- आधुनिक युग में पराठा-अचार वाला पारंपरिक लंच बॉक्स खोता जा रहा अपनी पहचान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ऐसा कहा जाता है कि किसी के भी दिल का रास्ता उसके पेट से होकर गुजरता है। हमारे देश में किसी भी सम्बन्ध की खटास मिटानी हो या रिश्तों को मजबूत करना हो तो इन सबका माध्यम खाना ही बनता है। वहीं बात जब बच्चों की आती है तो मां और बच्चों के बीच मधुर सम्बन्ध की मजबूत कड़ी लंच बॉक्स है। यह एक ऐसी कड़ी है जो मां और बच्चों को सीधे तौर पर जोड़ती है। मगर आधुनिक युग में पराठा-अचार वाला पारंपरिक लंच बॉक्स अपनी पहचान खोता जा रहा है और उसकी जगह आज लंच बॉक्स में फ्रोजन फूड आइटम्स ने ले ली है।
आज के दौर में अधिकतर माता-पिता दोनों ही जॉब करते हैं। देर रात तक की शिफ्ट में काम करने के कारण सुबह जल्दी आंख नहीं खुलती ऐसे में अति व्यस्त दिनचर्या के चलते आज कल तेजी से लोग इजी-टू-मेक और फ्रोजन फूड्स की तरफ बढ़ रहे हैं। जिसका सीधा असर न केवल मां-बाप पर बल्कि बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बच्चों के लंच बॉक्स में आज पराठा-अचार, पराठा-सब्जी आलू के परांठे, दाल-रोटी, पकौड़ी, घर के सैंडविच की जगह इजी-टू-मेक फ्रोजन फूड जैसे नजेटस, मोमोज, चिली पोटैटो, बर्गर, टिक्की आदि ने ले ली है मगर बता दें कि इनको ज्यादा दिन तक सुरक्षित रखने के लिए अर्थात शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इनमें मोनो सोडियम ग्लूकोमेट और सोडियम बाइकाबोर्नेट तथा ब्लू 1 और रेड 3 जैसे केमिकल तत्वों का प्रयोग किया जाता है जो सेहत के लिए हानिकारक हैं।
इजी टू मेड फूड है जानलेवा
भले ही फ्रोजन फूड सुविधाजनक है और व्यस्ततम जीवन शैली को आसान बनाता है। इसको तैयार करने में मात्र 5 से 10 मिनट का समय जाता है और स्वादिष्ट भोजन आपके सामने होता है परन्तु यह सेहत के मानकों की धज्जियां उड़ा रहा है। इसमें डलने वाले प्रिजर्वेटिव शुगर, हृदय रोग, पेट संबंधी रोग, लिवर, कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा प्रतिदिन बढ़ा रहे हैं। फ्रोजन डिपोर्ट के मालिक सुशांत गोयल बताते हैं कि फ्रोजन फूड की लाइफ 3 से 18 और किसी-किसी की 24 महीने भी होती है। पिछले एक दशक में इसके बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए उन्होंने यह दुकान खोली, कोरोना में काम कम हो गया पर इनको खरीदने वाला एक विशेष वर्ग है जो आज भी किसी परवाह के बगैर इन्हें खरीदना पसंद करता है।
बच्चों में पैदा हो जाती है भयंकर बीमारी
डाइटिशियन डा. भावना गांधी बताती है कि फ्रोजन फूड में ट्रांसवेट होने के कारण बच्चे जल्दी वेट गेन कर रहे हैं। जिसके कारण उनमें कई बीमारियां उत्पन्न होने की संभावनाएं लगातार बढ़ रही है। वहीं, टीनएजर्स में पीडियाट्रिक ओबेसिटी और डायबिटीज के केसेस में भी इजाफा हो रहा है।

