Thursday, January 22, 2026
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National Anthem Row: तमिलनाडु में राज्यपाल–सरकार टकराव फिर उजागर, भाषण दिए बिना सदन से लौटे गवर्नर आर एन रवि

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: तमिलनाडु में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच जारी टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया। राज्यपाल आर. एन. रवि मंगलवार को विधानसभा के पहले सत्र में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही सदन से बाहर चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में कई तथ्यात्मक गलतियां थीं। राज्यपाल के इस कदम से विधानसभा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई और सत्ताधारी दल ने इसे संवैधानिक परंपराओं का उल्लंघन करार दिया।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने की कड़ी आलोचना

राज्यपाल के सदन छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने उनके रवैये की तीखी आलोचना की। स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल ने नियमों और परंपराओं को तोड़ा है और उनका यह आचरण उस उच्च संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ है। मुख्यमंत्री ने इसे विधानसभा और तमिलनाडु की जनता का अपमान बताया।

सदन में प्रस्ताव पारित

मुख्यमंत्री स्टालिन ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि राज्यपाल द्वारा भाषण न पढ़ना स्वीकार्य नहीं है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि केवल वही भाषण रिकॉर्ड में माना जाएगा, जिसे सरकार ने तैयार किया और जिसे स्पीकर एम. अप्पावु ने तमिल भाषा में पढ़ा।

प्रस्ताव पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने विधायकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्यपाल हर साल सरकार द्वारा तैयार भाषण पढ़ने से इनकार करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति सिर्फ तमिलनाडु में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रही है।

संविधान में बदलाव की तैयारी

मुख्यमंत्री स्टालिन ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी संविधान में संशोधन के लिए प्रयास करेगी। उनका कहना है कि साल की शुरुआत में राज्यपाल के भाषण को अनिवार्य बनाने वाले नियम को हटाने की जरूरत है। इसके लिए डीएमके संसद में अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन लेने की कोशिश करेगी।

अनुच्छेद 176 का हवाला

स्टालिन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत राज्यपाल का अभिभाषण सरकार द्वारा तैयार किया जाता है और राज्यपाल को इसे पूरा पढ़ना अनिवार्य है। उन्हें इसमें अपनी मर्जी से बदलाव करने या भाषण छोड़ने का अधिकार नहीं है।

मुख्यमंत्री ने डीएमके संस्थापक सी. एन. अन्नादुरई का हवाला देते हुए कहा, “जिस तरह बकरी को दाढ़ी की जरूरत नहीं होती, उसी तरह राज्य को राज्यपाल की जरूरत नहीं होती।”

सदन में नारेबाजी

राज्यपाल के सदन से बाहर जाते समय सत्ताधारी डीएमके और सहयोगी दलों के विधायकों ने जोरदार नारेबाजी की, जिससे सदन का माहौल और गर्म हो गया।

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