- एक दशक से विद्युत शवदाह गृह तथा गैस शवदाह गृह का हुआ विकास
- जनवाणी टीम पहुंची सूरजकुंड श्मशान घाट, की जांच पड़ताल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: श्रीमद् भागवत गीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण कहते हैं कि मृत्यु जीवन का अटल सत्य है, जिसे कोई टाल नहीं सकता, जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। आत्मा अजर और अमर है पर शरीर नश्वर है। सनातन की मान्यताओं के अनुसार हिंदू धर्म में शरीर का अंतिम संस्कार किया जाता है। शरीर अंतिम संस्कार के बाद पांच तत्वों में विलीन हो जाता है, जोकि आत्मा को मुक्त करने और पुनर्जन्म को सम्भव बनाता है।
पिछले एक दशक से विद्युत शव दाह गृह तथा गैस शव दाह गृह का विकास हुआ है। विद्युत शव दाह गृह में आग की तीव्र तरंग विद्युत के माध्यम से उत्पन्न होती है और शव जलकर राख हो जाता है। वहीं एक नाली के माध्यम से राख का उपयोग अस्थि विसर्जन में किया जाता है। इसके विपरीत गैस शव दाह गृह में गैस के माध्यम से दाह संस्कार किया जाता है। रविवार को जनवाणी की टीम जिले के सबसे बड़े श्मशान घाट सूरजकुंड पहुंची जहां शव दाह के लिए 35 चबूतरे सनातनियों के लिए, चार आर्य समाज के लिये तथा एक गैस शव दाह गृह स्थापित है, जोकि अभी कार्य नहीं कर रहा है।
विद्युत बिल न भरने से बंद हुआ इलेक्ट्रिकल शवदाह गृह
सूरजकुंड की बात करें तो बकाया बिल के कारण शव दाह गृह का बिजली का कनेक्शन कट गया था। अब से 10-15 साल पहले विद्युत शव दाह गृह स्थापित किया गया था। जिसमें 290 के आसपास लावारिस लाशों का दाह संस्कार किया गया था। जिसके चलते 80-90 हजार का बिजली का बिल बकाया हो गया था। बिजली का बिल न चुका पाने के कारण विद्युत शव दाह गृह का कनेक्शन बिजली विभाग द्वारा काट दिए जाने पर वह बंद हो गया।
गैस शवदाह गृह पर्यावरण के अनुकूल
ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के स्तर के बढ़ने के कारण पर्यावरण अनुकूल दाह संस्कार की मांग बढ़ गई है। पश्चिम की तरह ही अन्य देशों भारत में भी लोग पर्यावरण अनुकूल दाह संस्कार की तरफ बढ़ रहे हैं। एक आम दाह संस्कार में 3 क्विंटल लकड़ियों का प्रयोग होता है जिसमें 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से लकड़ियां मिलती हैं, जोकि बहुत महंगी पड़ती हैं।

अप्रैल से शुरू होगी गैस की व्यवस्था
सूरजकुंड श्मशान में गैस प्लांट लग चुका है। जिसमें से आर्य समाज और गंगा मोटर कमेटी ने प्लांट लगवाने में योगदान किया है तथा निर्माण कार्य नगर निगम द्वारा कराया गया है। जनरेटर लगने के बाद अप्रैल के महीने से गैस शव दाह गृह के शुरू होने की संभावना है।
जागरूकता की जरूरत
वार्ड-58 के पूर्व पार्षद अंशुल गुप्ता बताते हैं कि इस प्रक्रिया में अस्थियां नहीं मिलती जिस वजह से लोग इलेक्ट्रिकल दाह संस्कार करने में कम विश्वास रखते हैं। इस प्रक्रिया के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है, क्योंकि ये पर्यावरण के अनुकूल है तथा सस्ती है। जहां लकड़ियों से हुआ संस्कार 5000 रुपये का पड़ता है।
लगेगा लोहे का गेट
विनीत गर्ग बताते हैं कि कमेटी वालों ने निर्णय लिया है कि यहां जल्द ही लोहे का एक गेट लगाया जाएगा और श्मशान का जल्द ही जीर्णोद्धार करने पर विचार बन रहा है।

शुल्क जल्द होगा निश्चित
राकेश गोयल बताते हैं कि यह प्रक्रिया बहुत ही आसान होगी। इसमें सिर्फ एक बटन दबाने भर से शव का दाह संस्कार हो जाएगा। साथ ही इसका शुल्क कमेटी द्वारा जल्द ही निश्चित की जाएगी।

