- नहीं हो पा रही शिनाख्त, आखिर कौन लगा जाता है यहां शवों को ठिकाने?
- तीन माह में जनपद में मिल चुकी है 28 अज्ञात लाशें
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिले में आए दिन अज्ञात लाशें मिल रही हैं। उनमें से अधिकांश लाशों की शिनाख्त आज तक नहीं हो सकी है। वह लाशें पुलिस से आज भी खुद का पता पूछ रही हैं। मृतक कहां का है और किस स्थिति में मौत हुई है। यह सवाल पुलिस के लिए यक्ष प्रश्न बन गए हैं। लाशें अगर बोल पाती तो शायद वह पुलिस से यही सवाल करती कि उन्हें किसने और क्यों मारा हैं। जिला अज्ञात लाशों का कब्रगाह बन चुका है।
हाल ही में हुई घटनाओं में पुलिस एक भी शव की पहचान नहीं कर पाई है। इन वारदात का पर्दाफाश करने के लिए आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर शव की पहचान को बड़ी जद्दोजहद की जाती है। यदि थंब मशीन पर अंगूठा लगाने से आधार कार्ड का पूरा रिकार्ड मिला जाए, तब शवों की पहचान करने में आसानी हो जाएगी।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर अंगूठा लगाने से पूरा रिकार्ड सामने लाने की अपील की है। लावारिस व्यक्ति व लाश की पहचान कराने के लिए पुलिस ने जिपनेट सॉफ्टवेयर तैयार किया था। इस पर प्रदेश और देश के सभी लावारिस लोगों और शवों के फोटो अपलोड किए जाते हैं।
सवाल है कि जिपनेट की जनपद में कितनी मॉनिटरिंग होती है। सिर्फ एक सेल के कर्मचारी ही जिपनेट को देखते हैं, जबकि इस सॉफ्टवेयर को देखने के लिए प्रत्येक थाने को अनिवार्य करना चाहिए। तभी जिपनेट पर अपलोड किए गए शवों के ब्यौरे की पहचान हो सकती है। जनपद में लगातार मिल रहे लावारिस शवों की पहचान नहीं हो पा रही है। ऐसे में हत्यारोपियों तक पहुंचना नामुमकिन हो रहा है।
रोहटा थाना क्षेत्र में मिले दो शवों के हाथ पर लालटू और लाल अधिकारी लिखा होने के बाद भी पहचान नहीं कर सकें। परतापुर थाना क्षेत्र के काशी गांव में तालाब के किनारे महिला और बच्चे का शव मिला था। बच्चा तो पुलिस के रिकॉर्ड तक में दर्ज नहीं किया है। वहीं, ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के लिसाड़ी रोड पर नाले में बोरे में बंद महिला का शव मिला था उसकी भी पहचान नहीं हो सकी है।
ये है शवों की पहचान करने का नियम
पुलिस के साफ्टवेयर जिपनेट पर अज्ञात लाशों के फोटो और कपड़े अपलोड करना। जाने के सभी जनपदों के थानों से वायरलेस सेट से लावारिस शवों के बारे में जानकारी देना। इंटरनेट मीडिया पर फोटो वायरल करना। थानों और सार्वजनिक स्थानों पर सभी शवों के पोस्टर लगा देना।
थंब मशीन पर अंगूठे से हो जाएगी पहचान
एसपी देहात केशव कुमार का कहना है कि यदि थंब मशीन पर अंगूठा लगाने से आधार कार्ड की पूरी डिटेल मिल जाए तभी शवों की पहचान हो पाती है। उन्होंने प्रदेश सरकार को इस संबंध में पत्र भी जारी किया है।
ये शव ढूंढ रहे अपने घरों का पता
- 27 मार्च को नौचंदी थाना क्षेत्र के पटेल मंडल में एक अज्ञात युवक का मिला था शव, नहीं हो सकी शिनाख्त।
- 11 मार्च को मुंडाली के गांव जिसौरा में महिला की हत्या कर शव को जला दिया गया था।
- 12 फरवरी को थाना रोहटा के गांव दिलावरा जैनपुर मार्ग पर सौ मीटर के अंतराल में दो शव मिले थे। एक के हाथ पर लालटू तो दूसरे के हाथ पर लाल अधिकारी लिखा था।
- 25 जनवरी को परतापुर के गांव काशी में 24 घंटे के अंतराल में तालाब के किनारे पर एक महिला और एक नवजात का शव मिला था।
- 14 दिसंबर को ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के माधवपुरम नाले के अंदर युवती का शव मिला था।

