Sunday, May 16, 2021
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व्यवस्था ने तोड़ा दम: एम्बुलेंस में तड़पता रहा मरीज, नहीं किया भर्ती

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जनवाणी ब्यूरो |

मेरठ: नियम इंसानों के लिए होते हैं, इंसान नियमों के लिए नहीं। व्यवस्था यह बात कब समझेगी? ये हेल्थ इमरजेंसी है। जीवन बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए, मगर बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार रेफरल जैसे कायदों में ही क्यों उलझे रहते हैं। कोरोना से नहीं, बल्कि इंसान सिस्टम के सामने हार गया है। क्योंकि समय से इलाज हॉस्पिटल में मिल नहीं रहा है। आॅक्सीजन जीवन हैं, यह सिस्टम नहीं समझ रहा है।

आॅक्सीजन आवश्यक है, जिसकी पूर्ति सिस्टम नहीं कर पा रहा है, जिसके चलते लोग नहीं, बल्कि व्यवस्था दम तोड़ रही है। मेरठ मेडिकल की इमरजेंसी के हालात तो बेहद दयनीय है। यहां लापरवाही की मौत हो रही है। सिस्टम पर लगाम नहीं लग पा रही है? आखिर इसके लिए जवाबदेही किसकी हैं?

रविवार को मेडिकल की इमरजेंसी के बाहर खूब बवाल हुआ। गंगानगर से देवेन्द्र नामक मरीज को लेकर एम्बुलेंस मेडिकल की इमरजेंसी के बाहर लेकर पहुंची। देवेन्द्र एम्बुलेंस में तड़प रहा था कि सिस्टम उसे इलाज देगा तो उसकी जान बचेगी, लेकिन सिस्टम तो इतना लापरवाह हो गया है कि देवेन्द्र को एम्बुलेंस से उतारने तक नहीं पहुंचा और देवेन्द्र ने एम्बुलेंस में ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

कौन है इसके लिए जिम्मेदार? सरकारी सिस्टम इतना लापरवाह हो गया है कि मरीज इमरजेंसी के बाहर एम्बुलेंस में मौजूद, फिर भी उसे भर्ती नहीं किया गया। एक नहीं, बल्कि इस तरह के मामले हर रोज सामने आ रहे हैं, जो सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं।

व्यवस्था इतनी चरमा गई है कि अमित वर्मा निवासी ब्रह्मपुरी व प्रदीप कुमार निवासी अलीगढ़, ये दोनों मेडिकल के कोविड वार्ड में भर्ती थे, लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि इलाज के अभाव में दोनों दम तोड़ गए। सांसद हो या फिर विधायक प्रशासनिक अधिकारियों को भी मरीजों ने कॉल की कि हम मर रहे हैं। हमें इलाज दिलवा दो, लेकिन

इनको सिस्टम इलाज नहीं दे पाया। आखिर इसके लिए जवाबदेही किसकी है?

कोरोना संक्रमण फेलने के बाद ऐसे हालात पैदा होंगे, शायद यह सिस्टम ने कल्पना भी नहीं की थी। इससे निपटने के लिए तैयारी भी नहीं की। यही वजह है कि सिस्टम कोरोना संक्रमण के सामने दम तोड़ रहा है। फिर लापरवाही भी कम नहीं हो रही है।

कोरोना संक्रमित देवेन्द्र निवासी गंगानगर एम्बुलेंस से मेडिकल की इमरजेंसी के पास पहुंचा। देवेन्द्र व उसके परिजनों को उम्मीद थी कि जाते ही ट्रीटमेंट मिलेगा, लेकिन शायद उसे यह आभास नहीं था कि सिस्टम इतना नकारा हो गया है, उसे मेडिकल की इमजेंसी की चौखट पर ही दम तोड़ना पड़ेगा। हुआ भी वैसे ही देवेन्द्र को एम्बुलेंस रविवार की सुबह मेडिकल की इमरजेंसी में पहुंची, जहां पर मेडिकल इमरजेंसी में मरीज के आने की बार-बार सूचना दी गई, मगर दुर्र्भाग्य देखिये सिस्टम की नींद नहीं टूटी।

