Saturday, March 28, 2026
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सिंघु बॉर्डर पर भी आंसुओं का जवाब देने की गूंज

  • आंदोलनकारी बोले, राकेश टिकैत की आंखों से निकले आंसू थे किसान की पीड़ा

मुख्य संवादाता |

बागपत: तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों के बीच राकेश टिकैत के आंसू जनाक्रोश का सैलाब बन गए हैं। सिंघु बॉर्डर पर भी वक्ता जहां बिल वापसी तो घर वापसी कह बात को कहते हैं वहीं यह भी कह रहे हैं कि राकेश टिकैत की आंखों से निकला आंसू किसान का आंसू था। किसान की पीड़ा का आंसू था, जिसका जवाब सरकार को देना पड़ेगा। किसान अत्याचार सहन नहीं करेगा। सरकार भले ही फांसी पर लटका दे, लेकिन अपना हक लेकर रहेगा।

सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन को लेकर दो मंचों से एक ही गूंज सुनाई दे रही है कि बिल वापसी तो घर वापसी, अन्यथा यहीं डटे रहेंगे। सरकार भले ही कोई साजिश किसानों के खिलाफ रच ले। जनसमूह को संबोधित करते हुए दिनभर वक्ता यही कह रहे थे कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान को फंसाया गया।

आरोप लगाया कि सरकार ने एक गहरी साजिश कर किसान को फंसाने का काम किया है और आंदोलन को कमजोर करने की रणनीति तैयार की थी, लेकिन किसान आंदोलन को कमजोर नहीं होने देंगे। वक्ताओं लघविंद्र, तारा गुप्ता, नीलम, राघु सरपंच पंडोरा आदि वक्ताओं ने कहा कि अपने लोगों के माध्यम से किसान को भिड़ाने की साजिश रची जा रही है।

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भाकियू नेता राकेश टिकैत को उठाने के लिए जिस तरह का व्यवहार किया गया है वह निंदनीय है। राकेश का आंसू किसान का है और किसान अपने एक-एक आंसू का जवाब लेगा। बिल वापसी नहीं होगा तो घर वापसी भी नहीं होगी।

खूब हुई ‘जनवाणी’ की सराहना

सिंघु बॉर्डर पर किसानों के बीच दैनिक जनवाणी की खूब सराहना हुई। किसानों ने कहा कि सच्चाई और किसानों के दर्द की खबर जनवाणी ने बेहतर प्रकाशित की है।

45 हजार किसान डाले हैं डेरा

सोनीपत प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार सिंघु बॉर्डर क्षेत्र में करीब 45 हजार किसान डेरा डाले हुए हैं। हालांकि दिन में किसानों की संख्या अधिक हो जाती है। यह आंकडेÞ कुछ भी हो, लेकिन वहां किसान इससे भी कहीं अधिक डटे हुए हैं। ट्रैक्टर-ट्रालियों में दिनभर आने वाले किसानों की संख्या अपार हो जाती है। कई-कई किलोमीटर लंबी लाइन ट्रैक्टरों की लगी रहती है।

सिंघु बॉर्डर पर महिलाओं की संख्या भी कम नहीं है। दोपहर तक तो महिलाओं की संख्या बेहद बढ़ जाती हैं। दूर-दराज से ट्रैक्टर-ट्रालियों में सवार होकर महिलाएं, बच्चे आंदोलन स्थल पर पहुंच रहे हैं। आंदोलन स्थल की शुरुआत होते ही महिलाएं नारे लगाने शुरू कर देती हैं।

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किसान की एकता को मजबूत करने का परिचय देती नजर आती हैं। महिलाओं के जत्थे और उनके हाथों में झंडे उनके जोश और उत्साह का परिचय देते हैं। महिलाओं ने बातचीत के दौरान बताया कि जब उनसे जमीन ही छिन जाएगी तो वह घर पर रहकर क्या करेंगी, इससे तो अच्छा है कि वह पुरुषों का हौसला बढ़ाएं और आंदोलन में अपनी ताकत का अहसास कराएं।

किसान आंदोलन जहां जन आंदोलन बन चुका है और आम आदमी भी किसान की मांगों का समर्थन कर रहा है वहीं यह सद्भावना की मिसाल भी कायम कर रहा है। यहां मुस्लिम भी कम संख्या में नहीं पहुंच रहे हैं। वह भी काफी संख्या में पंजाब व हरियाणा से यहां पहुंच रहे हैं।

साहब! किसानों को रोकने के लिए ‘चीन की दीवार’ क्यों ?

