- देशभर के बाजारों में बढ़ी मेरठी तिरंगे की मांग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कांवड़ यात्रा पूर्ण होते ही बाजारों में स्वतंत्रता दिवस की तैयारी शुरू हो चुकी है। साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाया गया अभियान आजादी का अमृत महोत्सव और हर घर तिरंगा ने आम लोगों के लिए स्वतंत्रता दिवस के मायने ही बदल दिए हैं। अब लोग स्वतंत्रता दिवस को महज छुट्टी के तौर पर ना लेकर त्योहार के रूप में ही मनाते हैं। 15 अगस्त में अब कुछ ही दिन शेष है। सन 1857 की क्रांति का बिगुल बजाने वाली क्रांतिधरा में तमाम बाजार, चौराहे और दुकाने तिरंगे स्टैंड, तिरंगी चूड़ियां, बैंड, टी शर्ट्स आदि से सजकर तैयार हैं।
स्वतंत्रता दिवस पर तमाम स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और संस्थाओं के अनेकानेक कार्य होते हैं। जिसमें काफी संख्या में ध्वजारोहण में ध्वज वितरण किया जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए मेरठ का प्राचीन हैंडलूम खंदक बाजार भी तैयारियों में जुटा हुआ है। बता दे कि क्रांतिधारा में तैयार किये गए झंडे महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, गुरुग्राम आदि स्थानों में सप्लाई किए जाते हैं। टेक्सटाइल के मालिक नीलकमल रस्तोगी बताते हैं कि उनके यहां 365 दिन झंडे तैयार किए जाते हैं। एक दिन में केवल 15 से 20 झंडे तैयार किए जाते हैं।
वो बताते हैं कि खादी की तीन वैरायटी तैयार होती है। जिसमे पहली गांधी आश्रम खादी होती है। जिसे केसमेंट सिंगल धागे से तैयार किया जाता है, दूसरी खादी बटे हुए धागे से तैयार की जाती है व तीसरी खादी सूती धागे से तैयार की जाती है, इसमें दोनों तरफ धागे होते हैं। झंडे वालों ने बताया कि 15 अगस्त पर सरकारी कार्यालयों पर फैराये जाने वाला झंडा खादी से तैयार किया जाता है।
खास बात ये है कि इस झंडे को झंडा फहराने के नियमों के अनुसार तैयार किया जाता है। दरअसल, ध्वज को डंडे के अंदर नहीं पिरोया जाता बल्कि उसको टॉप लगाकर बांधा जाता है। खंदक बाजार में तैयार खादी के ध्वजों की यह खासियत होती है कि इसमें भगवा, सफेद व हरे रंग कि स्टिचिंग में उन्हीं रंगो के धागो का इस्तेमाल किया जाता हैं। साथी दुकानदार बताते हैं कि यह राष्ट्रीय ध्वजों पर सरकार द्वारा जीएसटी नहीं ली जाती है।
ब्रास खादी ध्वज
नीलकमल रस्तोगी बताते है कि जितने भी आर्मी अफसर, विधायक, मंत्री, सांसद व सरकारी मंत्रालय हैं, वहां पर टेबल पर केवल ओरिजिनल ब्रास का झंडा लगाया जाता है। इस झंडे कि खास बात यह है कि अमूमन ब्रास का क्रॉस फ्लैग विशेष तौर पर आर्मी के लिये ही डिजाइन किया गया हैं। पहले सिविलियन के लिए यह अधिकार नहीं था मगर हर घर झंडा अभियान के बाद से हर व्यक्ति आॅफिस के लिए यही झंडा इस्तेमाल कर गर्व महसूस करता हैं। साथ ही मेटल होने के कारण झंडे पर 18 पर्सेंट जीएसटी लागू होती हैं। इसकि कीमत 600 से 1200 रुपये तक है।