देवेन्द्र को तत्काल उपचार मिलना चाहिए था। आॅक्सीजन की जरूरत थी। क्योंकि सांस खीच-खीचकर आ रही थी। परिजन एक उम्मीद के साथ देवेन्द्र को लेकर मेडिकल में पहुंचे थे, लेकिन सरकारी सिस्टम तो यहां पहले ही दम तोड़ चुका हैं, यह लाचार परिवार चिल्लाता रहा। डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ता रहा मरीज को भर्ती कराने के लिए, लेकिन सिस्टम है कि उसे सुना ही नहीं।

देवेन्द्र एम्बुलेंस में ही तड़पता रहा। यह पूरा दौर करीब एक घंटे से ज्यादा चलता रहा, लेकिन देवेन्द्र आखिर सिस्टम से हार गया। कोरोना संक्रमण से तो बच सकता था, लेकिन इस सिस्टम से कैसे जीत पाएगा, जो किसी की सुनता ही नहीं है। देवेन्द्र के परिजनों का आरोप है कि मेडिकल में उन्हें ट्रीटमेंट ही नहीं दिया गया, यदि समय रहते डॉक्टर देवेन्द्र को ट्रीटमेंट दे देते तो उसे बचाया जा सकता था।

बड़ा सवाल यह है कि यदि मेडिकल में बेड नहीं है तो अतिरिक्त बेड का प्रबंध क्यों नहीं किया जा रहा हैं? यदि बेड प्रर्याप्त मात्रा में है तो फिर देवेन्द्र को मरने के लिए एम्बुलेंस में क्यों छोड़ दिया गया? उसे भर्ती करने के बाद ट्रीटमेंट क्यों नहीं दिया? देवेन्द्र का तो जीवन खत्म हो गया, लेकिन उसके पीछे बहुत सारे सवाल छोड़ गया। सिस्टम पर क्या कोई चाबुक चला पाएगा या फिर इसी तरह से लोगों को मेडिकल की चौखट पर मरने के लिए छोड़ा जाता रहेगा।

…मैं मर रहा हूं, बचा लो भाई मुझे, बात करते-करते युवक ने तोड़ा दम

हे भगवान! मर रहा हूं मैं, भाई कोई तो बचा लो मुझे…यह आखिरी शब्द थे ब्रह्मपुरी निवासी कोरोना मरीज अमित के। अमित अपने भाई से खुद को बचाने की गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई उसे बचा नहीं पाया। अमित ने भी सिस्टम के आगे घुटने टेक दिये। यह हाल मेडिकल के कोविड वार्ड का है। जहां दो लोगों ने इलाज के अभाव में रविवार को दम तोड़ दिया। यही नहीं उनकी बॉडी भी उनके परिजनों को समय पर नहीं मिल पाई।

केस-1: अमित वर्मा निवासी ब्रह्मपुरी को कुछ दिन पूर्व मेडिकल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया था। अमित के भाई एडवोकेट प्रतीक सेठी ने बताया कि अमित जिस दिन से भर्ती हुआ उसी दिन से परेशान था। उसे यहां पर सही से इलाज नहीं मिल पा रहा था। कई बार अमित ने अपने घर वालों को फोन कर बताया। जबसे मैं भर्ती हूं मुझे कोई दवाई नहीं दी गई है और न ही कोई इंजेक्शन लगाया गया है। मैं यहां इलाज न मिलने के कारण मर रहा हूं मुझे कोई बचाने वाला नहीं है क्या। अमित की यह बाते सुनकर प्रतीक ने सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, मेडिकल प्रधानाचार्य तक को फोन मिलाया और अमित की हालत के बारे में जानकारी दी, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीें हुई। सांसद से कहने के बावजूद अमित को ठीक से इलाज नहीं दिया । आखिरकार रविवार रात को ही अमित ने दम तोड़ दिया। प्रतीक का आरोप है कि मेडिकल प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है।