किसानों को रोकने के लिए एक बार फिर कड़े बंदोबस्त किए जा रहे हैं। छह फरवरी के चक्का जाम का ऐलान होते ही बॉर्डर पर सीमेंट की दीवारें तैयार कर दी गई हैं, नुकीले सरिया लगा दिए गए हैं। लोहे के जाल को लगाया जा रहा है। यही नहीं बैरिकेडिंग भी कई लाइनों की लगाई जा रही है, ताकि किसान दिल्ली की ओर कूच न कर सके।

तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन की राह पकड़ने पर किसान को न जाने कितनी मुश्किलों का सामना दिल्ली की सीमा तक पहुंचने में करना पड़ा। पंजाब से चलकर आए किसानों को तो तमाम बाधाओं को पार करके आना पड़ा। हरियाणा के किसान के सामने भी कम बाधाए नहीं आई।

वह भी मुश्किल सफर तय कर यहां तक पहुंचे। कभी कटीले तारों के बीच से गुजरना पड़ा तो कभी पानी की बौछारों, आंसू गैस के गोलों व पुलिस की लाठियों के बीच से निकलते हुए सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे हैं। गणतंत्र दिवस पर किसानों को फिर बवाल का सामना करना पड़ा। अब छह फरवरी के चक्का जाम का ऐलान करते ही फिर से किसानों को रोकने के लिए कड़े बंदोबस्त करने शुरू कर दिए गए हैं।

सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली की ओर एक मंच सजा हुआ है और कुंडली की ओर दूसरा मंच सजा हुआ है। दोनों के बीच में पुलिस की बैरिकेडिंग भी है। हालांकि दिल्ली की ओर से सीमाएं पूरी तरह से सील भी कर दी गई हैं। मुख्य मंच और दूसरे मंच के बीच में जहां पहले लोहे की बैरिकेडिंग के अलावा सीमेंट की बैरिकेडिंग लगा रखी थी, लेकिन गत रात्रि वहां कंटेनर खड़े कर दिए गए और उनसे सटाकर सीमेंट की दीवार बना दी गई है।

यह सीमेंट की दीवार दो फीट से अधिक चौड़ी है। किसान तो इस पर यह भी तंज कसते हैं कि यह चीन की दीवार उन्हें रोकने के लिए क्यों बना दी, किसान कभी हिंसा नहीं कर सकता और न ही करेगा। यही नहीं सीमेंट की दीवार पर नुकीले सरिया भी लगा दिए गए हैं। उन सरियों को सीमेंट में दबा दिया है, ताकि दीवार के ऊपर से कोई चढ़कर न आ सके। इसके अलावा लोहे के जाल लगाने का कार्य भी चल रहा है।

लोहे के जाल भी रोकने के लिए ही लगाए जा रहे हैं। अब सवाल यह है कि आखिर इतनी किलेबंदी किसान को रोकने के लिए क्यों की जा रही है? क्यों इस पर इतना बजट खर्च किया जा रहा है? बाद में दीवार तोड़ने, जाल हटाने आदि पर भी बजट खर्च होगा।

अब देखा जाए तो यह दीवार एक जगह नहीं बल्कि दोनों तरफ तैयार की गई है। पूरे हाइवे पर यह दीवार तैयार है। अब किसान भी इस दीवार को देखकर हैरान है। आंदोलित किसानों का कहना है कि सरकार उन्हें रोकने के लिए फिजूल के खर्च कर रही है। उनकी बिल वापसी की छोटी सी मांग है, इसे पूरा कर दे तो वह वापस चले जाएंगे।

