Thursday, March 19, 2026
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लाडलों की घर वापसी की कवायद तेज

  • फिलहाल सुरक्षित ठिकानों पर जल्द पहुंचेंगे अपनों के बीच

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: किठौर के दो छात्र तो सकुशल लौट आएं है, लेकिन उन्हें यूक्रेन में फंसे अपने साथियों की चिंता सता रही है। खारकीव में बिगड़े हालात ने चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि अधिकतर छात्र सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे हुए हैं। मगर दूतावास द्वारा फोन रिसीव न करने से छात्रों में हड़कंप मचा हुआ है।

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उधर, खारकीव विवि के बंकर में फंसा किठौर निवासी अमन खारकीव रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया है। जहां से पूरी रात ट्रैन का सफर कर वह लवीव पहुंचेगा। बताया कि खारकीव के हालात अभी बहुत खराब हैं। जैसे-तैसे छात्र वहां से निकल पाए हैं। इससे पूर्व अमन व उसके साथियों ने तीन दिन बंकरों में बिताए।

वतन वापसी की लालसा में रातभर सफर

राधना निवासी अब्दुल खालिक यूक्रेन के डेनीप्रो से ट्रेन द्वारा साथियों संग दूसरे देश स्लोवाकिया के प्रेसोव शहर में पहुंच गए है। वह रात भर ट्रेन में सफर करते रहे। बताया कि स्थानीय पुलिस ने एक स्कूल में 300 छात्रों को ठहरा रखा है। जहां उन्हें खाने के लिए ब्रेड व बिस्कुट दी गई। खालिक ने बताया कि फिलहाल वह सुरक्षित माहौल में है। शाम को एक फ्लाइट की व्यवस्था की गई है।

जिसमें लगभग 180 छात्र भेज दिए जाएंगे। बकौल खालिक उन्हें दूतावास से जानकारी मिली है कि इसके बाद नौ मार्च तक कोई भी फ्लाइट की व्यवस्था नहीं हो पाएगी। इससे छात्रों की चिंता बढ़ गई है। उधर खालिक के भाई नासिर ने भारत सरकार से अपील की है कि एमबीबीएस की सस्ती व सुलभ पढ़ाई की व्यवस्था देश में ही करे। ताकि बच्चे यहां रहकर ही पढ़ाई कर सके।

जगी उम्मीद, जल्द लौटेंगे लाडले

लाडलों के वतन वापसी की राह आसान होने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है। रोमानिया से 15 किमी दूर कैंप में ललियाना निवासी फिरोज आलम, शाहजहांपुर निवासी नवाज खान, फाइज खान व किठौर निवासी शुऐब एक साथ सुरक्षित ठहरे हुए हैं।

फिरोज आलम के अनुसार एक दो दिन में वापसी के लिए फ्लाइट मिलने की उम्मीद है। परिजनों ने उम्मीद जताई कि उनका बेटा जल्द घर लौटेगा। फिरोज ने बताया कि यहां भारी बर्फबारी के कारण छात्रों की तबीयत बिगड़ रही है। नेटवर्क प्राब्लम होने के कारण परिजनों से बातचीत में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

तमन्ना की ‘तमन्ना’ हुई पूरी, पहुंची घर, परिजनों ने खुशी से किया स्वागत

खरखौदा: यूक्रेन में एमबीबीएस तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रही पांची निवासी तमन्ना त्यागी बुधवार उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित गंगानगर आवास पर पहुंच गई। जहां परिजनों से मिलकर खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वहीं, परिजनों ने तमन्ना का खुशी के साथ गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। पांची निवासी तमन्ना पुत्र अतुल त्यागी यूक्रेन में इवानो में फ्रैकिवसक यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा है।

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यूक्रेन पर रूस द्वारा हमला करने के बाद उच्चायोग द्वारा भारतीय को यूक्रेन से निकाल कर सड़क मार्ग से रोमानिया भिजवाया गया। इस बीच सड़क मार्ग पर जाम के दौरान बस पेपर स्प्रे किया गया। रोमानिया एयरपोर्ट पर धक्का-मुक्की में चोटें भी आई और कुछ सामान भी वही रह गया। सोमवार सुबह हवाई मार्ग से वह दिल्ली पहुंची और दिल्ली में बुआ के साथ उनकी ससुराल हस्ताल चली गई। दो दिन बाद बुधवार को तमन्ना उत्तराखंड स्थित ऋषिकेश के गंगानगर अपने आवास पर पहुंच गई और माता-पिता से मिलकर खुशी का ठिकाना न रहा। वहीं, तमन्ना ने भारत सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि सरकार की मदद से ही आज वो अपने घर सकुशल पहुंची है।

मुसीबत से निकलकर ‘लाल’ घर लौटा तो भर आर्इं आंखें

रोहटा: पिछले एक सप्ताह से जारी जंग के बीच यूक्रेन में फंसे मिर्जापुर के इजहार बुधवार को वतन लौटने पर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दरअसल, मिर्जापुर गांव के इदरीश त्यागी का बेटा इजहार यूक्रेन में पढ़ाई करने के लिए गया हुआ था। जहां पर रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया तो भारतीय छात्र भी फंस गए थे। जिसमें से मेरठ के मिर्जापुर निवासी इदरीश त्यागी का बेटा इजहार भी था, जो बुधवार को गांव मिर्जापुर सकुशल पहुंच गया है।

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जब इजहार मुसीबतों के पहाड़ से निकल घर पहुंचा तो मां ने देखते ही जिगर के टुकड़े को कलेजे से लगा लिया और मां की आंखों में आंसू भर आए तो वही पिता इदरीश की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने भी कलेजे के टुकड़े को दिल से लगा लिया। इजहार के लौटने पर मानो परिवार की ईद मन गई। इजहार ने बातचीत के दौरान मीडिया को बताया कि वह कितनी बाधाएं पार करके और मुसीबत भरकर वतन लौटा है।

यूक्रेन से वापस लौटे इजहार ने बताया कि जब गत 24 फरवरी में पहली बार हमला हुआ था तो वहां से लोगों में भगदड़ का माहौल मच गया था। अफरा-तफरी का माहौल था और सिर छुपाने के लिए बंकर में साथियों के साथ रहकर कई दिन गुजारे। बताया कि बंकर से निकलकर दूसरे ठिकाने पर पहुंचने की कोशिश की तो कैब वालों ने दोगुना किराया कर दिया। जैसे-तैसे करके वहां से एयर इंडिया की फ्लाइट के पास पहुंचे तो वहां से उल्टा भेज दिया।

क्योंकि वहां से हमला 200 मीटर की दूरी पर ही हुआ था। इजहार ने बताया कि वहां से फिर कैब बुक की। ग्रुप के आठ बंदे थे। फिर प्लान के तहत पोलैंड बॉर्डर पर चले जाएं। जहां पर वीजा फ्री है। पोलैंड वालों ने वीजा फ्री कर दिया था। जाम इतना लंबा लगा था कि दो दिन का इंतजार करना पड़ा। भारतीय छात्र भी डरे हुए थे, जोकि वतन लौटने के लिए हर तरह का प्रयास कर रहे थे।

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