नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटाकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हिंदू धर्म में काल भैरव जयंती का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व भगवान शिव के उग्र और रौद्र स्वरूप भगवान काल भैरव की उपासना का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के दोष, भय, ऋण और नकारात्मकता दूर हो जाती है। आज बुधवार को काल भैरव जयंती मनाई जा रही है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन यदि श्रद्धा से काल भैरव की पूजा कर उन्हें प्रिय चीजों का भोग अर्पित करने से व्यक्ति के जीवन से सभी तरह के दोष, भय, ऋण और नकारात्मकता समाप्त हो जाती है।
शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव ने अपने एक तेजस्वी और रक्षक स्वरूप के रूप में काल भैरव का प्राकट्य किया था। तभी से इस दिन को काल भैरव अष्टमी या भैरव जयंती कहा जाता है। इस शुभ अवसर पर भैरव बाबा को उनकी प्रिय वस्तुओं का भोग लगाना अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसे में चलिए जानते हैं, कौन-कौन से भोग काल भैरव को अति प्रिय हैं।
काल भैरव के प्रिय भोग
इमरती
भैरव भगवान को इमरती का भोग अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। यह उनका प्रिय भोग है और इससे वे शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
शराब
कुछ क्षेत्रों में काल भैरव को कच्ची या देसी शराब का भोग लगाने की परंपरा है। यह प्रथा स्थानीय रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है। हालांकि हर जगह यह आवश्यक नहीं माना जाता।
उड़द की खिचड़ी
काले उड़द की खिचड़ी काल भैरव के प्रमुख भोगों में से एक है। इसे अर्पित करने से व्यक्ति की इच्छाएं पूर्ण होती हैं और रुके हुए कार्यों में सफलता मिलती है।
काले तिल से बनी वस्तुएं
काला तिल काल भैरव को अत्यंत प्रिय माना गया है। तिल से बनी मिठाइयाँ जैसे लड्डू, रेवड़ी या गजक का भोग लगाने से शनि दोष के प्रभाव भी कम होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
दही वड़ा
उड़द दाल से बने दही वड़े का भोग लगाने से काल भैरव की उग्र ऊर्जा शांत होती है। ऐसा करने से मन को शांति और जीवन में संतुलन प्राप्त होता है।

