Friday, March 20, 2026
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गोल मंदिर में पूरी होती है मां दुर्गा के भक्तों की मुराद

  • फिल्म प्रोड्यूसर देवीशरण शर्मा ने कराया था मंदिर का निर्माण

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: वैसे तो शहर में स्थित मां के प्रत्येक मंदिर की अपनी अलग पहचान व मान्यता हैं, लेकिन शास्त्रीनगर स्थित गोल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध दुर्गा मां के इस सिद्ध मंदिर में भक्त जनों की कुछ अलग ही आस्था है। शहर का यह प्रसिद्ध मंदिर सालों से शहर वासियों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।

बता दें कि पौराणिक शहर मेरठ में अगर किसी नए मंदिर के वास्तु और भव्यता का जिक्र आता है तो उसमें जयदेवी नगर स्थित दुर्गा मंदिर प्रमुख है। इसे गोल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। जय देवी नगर कालोनी जब विकसित हो रही थी उसी दौरान मंदिर का निर्माण आरंभ हुआ था। 1965 में जगद् गुरु शंकराचार्य कृष्ण बोधाश्रम के सानिध्य में मूर्ति की स्थापना हुई थी। जाने-माने फिल्म प्रोड्यूसर स्व. देवीशरण शर्मा ने 45 साल पहले मंदिर की विधिवत स्थापना की थी।

यहां पर भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। इस मंदिर में दूर-दूर से भक्तजन आते हैं। सिंह पर सवार देवी की मूर्ति को एक शिलाखंड को तराश कर जयपुर के कारीगरों ने अदभुद स्वरूप प्रदान किया है। मंदिर का वर्तमान भव्य स्वरूप कई सालों के चरण बद्ध निर्माण के बाद निखर कर आया है। देवी दुर्गा को मंदिर का स्वामिनी बनाते हुए ट्रस्ट की स्थापना की गई थी। ट्रस्ट ही मंदिर का रखरखाव आदि कार्य करता है।

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दर्जनों की संख्या में भक्त नियमित रूप से मंदिर आते हैं और सेवा कार्य करते हैं। 1000 वर्ग गज में निर्मित आस्था का यह स्थल शहर के सबसे बड़े दुर्गा मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित है। खास बात यह है कि यहां पर केवल देवी दुर्गा की मूर्ति है। सिंह पर सवार दुर्गा देवी का दरबार देखते ही बनता है। मंदिर का मंडप गोलाकार है और उसमें कमल की पंखुड़ियों की आकृति बनाई गई है। मंदिर का शिखर 90 फीट ऊंचा है। मंदिर में सरोवर और यज्ञशाला भी है। सरोवर इस प्रकार बनाया गया है कि उसमें मंदिर का प्रतिबिंब दिखता है।

दिव्य है देवी का शृंगार

मंदिर में माता के शृंगार की अपार महिमा है। नवरात्र में माता के हर रूप का अलग शृंगार होता है। अन्य दिनों में भी विशेषज्ञ शृंगार करते हैं। इस बार मां के मस्तक पर विराजित मुकुट में चांदी का रत्न व नग जड़ित चंद्रमा विभूषित किया गया है। मान्यता है कि जो भी भक्त मां का शृंगार करवाता है व चोला भेंट करता है उस पर मां की विशेष कृपा होती है। दीपक जलाकर सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मां की कृपा जरूर बरसती है। आज भी कई ऐसे भक्त आते हैं जो यहां छात्र के रूप में आते थे, अब बड़ा मुकाम हासिल कर चुके हैं। मेरठ में गोल मंदिर में दूरदराज से लोग मां के दर्शनों के लिए आते हैं।

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