निहंग व वालंटियर संभाल रहे व्यवस्था

दो मुख्य मंच के आसपास निहंगों व वालंटियरों को सुरक्षा का जिम्मा दिया गया है। एक तरफ दिल्ली पुलिस के जवान और आरएएफ खड़ी है तो दूसरी ओर बैरिकेडिंग पर निहंगों के जत्थे निगहबानी कर रहे हैं। बैरिकेडिंग तक किसी को पहुंचने की इजाजत नहीं दी जाती है। उसके लिए वहां वालंटियरों की ड्यूटी लगाई गई है। ताकि बैरिकेडिंग की ओर कोई न जा सके। घुड़सवारों की भी ड्यूटी लगाई है। तीन-तीन घंटे की ड्यूटी वालंटियरों की लगाई गई है।

इंटरनेट सेवा बाधित होने से आ रही परेशानी

सिंघु बॉर्डर पर इंटरनेट सेवा बाधित होने से भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान आंदोलन को लेकर सरकार ने सिंघु बॉर्डर के आसपास इंटरनेट सेवा बाधित कर रखी है। जिस कारण वहां फोन सेवा भी सुचारू रूप से नहीं चल रही है। किसानों को परिचितों से बात करने में भी परेशानी हो रही है।

सेवा में लगे हुए हैं किसान

सिंघु बॉर्डर पर जहां सद्भाव की तस्वीर नजर आती है वहीं हरियाणा के निवासी पंजाब के किसानों को बड़ा भाई कहकर उनकी सेवा में लगे हुए हैं। पंजाब के किसान सेवा में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लंगरों में जहां सेवा की जा रही है वहीं अस्थाई अस्पतालों में भी सेवा करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

 

गुर्जर समाज गाजीपुर पहुंच करेगा आंदोलन को मजबूत
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नगर के गुर्जर भवन में मंगलवार को गुर्जर महासभा की एक पंचायत आयोजित की गई। पंचायत में वक्ताओं ने निर्णय लिया कि वह गाजीपुर पहुंचकर आंदोलन को पूरी तरह से मजबूत करेंगे और भाकियू नेता राकेश टिकैत के हाथ मजबूत किए जाएंगे। जब तक कृषि कानून को वापस नहीं लिया जाता तब तक वह पीछे नहीं हटने वाले है और आंदोलन को तेजी से चलाया जाएगा। पंचायत में एक दर्जन गांवों से गुर्जर समाज व अन्य जाति के किसानों ने हिस्सा लिया।

पंचायत को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र सरकार ने कृषि कानून लाकर किसानों का उत्पीड़न करने का कार्य किया है, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। यह कानून किसानों को बर्बाद करने वाला है और केन्द्र सरकार को जल्द ही कानून को वापस लेना चाहिए, ताकि किसान आंदोलन समाप्त कर अपने घर आ सकें। यदि कानून को वापस नहीं लिया जाता है तो आंदोलन को तेजी से चलाया जाएगा।

कहा कि वह भाकियू नेता राकेश टिकैत के हाथ मजबूत करने के लिए गाजीपुर बॉर्डर रवाना होंगे। पंचायत में बली, निबाली, बुढेडा, बाघू, निरोजपुर, बिचपडी, बडौली, गोठरा, खैला, गावडी, कैडवा, कमाला, भागौट, अहैडा, पावला, घिटौरा, विनयपुर आदि गांवों के गुर्जर समाज व अन्य जाति के किसानों ने पहुंचे।

इस मौके पर अध्यक्ष करतार पहलवान, देवेन्द्र सिंह, श्योराज सिंह, प्रताप गुर्जर, पूर्व विधायक वीरपाल राठी, लीलू प्रधान, विरेन्द्र बैंसला, संजय प्रधान, हरीश चौधरी, वीरसैन, सतवीर, धर्मदत्त शर्मा, ब्रजपाल, ब्रहमपाल सिंह, योगेन्द्र धामा, ध्यान सिंह, देवेन्द्र प्रधान, रमेश, प्रदीप गुर्जर, संजय प्रधान, श्याम सुंदर भाटी, लीले, विकास राठी, रवि आदि मौजूद रहे।

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