Saturday, March 7, 2026
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Tag: रविवाणी

भ्रामक और कामुक विज्ञापनों का संजाल!

  बरसों पहले अखबार में छपे एक विज्ञापन को देखकर ये जुमला कहा गया था ‘विज्ञापन कंबल की दर्शनीय टांगें, दुकानदार से जाकर हम क्या...

बेतरतीब संख्याओं का इतिहास, वर्तमान और भविष्य

  दुनिया के बारे में सोचते हुए लगता था कि सब कुछ गणितीय फॉर्मूले में कभी फिट नहीं बैठता है। बिग बैंग के बाद भी...

बढ़ रही हैं ‘डिजिटल रेप’ की घटनाएं

  देशभर में डिजिटल रेप की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली से सटे नोएडा में आए दिन डिजिटल रेप के नए...

सहजता और सरलता के प्रतीक बल्लभ डोभाल

  विश्व प्रसिद्ध कहानीकार मोपासां ने एक बार कहा था-एक सरल जीवन जीने वाली स्त्री की कहानी नहीं होती बल्कि कहानी विरल जीवन जीने वाली...

संसद में कम होती मुस्लिम नुमाइंदगी

  मुसलमान, आबादी के लिहाज से संसद में क्यों नहीं पहुंच पाते ? इसके पीछे एक और बड़ी वजह है। देश में कई विधानसभा, लोकसभा...

असुरक्षित जीवन जीने की मजबूरी

  वर्तमान दौर में भारतीय असुरक्षित जीवन जीने और हादसों के प्रति असंवेदनशील हो गए हैं। तभी तो आए दिन देश के किसी न किसी...
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सिद्धार्थ ताबिश मेरा बड़ा बेटा इस बात को सुनकर बड़ा...

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मध्य पूर्व के सतत झगड़े के वैश्विक निहितार्थ

मध्यपूर्व जिसे भारत के संदर्भ में पश्चिमी एशिया कहा...

नीतीश युग का अवसान

बिहार की राजनीति लंबे समय से व्यक्तित्व-केन्द्रित और गठबंधन-आधारित...