Wednesday, March 25, 2026
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खस्ताहाल सिटी बसों में सफर जोखिम भरा

  • सिटी बसों में आगे के हिस्से गायब, बॉडी भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त
  • रास्ते में कहीं भी बंद हो जाती हैं खस्ताहाल बसें

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: मेरठ से सरधना नगर व देहात के लिए दौड़ रही खटारा सीएनजी वाली सिटी बसों में लोग जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। बगैर मानक के यह बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। हालत यह है कि अधिकांश बसों के आगे के हिस्से यानी डेशबोर्ड गायब हैं। सीट की जगह तख्ते लगे हुए हैं। इसके अलावा सीटों को रोकने के लिए रस्सी से बांध रखा है। रामभरोसे चल रही यह बसें कहीं भी बंद हो जाती हैं।

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कम इन बसों का र्इंजन या अन्य पुरजे काम करना बंद कर दें, इसकी कोई गारंटी नहीं है। कहने को इन बसों की मरम्मत के लिए ठेका छोड़ा हुआ है। मगर कागजों में ही बसों की मरम्मत हो रही है। ऐसे में यदि इन बसों के कारण कोई हादसा हो जाता है तो कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं है। हैरत की बात यह है कि दम तोड़ रही इन बसों को बगैर मानके के फिटनेस प्रमाण पत्र भी जारी हो रहे हैं।

महानगर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के तहत क्षेत्र में सिटी बसों का संचालन किया जाता है। कहने को यह बसें मेरठ शोहराब गेट से चलती हैं। जो सरधना नगर के अलावा देहात क्षेत्र तक संचालित की जा रही हैं। पूरी तरह से खटारा हो चुकी इन बसों की हालत देखकर किसी का भी सिर चकरा जाएगा। बसों की बॉडी पर इतने पेबंद लग हुए है कि गिनती नहीं की जा सकती है। अधिकांश बसों के आगे के हिस्सा यानी बोनेट गायब हैं। बोनेट में मीटर, स्वीच जैसी कोई चीज नहीं है। गेयर लिवर भी चालकों के हुनर पर काम कर रहे हैं।

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इलेक्ट्रिक सुविधा तारों के जोड़ तोड़ करके की हुई है। हालत यह है कि कई बसों में सीट की जगह तख्ते लगे हुए हैं। बाकी झूल रही सीटों को रोकने के लिए रस्सी से बांध रखा है। खिड़कियों के शीशों की बात करना ही बेकार है। कुल मिलाकर इन बसों को संचालित नहीं किया जा रहा है, बल्कि धकेलने का काम किया जा रहा है। बस कब और कहां बंद हो जाए,

इसकी कोई गारंटी नहीं है। बसों की मरम्मत के लिए प्राइवेट कंपनी को ठेका छूटा हुआ है। मगर इनकी मरम्मत भी कागजों में हो रही है। हैरत की बात यह है कि दम तोड़ रही बसों को फिटनेस पास भी किया जार हा है। कुल मिलाकर यात्री जान जोखिम में डालकर इन बसों में यात्रा कर रहे हैं।

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धक्के लगाकर स्टार्ट होती हैं सिटी बस

चालकों से बात करने पर पता चला कि सुबह के समय अधिकांश बसों को धक्का लगाकर चालू करना पड़ता है। सेल्फ से स्टार्ट करने की बात तो बेमानी है। इसके बाद भी रास्ते में बस कहा बंद हो जाए, इसका खतरा हर समय बना रहता है।

लंबे समय से नहीं हो रही मरम्मत

खटारा बसों को चलाने वाले चालकों का कहना है कि परिवार पालने के लिए नौकरी करनी पड़ रही है। पहले तो इन बसों की थोड़ी बहुत मरम्मत भी हो जाती है। मगर अब तो लंबे समय से कोई मरम्मत नहीं हो रही है। चालक जैसे तैसे खुद ही बसों को चला रहे हैं। शिकायत करने पर कोई सुनने को तैयार नहीं है।

फिटनेस पर उठ रहे सवाल

वैसे तो आरटीओ प्राइवेट वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने से पहले पूरी ताक झांक करता है। मगर इन सिटी बसों की फिटनेस पास आंख बंद करके कर रहा है। बेहद खस्ताहाल बसों की फिटनेस पर भी लगातार सवाल उठते रहते हैं।

अधिकांश बसों का समय खत्म होने के नजदीक

जानकारी करने पर पता चला कि पहले यह बसें कानपुर में संचालित की जा रही थी। कोरोना काल के बाद कुल 80 बसों को मेरठ लाया गया। जिनमें से करीब दो दर्जन से अधिक बस सरधना व देहात में चल रही हैं। इन सभी बसों का रजिस्ट्रेशन वर्ष 2009-10 का है। यानी बसों का समय पूरा होने भी कुछ ही महीनों का वक्त रह गया है।

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