- टूटी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की नींद, एप्रोच रोड का निर्माण कार्य शुरू
- ग्रामीणों ने किया ‘जनवाणी’ का धन्यवाद
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: गंगा की तलहटी में बसे तीन गांवों के आवागमन की समस्या के मामले को ‘दैनिक जनवाणी’ ने 12 व 13 नवंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूट गई, जिसके बाद शुक्रवार को एप्रोच रोड का निमार्ण कार्य शुरू होने पर जहां ग्रामीणों ने ‘जनवाणी’ को धन्यवाद दिया, वहीं ग्रामीणों का कहना है कि ‘जनवाणी’ ने समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद महीनों से धराशाई एप्रोच रोड का कार्य शुरू होने से उनको समस्या से निजात मिलेगी।
मेरठ-बिजनौर, मुरादाबाद जिलों की सीमा से जुड़े सैकड़ों गांव की दूरी कम करने के लिए 2007 में बसपा सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर गंगा पुल का निर्माण शुरू किया था। पुल पर आवागमन शुरू करने के लिए पुल के दोनों ओर लोक निर्माण विभाग द्वारा एप्रोच रोड का निर्माण भी शुरू किया गया। सड़कों में मापदंडों व नियम कायदों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है।

लोक निर्माण विभाग के अधिकारी ने ठेकेदारों से मिलीभगत करके बेतहाशा मुनाफा कमा रहे हैं। सड़क निर्माण में बरती गई घोर लापरवाही और निर्माण के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायत ग्रामीणों ने की थी। सड़क बनाने में घटिया सामग्री का उपयोग हुआ है, जो सड़क की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ है। पांच महीने पूर्व 28 जुलाई को चांदपुर की ओर जाने वाली एप्रोच रोड धराशाई हो गई।
जिसके बाद आवागमन के लिए नावों को संचालन शुरू हुआ, लेकिन गत 18 अक्टूबर को गंगा में हुए नाव हादसे में दो लोगों की जान जाने के बाद नावों का संचालन बंद करा दिया गया। जिससे ग्रामीणों को गंगा के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए जान को जोखिम में डालकर नदी को पार करना पड़ रहा था। लगभग एक सप्ताह पूर्व जनवाणी टीम को इसकी जानकारी मिली
तो मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की समस्या से रूबरू हुई और जनवाणी में 12 नवंबर के अंक में एप्रोच रोड निर्माण के लिए पथरा गई आंखें और 17 नवंबर के अंक में पेट की आग के सामने मौत का डर काफूर नामक शीर्ष को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटने के बाद धराशाई एप्रोच रोड का निर्माण कार्य फिर से शुरू किया गया।

