- निर्जला एकादशी में पानी पीना भी होता है वर्जित
- अन्न दान का होता है खास महत्व
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सनातन धर्म के मुताबिक वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे अधिक फलदायी है। कहते हैं कि महाबली भीम ने भी निर्जला एकादशी व्रत रखा था। जिसके बाद से इसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है।
भले ही निर्जला एकादशी व्रत वाले दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिन भर निर्जल तथा निराहार रहते हैं, बावजूद इसके उन्हें निर्जला एकादशी का इंतजार वर्ष भर रहता है। कारण सनातन धर्म के मुताबिक वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे अधिक फलदायी है।
बाबा मनोहर नाथ मंदिर के विष्णु शास्त्री ने बताया कि भीषण गर्मी के बीच दिनभर निर्जल व निराहार रहकर प्रभु की भक्ति का फल परमात्मा अवश्य देते है। वास्तव में विपरीत परिस्थितियों में रहकर की जाती भक्ति में अपार शक्ति होती है। यहीं कारण है कि देवी-देवता तथा ऋषि मुनि जंगलों या फिर पहाड़ों में जाकर भक्ति व तपस्या करते थे। यही स्थिति कलियुग में भी है।
गर्मी के सीजन में दिन भर प्यासे व भूखे रहकर की जाती पूजा भी तपस्ता के समान ही है। उन्होंने कहा कि महाबली भीम ने भी निर्जला एकादशी व्रत रखा था। जिसके बाद से इसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है।
भगवान विष्णु की करें उपासना
निर्जला एकादशी का व्रत रखने के दौरान भगवान विष्णु की उपासना करनी चाहिए। इससे मां महालक्ष्मी भी प्रसन्न होते व इंसान के जीवन में उन्नति तथा खुशहाली आती है। इस व्रत के दौरान धर्म, कर्म के साथ ही जल व फल का दान जरूर करना चाहिए। गर्मी के दौरान किसी इंसान को जल ग्रहण करवाने से उसके तन व आत्मा को भी शांति प्राप्त होती है। आत्मा की परमात्मा है। जिससे परमात्मा भी प्रसन्न होते है।
10 जून को रखें निर्जला एकादशी का व्रत
पं. आलोक शर्मा के मुताबिक इस बार भले ही ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी की तिथि 11 जून को शाम 5 बजकर 44 बजे तक रहेगी, लेकिन निर्जला एकादशी का व्रत दस जून को ही रखा जाएगा। कारण इसकी शुरुआत 10 जून को सुबह 7 बजकर 25 मिनट से हो रही है। ऐसे में निर्जला एकादशी व्रत का पारण दस जून को ही किया जाएगा।
व्रत के दौरान ये करें
- व्रत वाले दिन दिन भर निर्जल व निराहार रहें।
- व्रत वाले दिन ब्रह्मचर्य की पालन करें।
- मानसिक मजबूती व दृढ़ प्रतिज्ञा से व्रत का पालन करें।
- व्रत वाले दिन जल से भरा हुआ कलश दान करें।
- प्यासे लोगों को पानी पिलाएं।
- घर की छत या खुले में किसी पेड़ के नीचे पशु-पक्षियों के लिए पानी व दाना की व्यवस्था करें।
- मंदिर में जलए कलश, पंखें, दूध व फलों का दान करें।

