Home धर्म ज्योतिष Maa Kushmanda Puja: नवरात्रि का चौथा दिन आज, जानें मां कुष्मांडा की...

Maa Kushmanda Puja: नवरात्रि का चौथा दिन आज, जानें मां कुष्मांडा की पूजा विधि और महत्व

0

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विशेष महत्व है। मां कुष्मांडा देवी दुर्गा का आठवां रूप मानी जाती हैं और उन्हें अष्टभुजा देवी के रूप में पूजा जाता है। उनका रूप अत्यंत दिव्य और शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कुष्मांडा ने ब्रह्मांड का सृजन किया था और उनकी उपासना से भक्तों के जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि में मां के इस रूप की पूजा करने से पर भक्तों की आयु, यश, कीर्ति, बल और आरोग्यता में वृद्धि होगीत है। ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन मां कुष्मांडा की पूजा विधि और उनके महत्व के बारे में…

मां कुष्मांडा का स्वरूप

मां कुष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है। उनके आठ भुजाएं हैं, जिनमें कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जप माला धारण किए हुए हैं। मां सिंह की सवारी करती हैं। उनका यह स्वरूप शक्ति, समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है।

महत्व

देवी कुष्मांडा रोगों का नाश करने वाली और आयु में वृद्धि करने वाली मानी जाती हैं। मां कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों के सभी रोग, दुख और कष्ट समाप्त हो जाते हैं। इनकी पूजा से आयु, यश, बल और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इनके पूजन से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और मनुष्य की आरोग्यता बनी रहती है। मां कुष्मांडा की आराधना से जीवन में सभी प्रकार की समृद्धि और सुख-शांति का प्रवेश होता है।नवरात्र उपासना में चौथेदिन इन्ही के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है।

पूजा विधि

स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने पूजन स्थल को शुद्ध करें। मां कुष्मांडा की प्रतिमा या चित्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें। मां का ध्यान कर उन्हें आमंत्रित करें। यह ध्यान करते समय मां के दिव्य स्वरूप की कल्पना करें। इसके बाद जल और पंचामृत से स्नान कराएं। फिर मां को सुंदर वस्त्र, फूल, माला और आभूषण अर्पित करें। विशेष रूप से, कुम्हड़ा (कद्दू) का भोग मां को अर्पित करना शुभ माना जाता है। मां को भोग में मिष्ठान्न, फल, नारियल और विशेष भोग अर्पित करें। मां कुष्मांडा को सफेद चीजों का भोग लगाना शुभ होता है। अंत में मां की आरती उतारें और उन्हें दीपक, धूप और गंध अर्पित करें।

इन मंत्रों का जाप करें

या देवी सर्वभूतेषु मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडा देवी नमः”

What’s your Reaction?
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version