Saturday, April 25, 2026
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बढ़ रही हैं ‘डिजिटल रेप’ की घटनाएं

 

Ravivani 34


shalini koshikदेशभर में डिजिटल रेप की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली से सटे नोएडा में आए दिन डिजिटल रेप के नए नए मामले सामने आ रहे हैं इसके साथ ही लोगों की जिज्ञासा बढ़ती जा रही है रेप के मामलों की इस नई शब्दावली में, हर ओर यह चर्चा है कि आखिर यह डिजिटल रेप होता क्या है? यह भी चर्चा में है कि आॅनलाइन रूप से कैसे रेप हो जाता है? आपको हम बताते हैं डिजिटल रेप के बारे में। नोएडा में हाल ही में डिजिटल रेप का एक मामला सामने आया है वहां पुलिस ने आरोपी को फेज-2 बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार किया। पीड़ित परिवार ने शिकायत की थी कि उनकी 7 वर्षीय बेटी दोपहर में गली में खेल रही थी तभी आरोपी टॉफी का लालच देकर उसे ले गया और पास ही के एक मकान में ले जाकर उसके साथ गलत काम किया। पुलिस ने इसे डिजिटल रेप का मामला बताया तो यह शब्द चर्चाओं में आ गया। शायद आपने इससे पहले कभी डिजिटल रेप के बारे में सुना नहीं होगा? कानून के जानकारों के मुताबिक डिजिटल रेप का मतलब यह नहीं कि किसी लड़की या लड़के का शोषण आॅनलाइन रूप से जाल में फंसाकर किया जाए। यह शब्द दो शब्दों ‘डिजिटल’ और ‘रेप’ से बना है। अंग्रेजी के ‘डिजिट’ का मतलब जहां अंक होता है। वहीं इंग्लिश डिक्शनरी के मुताबिक उंगली, अंगूठा, पैर की उंगली इन शरीर के अंगों को भी ‘डिजिट’ से संबोधित किया जाता है। यानी यह रेप की वो स्थिति है, जिसमें उंगली, अंगूठा या पैर की उंगली का इस्तेमाल किसी पीड़िता के नाजुक अंगों पर किया गया हो। डिजिटल रेप एक ऐसा घिनौना अपराध है, जिसमें बिना इजाजत के इंसान किसी के साथ अपनी उंगलियों या पैर के अंगूठे से पेनिट्रेशन करता हो।

पिछले साल सितंबर के महीने में उत्तर प्रदेश के नोएडा यानी गौतम बुद्ध नगर की जिला अदालत ने 65 साल के अली अकबर को डिजिटल रेप के मामले में दोषी करार दिया था। अली अकबर को उम्र कैद की सजा सुनाने से साथ 50 हजार का जुर्माना भी लगा था। ये भारत का पहला ऐसा डिजिटल रेप का मामला था, जिसमें आरोपी को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। आरोपी ने पड़ोस में रहने वाली बच्ची को टॉफी देकर उसके साथ डिजिटल रेप किया था।

यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए जो कोशिशें हुर्इं, उनमें डिजिटल रेप को अपराध माना गया। इसमें बताया गया है कि हाथ की उंगली या अंगूठे से जबरदस्ती पेनिट्रेशन करना भी यौन अपराध है। इसे सेक्शन 375 और पोक्सो एक्ट की श्रेणी में रखा गया। 2013 से पहले भारत में छेड़खानी या डिजिटल रेप को लेकर कोई ठोस कानून नहीं था लेकिन निर्भया रेप कांड के बाद डिजिटल रेप को भी पोक्सो एक्ट के अंदर शामिल किया गया।

साल 2013 के बाद रेप शब्द को अब केवल सहवास तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि अब एक महिला के मुंह, मूत्रमार्ग, योनि या गुदा में किसी भी हद तक प्रवेश को रेप की श्रेणी में शामिल किया गया है। निर्भया एक्ट का खंड-बी विशेष रूप से कहता है कि किसी भी हद तक प्रवेश, किसी भी वस्तु या शरीर का कोई हिस्सा, जो लिंग नहीं है, वो भी अब रेप की परिभाषा के भीतर है।

पॉक्सो अधिनियम की धारा 3 के तहत ऐसे मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को न्यूनतम 7 वर्ष कारावास और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा दिए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा, पॉक्सो अधिनियम धारा 5 के तहत ‘गंभीर यौन हमले’ के लिए न्यूनतम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की कठोर सजा का प्रावधान है, जिसमें एक बच्चे पर या 12 साल से कम उम्र के बच्चे पर हमले के बार-बार या कई कृत्य शामिल हैं। पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 के तहत एक बच्चे के निजी अंगों को छूने के कार्य को यौन हमले का अपराध माना जाता है, जिसमें न्यूनतम 3 साल की सजा का प्रावधान है।
अब एक जुलाई 2024 को भारतीय दंड संहिता 1860 का नवीन रूप भारतीय न्याय संहिता 2023 के रूप में लागू होने जा रहा है जिसमें धारा 375 को धारा 63 में पूर्ण रूप से समाहित कर दिया गया है।


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