- चिन्हित प्लाटों की नहीं होगी नीलामी, दिया एमडीए वीसी ने फ्रीज करने का आश्वासन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ताली पिटवाना सबसे आसान काम हैं। यदि मैं पिछले 45 मिनट से बात कर रहा हूं, मैं सीना ठोक कर बोल रहा हूं। मुझसे ज्यादा कोई हितैषी आपका न आया है और न आयेगा। सुनो..सुनो, ये पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की भूमि है ना…वो भी खुली-खुली और खरी-खरी बात करते थे ना। किसान हो ना, खरी-खरी बात करते हो ना, सुन लो मेरी बात। यदि मेरी नियत के ऊपर एक पैसे का भी डॉयूट है तो मुझसे बात मत करों। मान लो इस आदमी की बात…। मैं बता रहा हूं। मैं आपका काम करा पाऊ आपको धोख नहीं दूंगा।
आपके साथ छल नहीं करूंगा। नहीं हुआ ना तो जाकर शासन में बोल दूंगा, लेकिन धोखा नहीं दूंगा। मुझे दो माह हुए हैं। क्या पैसे दो माह से रुके हुए हैं। अब मैं प्रयास कर रहा हूं तो अब ये होगा। मैं भी यूपी का हूं। मैं समझता हूं आपकी पीड़ा। जितने लोग बैठे हैं, निकाल दो एकाउंट इस्टेटमेंट और रख दो यहां पर, मुझसे ज्यादा एकाउंट में सभी के पास पैसा मिलेगा। मेरे एकाउंट में सिर्फ वेतन जो मिलता है, वहीं मिलेगा। जितनी तनख्वाह आती है, उतना पैसा ही इसमें रहता हैं। साफ सीधी बात कर रहा हूं।
गोल-मोल बात नहीं कर रहा हूं। ये तरीका ठीक नहीं हैं। यदि आपको काम ही रुकवाना हैं तो हम बातचीत क्यों करें? अरे आप ये सोचो…नियम से आपको सबकुछ मिलेगा। मुझे लड़ाई लड़ने तो दो…। जब लगे कि अडंगा डाल रहा हूं तो मुझे घेर लेना। किसान घेरेगा तो रोटी भी देगा, ठंड लगेगी तो कंबल भी देगा। ये मैं समझता हूं। ये बाबा मुझे गाली भी देंगे तो मैं सुनूंगा, क्यों बाबा मुझसे बड़े है, लेकिन ऐसी कोई बात मत करों कि यहां पर बैठना भी हमारा निर्थक हो जाए। या तो बात करें, या फिर जो आपको करना है, वो करें। मुझ पर भरोसा तो होगा। शताब्दीनगर से ज्यादा सहानुभूति आपके साथ हैं।
मैं धन्यवाद करना चाहता हूं कि आपने कोई अड़चन पैदा नहीं की। ये संवाद एमडीए के वीसी अभिषेष पांडेय ने कुछ इस अंदाज में एमडीए में धावा बोलने आये किसानों के साथ किये। एमडीए के सभागार में तमाम किसान बैठे थे, उनके बीच में ही एमडीए वीसी पहुंचे। कुछ किसानों ने ये कह दिया कि जो समझौता हुआ हैं, उसके अनुसार प्रतिकर नहीं दिया तो अब वेदव्यासपुरी, लोहिया नगर और गंगानगर योजना में एमडीए के जो भी काम चल रहे वो बंद करा देंगे, इसके बाद तो प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय भड़क गए और किसानों को उनके ही अंदाज में बात की और संतुष्ट भी किया।
एक भी किसान फिर विरोध में नहीं बोला तथा तमाम किसान संतुष्ट होकर लौट गए। किसानों को वीसी ने आश्वस्त कर दिया कि जो प्लाट चिन्हित किये जा चुके हैं, उनकी नीलामी कतई नहीं होगी। चिन्हित भूमि को फ्रीज करने का आश्वासन किसानों को दिया। इस पर किसान संतुष्ट होकर लौट गए। दरअसल, वर्ष 2011 में शताब्दी नगर योजना में किसानों और एमडीए के बीच समझौता हुआ था। इसी समझौते के अनुसार वेदव्यासपुरी लोहिया नगर और गंगानगर योजना के किसान भी प्रतिकार मुआवजा मांग रहे हैं।
सोमवार को किसानों की भीड़ मेरठ विकास प्राधिकरण के आॅफिस में पहुंची तथा प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिषेक पांडे, सचिव चंद्र पाल तिवारी ने वार्ता की। गहमा-गहमी का माहौल था। संवाद चल रहा था, अचानक बीच में एक किसान ने एमडीए के काम बंद कराने की बात कह दी, जिसके बाद एमडीए वीसी नाराज हो गए और किसानों को फिर कुछ इस तरह से समझाया कि किसान संतुष्ट हो गए।

