जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आखिर ‘जनवाणी’की मुहिम रंग लाई। पीएल शर्मा रोड पर आइसोलेंशन (एचपी वर्ल्ड)के मालिक अनुज गोयल के निर्माण को लेकर कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने नगर निगम अफसरों को फटकार लगाई तथा पत्र लिखकर सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिये।
कमिश्नर के कड़े रुख को देखकर नगर निगम के सम्पत्ति अधिकारी राजेश सिंह गुरुवार सुबह पीएल शर्मा रोड स्थित अवैध तरीके से कब्जाई गयी सरकारी जमीन पर बुलडोजर लेकर पहुंचे। कोई विरोध नहीं कर दे, इसको देखते हुए निगम ने फोर्स भी साथ में ली थी। सरकारी जमीन पर लिंटर डालकर किये गए अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण कर दिया। 20 मिनट में निगम के बुलडोजर ने अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया।

निगम की इस कार्रवाई से सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले पीएल शर्मा रोड के व्यापारियों में हड़कंप मच गया।
दरअसल, ‘जनवाणी’ने ‘दुकानों के पीछे सरकारी भूमि ‘मुफ्त’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। करीब 50 फीट से ज्यादा की सरकारी जमीन पर अनुज गोयल ने पिलर्स लगाकर अवैध कब्जा कर लिया था। इस पर लिंटर भी डाल दिया था। गुमराह करने के लिए दीवारों पर पुताई भी कर दी थी।
अवैध निर्माण के मामले में एमडीए के जेई व जोनल ने कोई कार्रवाई नहीं की तथा अवैध निर्माणकर्ता से सेटिंग का खेल कर दिया, लेकिन सरकारी जमीन कब्जाने के मामले को कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने निगम अफसरों को फटकार भी लगाई तथा नगरायुक्त मनीष बंसल को पत्र लिखकर सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के आदेश भी दिये। साथ ही ध्वस्तीकरण करने के बाद इसकी रिपोर्ट भी निगम अफसरों से मांग ली थी।
कमिश्नर के इस कड़े रुख के बाद ही निगम के अफसरों के होश उड़ गए तथा सम्पत्ति अधिकारी राजेश सिंह गुरुवार सुबह दल-बल के साथ पीएल शर्मा रोड पर नाले की तरफ पहुंचे तथा ध्वस्तीकरण अभियान चलाकर सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया।

60 प्रतिष्ठानों पर कब चलेगा बुलडोजर?
नगर निगम सम्पत्ति अधिकारी राजेश सिंह ने बताया कि 60 ऐसे व्यापारी है, जिन्होंने इसी तरह से सरकारी जमीन पर कब्जा कर बिल्डिंग बना रखी है। ऐसे व्यापारियों के खिलाफ थाने में भी तहरीर दे रखी हैं तथा अवैध निर्माण गिराने के लिए प्रक्रिया चल रही है। पीएल शर्मा रोड स्थित आबूनाले पर करीब करोड़ों की सरकारी जमीन को लोगों ने कब्जा कर बिल्डिंग बना रखी हैं, जिसको निगम के अधिकारी नहीं हटा पा रहे हैं। अनुज गोयल पर एक कार्रवाई हैं, लेकिन यहां तो 60 और सरकारी जमीन पर कब्जे हैं।
क्या एमडीए के इंजीनियरों पर होगी कार्रवाई?
कमिश्नर साहब! एमडीए के जेई अवस्थी ने मौका मुआयना किया। नोटिस भी भेजा, लेकिन लिंटर कैसे डलवा दिया? जेई व व्यापारी के बीच सेटिंग का खेल हो चुका था, तभी तो नोटिस का खेल खेला जा रहा था। प्राधिकरण के जेई पर इसमें कार्रवाई क्यों नहीं की गई? सरकारी जमीन जानते हुए भी उस पर दीवार बनवाकर लिंटर डलवा दिया गया। इसमें जेई समेत संबंधित एमडीए के इंजीनियर भी इसके लिए दोषी हैं। उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? एमडीए के इंजीनियर की भी जवाबदेही बनती है। यदि कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले को गंभीरता से नहीं लिया होता तो एमडीए के इंजीनियरों ने तो सरकारी जमीन पर कब्जा करा दिया था।

