Thursday, March 26, 2026
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Tag: Tenacity of speech is possible with self-contemplation and worship: Swami Abhayanand Saraswati

आत्मचिंतन और पूजा से वाणी का तप संभव: स्वामी अभयानंद सरस्वती

तपबल रचइ प्रपंच बिधाता। तपबल बिष्नु सकल जग त्राता।। तपबल संभु करहिं संघारा। तपबल सेषु धरइ महिभारा।। तप अधार सब सृष्टि भवानी। करहि जाइ तपु अस...
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