Monday, January 24, 2022
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एसटीपी से उठती सड़ांध से वीवीआईपी कॉलोनी के लोग आए आजिज

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शिकायत के बावजूद सड़ांध से नहीं मिल रही निजात              

बदबू ऐसी कि व्यक्ति बिना नाक ढके नहीं घूम सकता कॉलोनी में                

एसटीपी की बदबू से हर कोई परेशान, वातावरण हो रहा दूषित                  


मनोज राठी |

गंगानगर: डिफेंस कालोनी में नवनिर्मित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के आसपास दुर्गंध व्याप्त है। इससे लोग परेशान हैं। सोसायटी व सरकारी महकमों तक में शिकायत की जा चुकी है, लेकिन दुर्गंध से लोगों को निजात नहीं मिल पा रही है। यह माना जा रहा है कि प्लांट का संचालन व क्लोरीनेशन सही से नहीं किया जा रहा है।

कॉलोनीवासियों का कहना है कि इस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के आसपास से लगातार लोगों का आना जाना होता है। कॉलोनी में लगे सीवर का पानी जमा होने से उठती बदबू लोगों को सांस नहीं लेने देती है। एसटीपी परिसर के अंदर भी मेनहोल से निकलते पानी की बदबू से भी लोग परेशान और आजिज हो चुके हैं।

वीवीआईपी डिफेंस कालोनी में एसटीपी का निर्माण यूनिक इंजीनियर्स इंडिया एजेंसी ने किया है। एसटीपी में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 42 अंडरग्राउंड टैंक हैं। दो फिल्टर हैं, क्लोरीन व फिटकरी की डोजिग के लिए पंप लगाए हैं। दो ब्लोअर लगाए गए हैं। एजेंसी के डायरेक्टर मुकेश त्यागी ने बताया कि अंडरग्राउंड टैंक में केमिकल कैटालिस्ट (गंदगी को समाप्त करने वाला केमिकल) से स्लज (गंदगी) को टैंक में ही समाप्त किया जाता है।

इसके बाद फिल्टर, क्लोरीन व फिटकरी की डोजिग के जरिए ट्रीटमेंट के दौरान सीवेज के पानी की गंदगी व दुर्गंध समाप्त की जाती है। यह 50 केएलडी का प्लांट है। क्षमतानुसार प्रतिदिन 10 से 15 लीटर तक क्लोरीन और करीब 15 किलो फिटकरी का उपयोग होना चाहिए।

उनका दावा है कि अगर डोजिग सही मात्रा में की जाएगी तो 85 से 90 फीसद तक पानी को ट्रीट किया जा सकता है और दुर्गंध भी नहीं होगी। अगर दुर्गंध आ रही है तो सीवेज ट्रीटमेंट के दौरान क्लोरीनेशन सही मात्रा में नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्लांट का संचालन खुद सोसायटी कर रही है, लेकिन दुर्गंध की समस्या का निदान कंपनी स्तर से भी कराया जाएगा।

यदि पता होता तो बनने ही न देते ट्रीटमेंट प्लांट                                     

वीवीआईपी डिफेंस कॉलोनीवासियों का कहना था कि विभाग ने उन्हें इस ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर धोखे में रखा। बताया कि जब यहां पर प्लांट स्थापित किया जा रहा तो पूछने पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यहां पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जा रहा है। जिससे किसी को भी कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) जोकि आबादी में ही स्थापित कर दिया गया है। यदि शुरुआत में ही पता चलता तो स्थानीय लोग यहां सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनने ही नहीं देते।

दूषित पानी से वातावरण हो रहा जहरीला                                                 

वीवीआईपी डिफेंस कॉलोनी में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) सीवर लाइन से निकलने वाले गंदे पानी के कारण पूरी कॉलोनी के लोग परेशान हैं। कोरोना संक्रमण काल में मेनहोल के लीकेजों से निकलता गंदा पानी कॉलोनी में कई स्थानों पर वातावरण दूषित कर रहा है। गंदा पानी सड़क पर बहने से क्या हो सकता है, इस बात को जानते हुए भी नगर निगम की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है। वीवीआईपी डिफेंस कॉलोनी में व्याप्त गंदगी एवं चोक नालियों से फैल रही दुर्गंध से आम जनता को निजात नहीं मिल पा रही है।

प्लांट का संचालन सही से नहीं होना भी है कारण                                        

एसटीपी संचालन से जुड़े ज्योति विल्टेक के राम प्रताप सिंह का कहना है कि ट्रीटेड वाटर की निकासी के दौरान दुर्गंध आ रही है तो इसकी दो वजह हैं। एक क्लोरीनेशन सही मात्रा में नहीं किया जा रहा है। दूसरा प्लांट का संचालन सही से नहीं हो रहा होगा। उन्होंने कहा कि क्योंकि सर्दी हो या गर्मी घरों में पानी का इस्तेमाल सुबह साढ़े चार बजे से लेकर रात 10 बजे तक होता है। इतनी देर तो प्लांट निरंतर चलना ही चाहिए, लेकिन डिफेंस कालोनी की सोसायटी सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक ही प्लांट चला रही है।

कॉलोनी में नाक ढककर गुजरना बनी विवशता                                       

वीवीआईपी डिफेंस कॉलोनी में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) होने से कॉलोनीवासी परेशानी का दंश झेलते आ रहे हैं। कॉलोनी के बीचोबीच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होने से और बराबर में कसेरूखेड़ा नाला है। इसकी समुचित साफ-सफाई नहीं कराये जाने के कारण लोगों का सड़ांध के कारण यहां से गुजरना कठिन हो रहा है। नागरिक नाक ढककर कॉलोनी से गुजरने को विवश हो रहे हैं।

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