केस-2: यही हाल गाजियाबाद निवासी प्रदीप वार्ष्णेय का हुआ। उन्होंने भी इलाज के नाम पर दम तोड़ दिया। प्रदीप के भाई अलीगढ़ निवासी सुमित ने बताया कि उनके भाई ने भी फोन पर कई बार बताया कि सही से इलाज नहीं मिल रहा है। इलाज न मिलने के कारण उसकी भी मौत हो गई, लेकिन मेडिकल प्रशासन इतना लापरवाह और भ्रष्ट हो चुका है कि उसकी मौत की जानकारी नहीं दी गई। जिसके चलते परिजन परेशान रहे। रविवार को कई घंटे इंतजार करने के बाद प्रदीप का शव परिजनों को मिली। इस दौरान सुमित की यहां मेडिकल स्टाफ के साथ हाथापाई भी हुई, लेकिन यहां कोई किसी की सुनने वाला नहीं है। मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है, परिजनों को कुछ बताया नहीं जाया रहा है। सिस्टम पूरी तरह से फेल हो चुका है, कोई कुछ कहने सुनने वाला नहीं है।

10 दिन से केएमसी में भर्ती था युवा भाजपा नेता नवीन

सरकारी सिस्टम कोरोना के सामने जवाब देने लगा है। एक-एक कर कोरोना से पीड़ितों की सांसों की डोर टूट रही है। हालात बेहद विस्फोटक हो रहे हैं। युवा भाजपा नेता एवं अधिवक्ता नवीन बैंसला (35) पुत्र ब्रजपाल उर्फ बिरजू की रविवार को कोरोना से मौत हो गई। नवीन मवाना रोड स्थित कसेरू बक्सर के रहने वाले थे।

नवीन अपनी माता-पिता की इकलौती संतान थी। 10 दिन पहले नवीन कोरोना संक्रमित हो गए थे, जिसके चलते उन्हें केएमसी हॉस्पिटल बागपत रोड पर भर्ती कराया गया था, जहां पर उनका उपचार चल रहा था, लेकिन शनिवार को नवीन के बराबर के बेड पर स्थित एक मरीज ने कोरोना से दम तोड़ दिया, जिसके बाद नवीन घबरा गया और रविवार को नवीन की अचानक हालात बिगड़ गई, जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया।

नवीन के परिजनों ने के अनुसार 12 दिन पहले मवाना में एक विवाह समारोह में नवीन गया था, जिसके बाद से ही उसको कोरोना संक्रमण हुआ है। इसके बाद से ही उसको बुखार हुआ था, जिसके बाद हालत बिगड़ने पर केएमसी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मरने वाला युवक नवीन रालोद के जिला प्रवक्ता कमलजीत सिंह गुर्जर का सगा भतीजा था। नवीन अपने पीछे पत्नी, बेटा व बेटी को छोड़कर गए हैं। नवीन बैंसला की मौत की खबर से कसेरू बक्सर के लोग स्तब्ध है।

वेंटिलेटर न मिलने से शिक्षिका की मौत

कोरोना महामारी के दौरान रविवार को वेंटिलेटर न मिलने से मटौर के एक कॉलेज में पढ़ाने वाली शिंिक्षका की मौत हो गई। कॉलेज की प्रधानाचार्या ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर दुख जताया। रविवार को मटौर स्थित श्रीमल्हू सिंह आर्य कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डा. नीरा तोमर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर अपनी एक शिक्षिका को वेंटिलेंटर उपलब्ध कराने के लिए सभी से गुहार लगाई, लेकिन कोई भी मदद न मिलने पर शिक्षिका रजनी की मौत हो गई। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने अपने इस दर्द को बयां किया। डा. नीरा तोमर का कहना है कि कोरोना की इस महामारी में सभी एक-दूसरे का साथ दे। आज उन्होंने अपनी बेटी जैसी एक शिक्षिका को खो दिया है। क्या पता किसी की मदद से कोई बच जाए।

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