वैसे तो हमारे देश के किसान पारंपरिक खेती कर मुनाफा कमाते है लेकिन कृषि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि किसान अन्य खेती के साथ तिल की खेती भी करें तो निश्चित ही मुनाफा होगा क्योंकि इसकी खेती में न तो ज्यादा लागत आती है और न ज्यादा समय लगता है। उपजाउ जमीन की भी जरूरत नहीं होती है। किसान तिल से तेल निकाल कर बाजार में बेचकर लाखों रुपए का मुनाफा कमा सकते हैं। तिल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग की ओर से किसानों को बीज भी उपलब्ध कराए जाते है।
हमारे देश में एक साल में कुल तीन बार तिल की खेती की जाती है। तिल की फसल 80 से 85 दिनों में तैयार हो जाती है। बाजारों में तिल की डिमांड हमेशा बनी रहती है। तिल का इस्तेमाल सबसे अधिक तेल बनाने में किया जाता है। तिल से तेल के कई प्रोडक्ट बनाए जाते हैं।तिल की खेती आमतौर पर जुलाई के महीने में की जाती है।
खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी अच्छी
तिल की खेती के लिए बहुत उपजाऊ जमीन की जरूरत नहीं पड़ती। इसकी खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। तिल की बुवाई करने से पहले दो से तीन बार निड़ाई-गुड़ाई करके खेत को अच्छी तरीके से तैयार कर लेना चाहिए। खेत की जुताई करने के बाद पाटा चला दें। आखिर जुताई के समय मिट्टी में 80-100 क्विंटल गोबर की सड़ी हुई खाद को मिला दें। इसी के साथ 30 केजी नाइट्रोजन, 15 केजी फास्फोरस और 25 केजी गंधक को प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग कर सकते हैं। तिल की बुवाई से पहले ये ध्यान रखें कि खेतों में नमी जरूर हो। ऐसा नहीं होने पर फसल अच्छी नहीं होगी।
3 से 4 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की जरूरत
तिल की खेती के लिए 3 से 4 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की जरूरत होती है। तिल की बुवाई के लिए अच्छी किस्म की बीज का चयन करना चाहिए। टीकेजी 21 तिल की किस्म 80 से 85 दिनों में पककर कटने के लिए तैयार हो जाती है। किसान भाई इस किस्म की बुवाई करके प्रति हेक्टेयर में 6 से 8 क्विंटल उपज आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। टीकेजी 22 तिल की किस्म 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म से 5 से 6 क्विंटल उपज ले सकते हैं। आरटी 351 तिल की किस्म 78 से 85 दिनों में तैयार हो जाती है। यह किस्म प्रति हेक्टेयर में 5 से 6 क्विंटल आसानी से उपज देती है।
25-35 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा
तिल की खेती के लिए 25-35 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा माना जाता है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर फसल को नुकसान हो सकता है, वहीं यदि तापमान 15 डिग्री से कम चला जाता है तो भी फसल को नुकसान पहुंचता है। खेत में तिल की बुवाई कतारों में करनी चाहए। इससे फसल में निराई-गुड़ाई के लिए आसानी रहेगी। तिल की बुवाई के 15-20 दिनों बाद पहली और 30-35 दिनों बाद दूसरी बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। बेकार पौधों को उखाड़कर फेंक दें। कीड़ों और रोगों से फसल को बचाने के लिए नीम से बने जैविक कीटनाशक का इस्तेमाल करें।
सिंचाई की जरूरत
जुलाई में तिल की बुवाई के लिए सिंचाई की अधिक जरूरत नहीं पड़ती है। बहुत हद तक बारिश के पानी से सिंचाई हो जाती है। कम बारिश होने पर सिंचाई की जरूरत पड़ती है। तिल की फसल जब आधी पककर तैयार हो जाए अंतिम सिंचाई करनी चाहिए।
कब करें कटाई?
तिल की कटाई तब करनी चाहिए जब तिल के पौधों की पत्तियां पीली होकर गिरने लगें। तिल की फसल कटाई जड़ों से ऊपर-ऊपर करनी चाहिए। फसल कटाई के बाद पौधों के बंडल बना लें और एक ढेर बनाकर खेत में ही रख दें। इस तरह से ढेर में ही पौधे सूख जाएंगे। पौधों के सूखने के बाद इन्हें आपस में पीटकर तिल के दानें निकाल लें और बाजार में बेच दें। खुद किसान तिल से तेल निकाल कर बाजार में बेचकर लाखों रुपए का मुनाफा कमा सकते हैं। तिल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग की ओर से किसानों को बीज भी उपलब्ध कराए जाते है।

