जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि उसने 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उसके प्रमुख पावर प्लांट्स पर हमला करेगा। ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू होगी और अन्य ऊर्जा स्थलों तक बढ़ेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हाल ही में अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगी पाबंदी हटा दी, जो पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका का बड़ा रुख माना गया।
22 देशों ने ईरानी हमलों की निंदा की
संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व में 22 देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की। इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। बयान में कहा गया कि ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में निहत्थे जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले अस्वीकार्य हैं और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता है। उन्होंने ईरान से तुरंत हमले रोकने, समुद्री मार्गों में बाधा न डालने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने की मांग की।
कौन-कौन से देश शामिल हैं?
इस संयुक्त बयान पर ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, फिनलैंड सहित कुल 22 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। इन देशों ने कहा कि समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का मूल सिद्धांत है और इसमें बाधा डालना वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है।

