- दो माह पूर्व हाईकोर्ट में योजित किया था वाद, 11 अप्रैल को हुई सुनवाई, अब 1 मई को होगी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम के द्वारा पेमेंट नीं होता देख दो ठेकेदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। नगर निगम पर वर्ष-2018 में स्वच्छ भारत मिशन अभियान के अंतर्गत घरो में ठेकेदारों के द्वारा सेफ्टी टैंक के गड्ढे खोदकर उनका निर्माण कराया गया था। जिसमें नगर निगम के द्वारा कुछ ठेकेदारों का पेमेंट कर दिया गया कुछ का पेमेंट जांच के नाम पर अटका दिया गया। जिसमें कुछ ठेकेदारों को किस्तों में पेमेंट किया गया।
जिसके बाद सेफ्टी टैंक निर्माण करने वाले ठेकेदारों ने पिछला पेमेंट नहीं होने के बावजूद आगे टेंडर ले लिये, लेकिन दो-तीन ठेकेदार उनमें ऐसे रहे कि उन्होंने निगम में आगे कोई टेंडर न लेकर अपने बकाया पेमेंट की लड़ाई लड़ना बेहतर समझा। जिसके चलते उन्होंने तमाम आलाधिकारियों को निगम के खिलाफ पत्र लिखे, लेकिन समाधान नहीं हो सका। लगातार करीब चार वर्ष से अधिक अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद वह थक गये और अब उन्होंने ढाई माह पूर्व हाईकोर्ट की शरण ली।
नगर निगम में जहां एक तरफ एक ठेकेदार के द्वारा पेमेंट नहीं करने को लेकर सुसाइड कर लिया गया था। इसमें न जाने कितने ठेकेदार पेमेंट की फाइल को पास कराने के लिये निगम के आये दिन चक्कर कटाते रहते हैं। इनमें कुछ ठेकेदार ऐसे भी हैं, जिन्होंने नगर निगम में वर्ष-2018 में स्वच्छ भारत मिशन अभियान के अंतर्गत घरों में सेफ्टी टैंक के गड्ढे खुदाई कर निर्माण कराया था। जिसमें एक सेफ्टी टैंक के गड्ढे की खुदाई पर निर्माण करीब 10 हजार रुपये का बजट स्वीकृत था। जिसमें करीब 40 ठेकेदारों ने स्वच्छ भारत मिशन अभियान के अंतर्गत सेफ्टी टैंकों के गड्ढों की खुदाई एवं निर्माण कराया।
इन्ही में सरधना निवासी शैलेंद्र ठेकेदार एवं वार्ड-3 भगतवपुरा निवासी वेद के द्वारा भी निगम की तरफ से ठेकेदारी करते हुए सेफ्टी टैंकों का निर्माण कराया गया था। जिसमें वेद द्वारा करीब 70 से अधिक सेफ्टी टेंकों का निर्माण कराया गया। उधर, सरधना निवासी ठेकेदार शैलेंद्र द्वारा 400 से अधिक सेफ्टी टैंकों का निर्माण कराया गया। ठेकेदारों का नगर निगम ने तमाम शिकायतों के बाद किस्तों में पेमेंट करना शुरू किया। ज्यादातर ठेकेदारों का अभी तक पूरा भुगतान नहीं हो सका। जिसमें वेद का भी करीब 60 प्रतिशत से अधिक भुगतान कर दिया गया, लेकिन चार वर्ष बीतने के बाद अब भी भुगतान अधर में लटका हुआ है।

वहीं, सरधना निवासी शैलेंद्र गुप्ता ठेकेदार का अभी तक कोई भुगतान नहीं किया जा सका। जिसके चलते तमाम अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी भुगतान नहीं होने पर ठेकेदार शैलेंद्र गुप्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया। जिसमें ढाई माह पूर्व उन्होंने नगरायुक्त एवं डीएम को यूपी स्टेट की तरफ से पार्टी बनाते हुए हाईकोर्ट में वाद योजित कर दिया। जिसके कुछ दिन बाद वेद ने भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा और वाद योजित कर दिया। दोनों मामले एक जैसे होने पर दोनों के केस में एक ही तिथि पर सुनवाई हुई। जिसमें वेद ने बताया कि 11 अप्रैल को उनके मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जिस पर अब आगामी तिथि 1 मई लगी है। जिसमें हाईकोर्ट से उन्हे पेमेंट के संबंध में न्याय मिलने की उमीद है।
इस संबंध में निगम का पक्ष जानने के लिये नगरायुक्त अमित पाल शर्मा से बात करने के लिये उनके मोबाइल पर संपर्क किया, लेकिन उनके नंबर पर कॉल रिसीव नहीं हो सकी। उसके बाद अपर नगरायुक्त प्रमोद कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला जलकल विभाग से जुड़ा है, उन्हे जानकारी नहीं है। जिसके बाद जलकल विभाग से संपर्क किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
40 से अधिक ठेकेदारों ने वर्ष 2018 में महानगर में शौचालय निर्माण के लिये सेफ्टी टैंक के गड्ढे खोदकर निर्माण कराया था। मेरे द्वारा भी 70 से अधिक सेफ्टी टैंक तैयार कराये गये। कई वर्षों तक पेमेंट अटका रहा। जिसके बाद में कुछ भुगतान किया अब ढाई माह पूर्व मामला हाईकोर्ट में योजित किया है। वहीं, मेरा करीब 30 प्रतिशत से अधिक भुगतान शेष है। सरधना निवासी ठेकेदार शैलेंद्र ने करीब 400 सेफ्टी टैंक तैयार किये थे। एक टैंक पर 10 हजार रुपये का बजट था। करीब 400 लाख रुपये उनका निगम में शेष है, लेकिन भुगतान नहीं हो सका। पहले शैलेंद्र ने हाईकोर्ट में वाद योजित किया। उसके बाद मैंने वाद योजित किया। पिछली सुनवाई 11 अप्रैल थी और आगामी तिथि 1 मई लगी है -ठेकेदार वेद निवासी वार्ड-3 नगर निगम क्षेत्र

