
सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर जब मेरे लेख एवं टिप्पणियां किसी समाचार पत्र में प्रकाशित होती हैं तो जिस पत्र-पत्रिका में मेरा मोबाइल नंबर दिया गया होता है तो उसके मार्फत मुझे पर्याप्त फोन काल आते हैं। अक्सर पाठक लिखे हुए शब्दों को सच मान कर उनपर विश्वास करते हैं और उस पर अपनी प्रतिक्रिया या राय जाहिर करते हैं। इससे संतोष भी मिलता है और उत्साह भी बढ़ता है। सुखद यह कि सोशल मीडिया की तरह ट्रोल होने का खतरा भी नहीं होता। यदि कहीं उन्हें किन्हीं परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो तो वे आपसे मार्गदर्शन की अपेक्षा भी करते हैं।