Tuesday, March 17, 2026
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गुर्जर छत्रपों के वारिसों को धीरे से लगा जोर का झटका

  • हुकुम सिंह की बेटी और वीरेंद्र सिंह के पुत्र थे दावेदार

आरिफ चौधरी |

कैराना: उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह व पूर्व मंत्री एवं ​भाजपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह के पुत्र मनीष चौहान कैराना लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट के लिए मजबूत दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन वर्तमान सांसद प्रदीप कुमार के सामने वे कमजोर साबित हुए। इसके बाद गुर्जर बाहुल्य कैराना व शामली विधानसभा क्षेत्रों में गुर्जर समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है।

बाबू हुकुम सिंह को उप्र के दिग्गज नेताओं में गिना जाता रहा है। सन् 1974 में हुकुम सिंह कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए थे। उसके बाद भाजपा व कांग्रेस सरकारों में मंत्री भी रहें। वें कुल सात बार विधायक रहे हैं। 2014 में कैराना पलायन मुद्दा उठाकर वें राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गए थे। भाजपा ने पलायन मुद्दे को 2017 के विधानसभा चुनाव में भुनाया तथा प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई। पलायन का मुद्दा 2019 के लोकसभा चुनाव में भी असरदार रहा।

दूसरी ओर, वीरेंद्र सिंह 6 बार कांधला विधानसभा सीट से विधायक रहे। वे 2002 में सपा-रालोद गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हरे। उनकी मजबूत राजनीति के चलते मनीष चौहान ने मुजफ्फरनगर के डीएवी कॉलेज में छात्र राजनीति की। वर्ष 2010 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए। इसके बाद शामली अलग जिला बनने के बाद 2013 में वें जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। मनीष चौहान ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में एक वोट से बसपा के बिजेंद्र मलिक को हराया था। 2015 में भी मनीष चौहान ने जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ा। उन्होंने नाहिद हसन की बहन इकरा हसन को करीब 5 हजार मतों से पराजित किया था।

सपा द्वारा कैराना लोकसभा सीट पर पहले ही इकरा हसन को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद से राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे, भाजपा हाईकमान इकरा हसन के सामने युवा मनीष चौहान पर दांव लगा सकता है, क्योंकि मनीष चौहान ने 2017 के विधानसभा चुनाव में शामली से निर्दलीय चुनाव लड़ा और 30 हजार से अधिक मत लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। गुर्जर क्षत्रप वीरेंद्र सिंह सपा को छोड़कर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उनके भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा ने उनके कद के अनुसार उनको एमएलसी मनाया।

दूसरी ओर, गुर्जर छत्रप रहे नेता हुकुम सिंह अपनी राजनीतिक विरासत बेटी मृगांका सिंह को सौंपना चाहते थे। मृगांका सिंह एक बार लोकसभा उपचुनाव व दो बार विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं। राजनीति की रपटीली पगडंडियों पर मृगांका सिंह टिक ना सकीं। लोकसभा 2024 के चुनाव में कैराना लोकसभा सीट से मृगांका सिंह व मनीष चौहान की प्रबल दावेदारी मानी जा रही थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव की तरह ऐन वक्त पर भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने मौजूदा सीटिंग भाजपा सांसद प्रदीप चौधरी पर दोबारा विश्वास जताते हुए उन्हें प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे दिग्गज गुर्जर क्षत्रप हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह एवं भाजपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह के पुत्र मनीष चौहान को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिल सका। इसलिए गुर्जर बाहुल्य शामली व कैराना विधानसभा पर गुर्जर समाज में रोष बना हुआ है।

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