Saturday, March 21, 2026
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मेडा में हजारों किसानों का हल्ला बोल

  • बैकफुट पर आये प्राधिकरण उपाध्यक्ष, कहा-पुराने निर्माण नहीं तोड़े जाएंगे, नये पर चलेगा बुलडोजर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) में गुरुवार को हजारों लोगों की भीड़ ने हल्ला बोल दिया। ये हल्ला तब बोला गया, जब प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय कमिश्नर सभागार में चल रही बोर्ड बैठक में मौजूद थे। आक्रोशित भीड़ प्राधिकरण अधिकारियों के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगा रही थी। नारेबाजी के बीच लोगों का गुस्सा भी साफ दिखाई दे रहा था। हल्ला बोलने की वजह थी एनएच-58 पर चिन्हित किये गये निर्माणों पर मेडा के बुलडोजर चलाने की धमकी देने का।

आक्रोशित लोग प्राधिकरण के बुलडोजर के खिलाफ धरने पर बैठे तथा टैÑक्टर लेकर सीधे किसानों ने प्राधिकरण कैंपस में घुसा दिये। आक्रोशित किसानों का जब घंटों तक डेरा जमा रहा, इसके बाद ही प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय धरनारत किसानों के बीच पहुंचे तथा उनके बीच ही पलाथी लगाकर बैठ गए तथा किसानों से बातचीत की। किसानों ने कहा कि ग्रीन वर्ज उनकी जमीन में क्यों छोड़ा गया? ग्रीन वर्ज छोड़ा गया है तो उस जमीन का अर्जन कर उन्हें पैसा दे दिया जाए। नई जमीन अधिग्रहण नीति के तहत। इस पर किसान अडिग हो गए।

ग्रीन वर्ज वाली जमीन किसानों की हैं। किसान इसमें व्यवसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं, जिसको लेकर प्राधिकरण ने हाल ही में चिन्हित कर निशान लगा दिये थे। इनको ध्वस्त करने की डेट भी फिक्स कर रखी हैं। इसकी भनक किसानों को लगी तो गुरुवार को प्राधिकरण के आॅफिस पर ट्रैक्टरों को लेकर हल्ला बोल दिया। ट्रैक्टरों को लेकर हजारों किसान मेडा के आफिस में भीतर एंट्री कर गए। पहले तो किसानों को पुलिस कर्मियों ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान कहां रुकने वाले थे।

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किसानों की भीड़ सीधे एंट्री कर गई, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने खूब नारेबाजी की। दोपहर 12 से किसानों का धरना मेडा आॅफिस में आरंभ हुआ, जो 3.30 बजे तक चला। प्राधिकरण उपाध्यक्ष किसानों के बीच पहुंचे तथा पॉलथी लगाकर उनके बीच बैठ गए। किसानों से उनका पक्ष सुना, जिसके बाद प्राधिकरण उपाध्यक्ष बैकफुट पर आ गए तथा प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि पुराने निर्माण नहीं तोड़े जाएंगे। नये निर्माण होंगे तो उन पर ही बुलडोजर चलेगा।

इस तरह से पुराने निर्माणों को प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने क्लीन चिट दे दी। पहले प्राधिकरण उपाध्यक्ष ग्रीन वर्ज में अवैध निर्माण को लेकर गिराने पर अडिग थे। अचानक बैकफुट पर आ गए तथा पुराने निर्माणों को क्लीन चिट देने में देर नहीं लगाई। इस आश्वासन के बाद ही प्रदर्शनकारी किसान वापस लौट गए।

मेडा की कॉलोनी में ग्रीन वर्ज क्यों नहीं?

किसान प्राधिकरण उपाध्यक्ष से यहीं पूछ रहे थे कि मेडा की वेदव्यासपुरी, श्रद्धापुरी, डिफेंस कालोनी और पल्लवपुरम कॉलोनी एनएच-58 स्थित हाइवे पर हैं, लेकिन इनमें कहीं ग्रीन वर्ज के नियम लागू नहीं होते। सिफ और सिर्फ ग्रीन वर्ज किसानों पर ही क्यों थोपा गया हैं? किसानों के इस सवाल का जवाब प्राधिकरण अफसरों के पास नहीं था। इसमें दो राय भी नहीं है कि ग्रीन वर्ज सिर्फ किसान की जमीन में लगाया गया हैं।

जहां भी प्राधिकरण की कॉलोनी हैं, वहां पर ग्रीन वर्ज के नियम लागू नहीं होते, इसलिए मेडा ने अपनी कॉलोनी को ग्रीन वर्ज से बाहर रखा। किसान की जमीन मेडा खरीद भी नहीं रहा। किसान कैसे अपनी जमीन को खाली रखे? ये भी बड़ा सवाल हैं। किसान जमीन में निर्माण करता है तो प्राधिकरण बुलडोजर लेकर निर्माण को गिरा देता हैं। प्राधिकरण के इस रवैये से किसान तबाही के कगार पर पहुंच गया हैं। क्योंकि तोड़फोड़ भी खूब हो रही हैं, लेकिन आम किसानों पर ही बुलडोजर की हनक क्यों दिखाई जा रही हैं, ये बड़ा सवाल हैं।

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