Wednesday, March 25, 2026
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दवा वहीं अच्छी जो डाक्टर के मेडिकल स्टोर से मिले

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दवा वही अच्छी मानी जा रही है जो डाक्टरों के मित्र मेडिकल स्टोर से लिखी जा रही है। डाक्टरों ने अपने क्लीनिक में ही मेडिकल स्टोर खोल लिये हैं और मनमाने दामों पर दवाइयां बेची जा रही है। शहर में वायरल, संक्रमक बीमारियां और त्वचा संबंधी बीमारियों से लोग सैंकड़ों की तादाद पीड़ित हैं और मेडिकल स्टोरों पर दवाओं के नाम पर जमकर खिलवाड़ हो रहा है।

बारिश के बाद संक्रामक रोगों के फैलने से मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इन दिनों वायरल फीवर, डेंगू, मलेरिया के अलावा अन्य मौसमी बीमारियों से लोग संक्रमित हो रहे हैं। आलम यह है कि सरकारी व निजी अस्पतालों में ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारे लगी हुई हैं।

वहीं, शहर के कुछ मेडिकल स्टोर इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। मेडिकल स्टोर मरीजों को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। बरसात के बाद तेज धूप के कारण उमस भरे मौसम में लोग सिरदर्द, जुकाम, बुखार, डेंगू, मलेरिया आदि बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।

कुछ लोगों ने बताया कि संक्रामक रोग फैलते ही मेडिकल स्टोर स्वामी मरीजों से बीमारी पूछकर अपने हिसाब से महंगी दवाइयां दे रहे हैं। मेडिकल स्टोर संचालक महंगी दवाई देकर अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं।

लोगों ने बताया कि संक्रामक रोगों में चर्म रोग, नाक व गला रोग, हृदय रोग, बाल रोग आदि बीमारियों की दवाइयां को मेडिकल स्टोर पर प्रिंट रेट पर महंगी दवाई मरीजों को बेचकर मोटा मुनाफा कमाने में लगे हैं।

मेडिकल स्टोर संचालक निजी डाक्टरों से मिलकर बीमार मरीजों को खुलेआम लूट रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे बैठा है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

चिकित्सकों की मिलीभगत

निजी अस्पतालों एवं डाक्टर की दुकानों के बाहर मेडिकल स्टोर संचालकों की डाक्टरों से मिलीभगत होती है। जिस कारण डाक्टर वही दवा लिखते हैं, जिसमें मेडिकल स्टोर को मुनाफा हो सके। वहीं, डाक्टर भी मोटी फीस वसूलते हैं। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों को इस बात पर ध्यान देते हुए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

दाम से ज्यादा करते हैं वसूल

शहर में दवा विक्रेताओं द्वारा खुलेआम ग्राहकों से ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं। जबकि दवाइयों के ऊपर रेट के अनुसार ग्राहकों से रुपये नहीं लिए जाते हैं। अगर ग्राहक इनसे दवा पर लिखे हुए रेट की बात करता है, तो कंपनी की नीतिगत और उन बातों में उलझा दिया जाता है।

जिसका दवा खरीदार को कोई वास्ता तक नहीं। कई बार मरीज की बिगड़ी हुई हालत को देखकर लोग दवाओं की कीमतों पर ध्यान नहीं देते। मेडिकल संचालक सबसे अधिक इसी बात का फायदा उठाते हैं।

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