Tuesday, March 17, 2026
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खेल का जज्बा दिल में और परिवार की जिम्मेदारी कंधों पर

  • ऐसे खिलाड़ी जो अपनी इच्छाओं को भी मरने नहीं देते और जिम्मेदारियों का भी करते हैं पालन
  • परिवार से मिलता पूरा सपोर्ट, फिर भी अतिव्यस्त दिनचर्या के बीच खेलों को भी देते हैं समय

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हर किसी का सपना होता है जिसे पूरा करने के लिए वह अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करता है, लेकिन कई बार हालातों के हाथों मजबूर होने के बाद सपना केवल सपना ही रह जाता है। पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी निभाते हुए आज भी अपने सपनों को मन में लिए खेल रहे हैं खिलाड़ी। ऐसे ही कुछ खिलाड़ियों की कहानी उनकी जुबानी।

चार साल पहले शादी के बंधन में बंधनें वाले शूटर गौरव आज भी स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रहे है। ससुराल बुलंदशहर में है, परिवार में माता-पिता है, लेकिन अपने खेल के सपने को जीवित रखते हुए अभी फैमिली प्लानिंग की हुई है। एक प्रतिष्ठित फार्मा कंपनी में जॉब भी करते हैं, सुबह चार बजे उठने के बाद स्टेडियम में प्रैक्टिस करते हैं।

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इसके बाद सुबह साढ़े सात बजे लौटते हैं, फिर जॉब पर निकल जाते हैं। शाम को लौटने के बाद फिर से स्टेडियम में प्रैक्टिस करते हैं। रात नौ बजे वापस घर लौटते हैं। परिवार का पूरा सहयोग मिलता है। स्टेट लेवल तक खेल चुके हैं, नेशनल की तैयारी है। मेडल लाने का सपना है, जिसको लेकर खेलते हैं।

जनेशवर सैनी का कहना है कि शादी को छह साल हो चुके हैं, मुजफ्फरनगर में ससुराल है। परिवार में माता-पिता, भाई-बहन है। सभी की शादी हो चुकी है, खुद का एक बेटा भी है। ईओडब्ल्यू सीआईडी में नौकरी करते हैं। सुबह चार बजे उठते है इसके बाद प्रैक्टिस के लिए स्टेडियम में जाते है।

हापुड़ में पोस्टिंग है, 10 बजे ड्यूटी पर जाते हैं, स्टेट प्रतियोगिात में मेडल जीता है। 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में 2021 नोएडा में। नौकरी के साथ अपने खेल को भी तबज्जों देते हैं। शूटिंग का खर्च भी नौकरी से मिलने वाली तनख्वाह से ही निकालते हैं। परिवार से पूरी मदद मिलती है। अब देश के लिए खेलते हुए मेडल जीतने का सपना है।

गिरीराज का कहना है कि जेल में जेल वार्डन की नौकरी पर है। मेरठ जेल में ही, 49 साल की उम्र में भी खेल का जज्बा कायम है। बेटा कृष्णा भी नेशनल स्तर का शूटर है, स्टेडियम व घर पर भी प्रैक्टिस करते हैं। यूपी पुलिस की तरफ से खेलते हुए सीतापुर में कांस्य पदक जीत चुके हैं।

अपने परिवार के साथ रहते हुए भी देश के लिए मेडल जीतने का सपना देखते हैं। इतनी उम्र में भी हौसले काफी बुलंद है और देश का प्रतिनिधित्व करने का ख्वाब संजोए हुए हैं। कहते है कि अगर हौसले बुलंद हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखती।

एथलीट मुक्ता भाटी की शादी को 18 साल हो चुके हैं, इस समय भी खुद को फिट रखने के लिए स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रही है। ससुराल बहसूमा में है, परिवार में जेठ, ननद व खुृद के भी दो बच्चे हैं। बीएवी में फिजिकल एजुकेशन टीचर है। खेल से जुड़े होने के कारण मल्टीटॉस्किंग बन चुकी है।

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नौकरी के साथ अब भी अपने खेल के प्रति लगाव को जीवित रखा है। घर में परिवार का भी ध्यान रखना होता है। 400 मीटर बाधा दौड़ खेलती थी, लेकिन अब नौकरी के साथ परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रही है। नार्थ जोन में 800 व 400 इवेंट में गोल्ड जीत चुकी है। साथ ही इंटर स्कूल व कॉलेज प्रतियोगिताओं में भी कई पदक जीत चुकी है। शादी के समय में कुछ दिनों के लिए खेल से दूर हो गई थी, लेकिन कभी खेल को छोड़ दे यह नहीं हो सकता। मैदान से जुड़ा रहना चाहती है हमेशा।

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