नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर अक्षय नवमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इसे आंवला नवमी या आंवला पूजन भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मान्यता है कि आंवले का पेड़ भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि इस पेड़ में भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों का वास होता है। इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे पूजा, व्रत और भोजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज आंवला नवमी की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में।
अक्षय नवमी तिथि
पंचांग के अनुसार, हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी मनाई जाती है। नवमी तिथि की शुरुआत 30 अक्तूबर 2025 को सुबह 10 बजकर 07 मिनट से होगी जो अगले दिन 31 अक्तूबर 2025 को सुबह 10 बजकर 04 मिनट पर खत्म होगी। उदयातिथि के आधार पर अक्षय नवमी 31 अक्तूबर 2025 को मनाई जाएगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त
अक्षय नवमी तिथि पर पूजा का शुभ मुहूर्त 31 अक्तूबर 2025 को सुबह 06 बजकर 37 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
महत्व
आंवला नवमी पर भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा-अर्चना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी या अक्षय नवमी कहा जाता है। यह तिथि द्वापर युग के आरंभ की प्रतीक मानी गई है, इसलिए इसे युगादि तिथि भी कहा गया है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा कर परिवार की आरोग्यता और समृद्धि की कामना की जाती है। इस दिन तप, जप, दान और व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। माना जाता है कि आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करने से शरीर के रोग दूर होते हैं और मन की शांति प्राप्त होती है।

