाह से आज सब सही है।

आपसी तालमेल से जीती जंग

कोरोना से जंग जीतने के बाद मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना मेरठ मंडल के सिटी कोआॅर्डिनेटर डा. मेघराज सिंह एक बार फिर कोरोना लोगों की सेवा करने में लग गए है। मेघराज सिंह एसएस इंटर कॉलेज मवाना में रसायन विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन इस समय वह शासन के कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। मेघराज कोरोना संक्रमित हुए उसके बाद उनकी पत्नी डा. पारुल भी कोरोना संक्रमित हो गए थी, लेकिन दोनों की सूझबूझ ने उनके नौ साल के बेटे को इस संक्रमण से बचा लिया।

वह बताते हैं कि बहुत बुरा दौर है जिससे लोग गुजर रहे हैं, लेकिन अगर परिवार में आपसी तालमेल है तो इस दौर से निकलना आसान हो जाता है। दोनों पति-पत्नी ने संक्रमित होने के बाद एक-दूसरे का ध्यान रखा और डाक्टर की सलाह के बाद होम क्वारंटीन हो गए। 15 दिन इलाज करने के बाद दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आई। पारुल बताती है कि इस दौरान नकरात्मका से दूर रहना चाहिए। क्योंकि भय ही व्यक्ति को मृत्यु की ओर ले जाता है। हम दोनों ने सुबह शाम पॉजिटिव बाते की और ऐसी ही चीजे एक-दूसरे से साझा की तो हम कोरोना से जंग जीत गए।

इन उपायों से जीती जंग

  • अधिक से अधिक पानी का किया सेवन
  • एक-दूसरे का बढ़ाया हौसला।
  • काढ़ा, गर्म पानी और स्ट्रीम लेने के साथ योगा किया।
  • डॉक्टरों से लेते रहे लगातार सलाह।
  • घर का माहौल पूरी तरह सकारात्मक रखा।
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