- साइलेंट मोड पर आए अधिकारी, विभाग में हड़कम्प
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पीडब्ल्यूडी को हस्तिनापुर के श्राप से अभी मुक्ति भी नहीं मिली थी कि एक और कलंक उसके माथे पर लग गया। नगर निगम में हुए सड़क निर्माण घोटाले का जिन्न जैसे ही पीडब्ल्यूडी दफ्तर पहुंचा तो हड़कम्प मच गया। इस घोटाले में जिन 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें दो पीडब्ल्यूडी के अभियंता भी हैं।
हालांकि पीडब्ल्यूडी के जिन दो अभियंताओं के नाम इस सड़क निर्माण घोटाले में बताए जा रहे हैं, उनमें से एक (छोटे साहब) ने सफाई देते हुए कहा कि हम पाक साफ हैं और अगर कोई हमें कुसूरवार ठहरा रहा है तो हमारा कुसूर सिर्फ इतना है कि हमने अपने अधिकारियों के आदेश का पालन करते हुए संबंधित सड़क का जाकर स्थलीय निरीक्षण कर लिया।
उधर, दूसरे आरोपी (बड़े साहब) से जब बात करनी चाही तो पहले तो उन्होंने फोन नहीं उठाया, पुन: फोन करने पर उन्होंने यह कहते हुए फोन काट दिया कि वो किसी प्रेजेंटेशन में बैठे हुए हैं। बताते चलें कि इस प्रकरण में 300 मीटर की सड़क को 600 मीटर की दिखाकर वर्कआॅर्डर जारी हुआ था। मामला खुलने पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपार्ट में पीडब्ल्यूडी के भी दो अभियंताओं को दोषी पाया था।

उधर, रिपोर्ट मिलने के बाद नगर आयुक्त ने भी सभी आरोपियों के खिलाफ शासन से सख्त कार्रवाई की संस्तुति कर दी है, जिससे हड़कम्प मचा हुआ है। उधर, पीडब्ल्यूडी दफ्तर में यह प्रकरण हॉट हो गया है। अधिकारियों से लेकर कर्मचारी तक इस पर चर्चा करते हुए दिख रहे हैं। हमने जब इस मामले की तह तक जाने की कोशिश की तो कुछ विभागीय कर्मचारी ही आरोपी अभियंताओं के खिलाफ मुखर दिखे।
उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर इतना हिन्ट दे दिया कि सब कुछ कमीशन बेस्ड है। हमने पूछा कितना कमीशन? बोले 50 प्रतिशत! क्या इस सड़क निर्माण प्रकरण में भी कमीशनखोरी हुई है? सवाल चूंकि तीखा था, कसैला था थोड़ा टेढ़ा था तो जवाब देने में कर्मचारियों ने थोड़ा वक्त भी लिया और सिर्फ इतना कहा कि देखिए! जब कुर्सी से उठे बिना कोई स्थलीय निरीक्षण जैसा कार्य कर लिया जाए तो उसके पीछे की वजह और मंशा भी साफ हो जाती है।
बहरहाल कौन दोषी है और कौन नहीं? यह न हम तय कर सकते हैं और न हमारे पाठक, लेकिन कुछ कर्मचारियों द्वारा दिए गए उक्त बयान इस बात की ओर साफ इशारा कर रहे हैं कि भारी भरकम इस विभाग में जब बरतन खनकते हैं तो कुछ न कुछ होता जरुर है।

