Thursday, March 26, 2026
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बन गया तीन मंजिला कॉम्प्लेक्स, सोते रहे अफसर

  • अवैध कॉम्प्लेक्स से चंद कदम की दूरी पर कॉम्प्लेक्स गिराते समय हो गया था बड़ा हादसा
  • कैंट बोर्ड की बगल में पैलेस सिनेमा की जगह बनकर तैयार हुआ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स
  • इसमें फंसी हुई है कई कैंट बोर्ड के अफसरों की गर्दन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: छोटे के घर या दुकान में र्इंट लगाने पर बुलडोजर चलाने वाले कैंट बोर्ड के दफ्तर की बगल में पैलेस सिनेमा में तीन मंजिला कॉम्प्लेक्स बनकर तैयार हो गया और अधिकारी सोते रहे। अधिकारियों ने ऐसी नींद भरी कि आज तक आंखें खोलकर यह नहीं देखा कि इस कॉम्प्लेक्स में कुछ अवैध निर्माण हो रहा है या नहीं। जिस मानचित्र को स्वीकृत बताया जा रहा हैं, वो नियमानुसार निरस्त हो चुका हैं। फिर भी नियम विरुद्ध कैसे बिल्डिंग का निर्माण होने दिया जा रहा है, ये बड़ा सवाल हैं। कुछ लोगों ने इसकी शिकायत रक्षा मंत्रालय को भी की हैं।

यही नहीं, आबूलेन स्थित निशात की बिल्डिंग में भी निर्माण पूरा कर दिया गया। इसमें भी कैंट बोर्ड ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसकी खबरे भी लगातार प्रकाशित की जा रही हैं, लेकिन कैंट बोर्ड अफसरों की नींद नहीं टूट रही हैं। इसमें भ्रष्टाचार की ‘बू’ आ रही हैं। जिस बिल्डिंग का निर्माण चल रहा है। इससे चंद कदम की दूरी पर एक बिल्डिंग गिराते समय तीन लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में भी कैंट बोर्ड के अधिकारी फंसे हुए हैं। इसके बावजूद फिर अवैध बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है।

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अंग्रेजों के जमाने में लोगों के मनोरंजन के लिए करीब 100 वर्ष पूर्व हनुमान चौक, बाम्बे बाजार पर पैलेस सिनेमा नाम से सिनेमाघर बनाया था। कई दशक तक उक्त सिनेमा का जलवा रहा। इस सिनेमा हाल में जहां बड़ी संख्या में सैनिक फिल्म देखकर मनोरंजन करते थे, वहीं जिलेभर की आम जनता भी इस सिनेमाघर में फिल्मों का भरपूर आनंद लेती थी। सर्वाधिक अंग्रेजी फिल्म इसी सिनेमा हॉल में लगती थीं। अंग्रेजी फिल्मों के शौकीन दूर-दूर से इस सिनेमाघर में फिल्म देखने आते थे। सिनेमा हॉल जिस दौर में पीक पर चल रहे थे,

उसी दौरान 70 के दशक के अंत में दूरदर्शन की शुरूआत हुई। धीरे-धीरे टीवी चैनल बढ़ते गए। टीवी पर एक दिन मे कई-कई फिल्मों का प्रसारण शुरू हुआ। टीवी पर 24 घंटे के मनोरंजन के प्रोग्राम शुरू हुए तो सिनेमाघरों का क्रेज कम होता गया। दर्शकों की संख्या में जबरदस्त गिरावट आने पर सिनेमाघरों की मेंटीनेंस भी बंद हो गई। सिनेमाघर बदहाली का शिकार होते गए। इससे यह व्यवसाय रसातल में पहुंच गया। इसके साथ ही सिनेमाघर बंद होते चले गए। करीब 25 पूर्व पैलेस सिनेमा हॉल भी बंद हो गया।

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दरअसल, 18 जुलाई 2019 से पहले जहां पैलेस सिनेमा चलता था, उस जगह का कैंट बोर्ड ने मानचित्र स्वीकृत कर दिया था, लेकिन उस दौरान किसी कारण से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। इस तरह से छावनी परिषद अधिनियम 2006 के अनुसार दो वर्ष के लिए मानसित्र स्वीकृत किया जाता है, लेकिन इस दौरान कॉम्प्लेक्स का निर्माण नहीं किया गया। ऐसे में स्वत: ही मानचित्र निरस्त हो जाता है। यदि निर्माणकर्ता आवेदन करता है तो एक-एक वर्ष के लिए उसे एक्सटेंशन दिया जाता है। यहां 2023 तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। यह वर्ष चुनावी वर्ष चल रहा है, ऐसे में पैलेस सिनेमा में कॉम्प्लेक्स का निर्माण शुरू हुआ। रात दिन काम करके तीन मंजिलें खड़ी कर दी गर्इं।

आखिर कैसे खड़ा हो गया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स?

गौरतलब है कि कैंट बोर्ड के कार्यालय से पैलेस सिनेमा की दूरी करीब 100 मीटर है, पर अधिकारी अपनी सीट छोड़कर नहीं देखा कि उनकी बगल में अवैध निर्माण हो रहा है या नहीं। जबकि यदि कैंट क्षेत्र में कोई व्यक्ति अपने घर या दुकान या व्यापारिक प्रतिष्ठान में एक र्इंट भी लगाता है तो कैंट बोर्ड के अधिकारी तुरंत ढहा देते हैं, लेकिन यहां अधिकारियों की नजर में सब ठीक ठाक है।

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