- अभी तक सात माह गुजर जाने के बावजूद इस मामले में पुलिस के स्तर से कोई गिरफ्तारी करके फर्जीवाड़ा करने वालों को बेनकाब नहीं किया जा सका
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: स्टांप में गड़बड़ी करके करोड़ों रुपये का चूना लगाए जाने के अब तक 924 मामले सामने आ चुके हैं। जिसके संबंध में मेरठ के चारों सब रजिस्ट्रार और सरधना सब रजिस्ट्रार की ओर से थाना सिविल लाइन में गड़बड़ी वाले मामलों की सूची प्रेषित करते हुए इन्हें जांच में शामिल करने को कहा गया है। हालांकि अभी तक सात माह गुजर जाने के बावजूद इस मामले में पुलिस के स्तर से कोई गिरफ्तारी करके फर्जीवाड़ा करने वालों को बेनकाब नहीं किया जा सका है।
ट्रेजरी के फर्जी स्टांप से सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लग गया है। गाजियाबाद जिले के एक मामले के प्रकाश में आने के बाद शासन स्तर से प्रदेश भर में स्टांप के फजीवाड़े को लेकर सब रजिस्ट्रार स्तर से जांच कराने का काम शुरू कराया गया है। जिसके अंतर्गत सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। यह मामला इतना बढ़ता चला गया कि आठ महीने के दौरान इनकी संख्या 924 तक पहुंच चुकी है। सहायक आयुक्त स्टांप ज्ञानेन्द्र कुमार के अनुसार सब रजिस्ट्रार प्रथम के यहां 400, तृतीय के यहां 370, द्वितीय के यहां 120, चतुर्थ के यहां 80 और सरधना के यहां एक मामला स्टांप के फर्जीवाड़े का पकड़ में आ चुका है।
बताया गया है कि इस छानबीन के दौरान बीते तीन वर्ष तक की रजिस्ट्री को लिया गया है। तीन साल के बैनामों की जांच में पाया गया है कि अभी तक 924 बैनामों में फर्जी स्टांप का प्रयोग किया गया है। जांच के लिए उन बैनामों में लगे स्टांप को जब ट्रेजरी में भेजा गया तो रिपोर्ट दी गई कि उक्त स्टांप ट्रेजरी से जारी नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि सभी 924 मामलों में विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। यह मामले आपराधिक श्रेणी के होने के कारण सबंधित सब रजिस्ट्रार के माध्यम से थाना सिविल लाइन में सूची भिजवाई गई है। जिसमें शामिल नामों को पहले से दर्ज एफआईआर में शामिल करने का अनुरोध किया गया है।
गाजियाबाद में पकड़ा गया पहला मामला
स्टांप की गड़बड़ी का पहला मामला गाजियाबाद से प्रकाश में आया। लोनी के आलियाबाद में मोहम्मद जाहिद ने चार जुलाई को 210 हेक्टेयर खेती की जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। स्टांप वेंडर ने 10 रुपये का ई-स्टांप निकाला और उसमें छेड़छाड़ कर 10 रुपये की जगह 1.10 लाख 500 रुपये का ई-स्टांप बना दिया। इसकी जानकारी विभाग को रजिस्ट्री होने के बाद एआईजी स्टांप कार्यालय में ई-स्टांप को लॉक करते समय हुई। मोहम्मद जाहिद की रजिस्ट्री में लगे ई-स्टांप को लॉक करने के दौरान जब स्टांप का नंबर डाला गया
तो वेबसाइट पर 10 रुपये का ई-स्टांप दिखा, जबकि स्टांप पर एक लाख 10 हजार 500 रुपये अंकित था। जांच की गई तो और भी गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि स्टांप वेंडर अफरोज परवीन की लॉगइन आईडी से दूसरे स्टांप वेंडर जयवीर कश्यप को आवंटित ई-स्टांप निकाला गया। इस मामले में मोहम्मद जाहिद, स्टांप वेंडर अफरोज परवीन, जयवीर कश्यप, बैनामा लेखक सचिन चौधरी और सचिन देव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।

